polyamour
पॉलीएमरी जन्मजात प्रवृत्ति है या महज चॉइस?
इस बारे में विशेषज्ञों की अलग-अलग राय है। सेक्स, प्रेम और इंसानी इच्छाओं के बारे में चर्चा करने वाले प्रोजेक्ट 'एजेंट ऑफ़ इश्क़' की अगुवाई करने वाली पारोमिता वोहरा ने बीबीसी से कहा, "समाजशास्त्रियों की मानें तो इंसान में पॉलीएमरी यानी एक से ज़्यादा पार्टनर रखने की आदत जन्म से ही मौजूद होती है। बाद में सभ्यता के विकास के साथ लोगों ने इंसानी जीवन कई सामाजिक नियमों से बांध दिया। मसलन, एक शख़्स को एक ही पार्टनर रखने की अनुमति। हालांकि कुछ लोगों के मामले में ये सिर्फ़ चॉइस का मामला भी हो सकता है।" पारोमिता कहती हैं, "मैं ये नहीं कहूंगी कि एक पार्टनर रखने का चलन बुरा है। कई मायनों में ये इंसानी ज़िंदगी को अनुशासित करता है लेकिन साथ ही ये हमें झूठे रिश्तों में बंधने के लिए मजबूर भी करता है। हम दूसरे रिश्तों में होते हुए भी अपने पार्टनर से झूठ बोलते रहते हैं और इस घुटन में पूरी ज़िंदगी बिता देते हैं। पॉलीएमरी कम से कम हमें झूठे बंधनों को तोड़कर ईमानदारी से जीने का मौका देती है।" पेशे से मनोवैज्ञानिक शिखा भारतीय सुप्रीम कोर्ट के हालिया फ़ैसले का ज़िक्र करती हैं जिसमें एडल्ट्री को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया था। वो कहती हैं, "अदालत के इस फ़ैसले के पीछे भी कहीं न कहीं ये सच्चाई छिपी है कि इंसानी इच्छाओं पर किसी का ज़ोर नहीं है और कम से कम इसे अपराध तो नहीं माना जा सकता।"