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Mental Health & Anger: क्या आपको भी गुस्से पर नहीं रहता काबू? ‘90 सेकंड रूल’ बदल सकता है आपकी जिंदगी

Sun, 14 Jun 2026 02:29 PM IST
Abhilash Srivastava लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

 गुस्सा आना स्वाभाविक है, लेकिन उसे कैसे संभालना है, यही आपकी समझदारी और रिश्तों की परीक्षा होती है। जब भी किसी बात पर गुस्सा आए, खुद को याद दिलाएं कि यह भावना स्थायी नहीं है। आप धीरे-धीरे गहरी सांस लें और शरीर और दिमाग दोनों शांत करें।
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गुस्से से रहते हैं परेशान? - फोटो : Amarujala.com/AI
कविवर रहीम ने कहा था- ‘बिगरी बात बनै नहीं, लाख करौ किन कोय। रहिमन फाटे दूध को, मथे न माखन होय।’

यानी जैसे फटे हुए दूध से मक्खन नहीं निकाला जा सकता, वैसे ही एक बार बिगड़े रिश्ते या बात को लाख कोशिशों के बाद भी पूरी तरह सुधारा नहीं जा सकता। असल में, रिश्तों की डोर बहुत नाजुक होती है, जो कई बार गुस्से में कही गई बातों से टूट जाती है।

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, ऐसी स्थिति में ‘90 सेकंड रूल’ अपनाना मददगार साबित हो सकता है।
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गुस्सा आने की स्थिति - फोटो : Freepik.com
क्या है यह नियम?

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की न्यूरोएनाटॉमिस्ट, डॉ. जिल बोल्ट टेलर के अनुसार, जब हमें गुस्सा आता है, दुख होता है या कोई बात दिल को ठेस पहुंचाती है, तब हमारे मस्तिष्क में एक रासायनिक प्रतिक्रिया शुरू हो जाती है।
 
  • इससे दिल की धड़कन तेज हो जाती है और भावनाएं अधिक तीव्र महसूस होने लगती हैं।
  • डॉ. टेलर के मुताबिक यह रासायनिक प्रतिक्रिया केवल 90 सेकंड तक रहती है।
  • यदि आप इस दौरान खुद को शांत रखें और तुरंत प्रतिक्रिया न दें, तो गुस्से की तीव्रता धीरे-धीरे कम होने लगती है।
  • लेकिन यदि इसके बाद भी वही भावना बनी रहती है, तो उसका कारण उस बात को बार-बार मन में दोहराना हो सकता है।
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गुस्से पर रखें कंट्रोल - फोटो : Freepik.com
भावनात्मक संतुलन का रखें खास ध्यान

अक्सर रिश्ते किसी बड़ी वजह से नहीं, बल्कि छोटी-छोटी बातों पर दिए गए तीखे जवाबों के कारण टूटते हैं।

पति-पत्नी, दोस्ती या प्रेम संबंध, हर रिश्ते में भावनात्मक संतुलन बेहद जरूरी होता है। मान लीजिए, किसी करीबी ने आपसे ऐसी बात कह दी जिससे आपको ठेस पहुंची। यदि आप उसी समय गुस्से में प्रतिक्रिया देती हैं, तो स्थिति और बिगड़ सकती है।

लेकिन यदि आप 90 सेकंड तक शांत रहकर गहरी सांस लें, पानी पीएं या कुछ देर चुप रहें, तो आपका दिमाग धीरे-धीरे सामान्य होने लगता है। इससे आप अधिक समझदारी और संवेदनशीलता के साथ अपनी बात रख पाती हैं।

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गहरी सांस वाले अभ्यास से मिलता है आराम - फोटो : Adobe
गुस्सा आए तो क्या करें?

जब भी किसी बात पर गुस्सा आए, खुद को याद दिलाएं कि यह भावना स्थायी नहीं है। आप धीरे-धीरे गहरी सांस लें और शरीर और दिमाग दोनों शांत करें। यह तनाव को कम करने में मदद करेगा।
 
  • चाहें तो उस समय मोबाइल, संगीत या थोड़ी वॉक का सहारा लें। इससे दिमाग नकारात्मक विचारों से बाहर आता है।
  • इसके बाद अपनी बात समझाने के लिए शब्दों का सही चयन करें।
  • इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि धीरे-धीरे यह आदत आपको अधिक धैर्यवान और समझदार बना देती है।
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गुस्से में बरतें समझदारी - फोटो : Adobe Stock Photo
क्या है विशेषज्ञ की सलाह?

रिलेशनशिप काउंसलर स्नेहा मिश्रा कहती हैं,  गुस्सा आना स्वाभाविक है, लेकिन उसे कैसे संभालना है, यही आपकी समझदारी और रिश्तों की परीक्षा होती है। हर रिश्ता प्यार, धैर्य और समझ से चलता है। ऐसे में केवल 90 सेकंड यानी डेढ़ मिनट का धैर्य कई साल पुराने रिश्ते को टूटने से बचा सकता है। इसलिए अगली बार जब भावनाएं हावी हों, तो बस 90 सेकंड रुकिए, संभव है आपका रिश्ता और भी मजबूत हो जाए।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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