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एक ऐसी लड़की की कहानी जो खुद के साथ करती है रोमांस और डेट

Sat, 16 Nov 2019 04:54 PM IST
ललित फुलारा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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''ये सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है कि मैं हमेशा ख़ुद को देखकर ही आकर्षित होती हूं।बाकी टीनेजर्स की तरह मुझे भी अपने व्यक्तित्व और लुक की चिंता रहती है। जब भी मैं नहा कर आती हूं, कपड़े पहनती हूं या फिर सेक्शुअल अट्रैक्शन की खोज में होती हूं तो ख़ुद को आईने में देखती हूं। हो सकता है मेरा शरीर आकर्षित करने वाला न हो। मैं पतली हूं, मेरी ठोडी बहुत लंबी है, मेरे बाल घुंघराले हैं। लेकिन बिना कपड़े के मेरा शरीर मुझे वाक़ई आकर्षित करता है। मुझे अपनी सेक्शुअलिटी के बारे में सोच कर कभी अजीब नहीं लगता था लेकिन 17 साल की उम्र में जब मैंने अपने दोस्तों को इस बारे में बताया तो इस बारे में मेरी सोच बदल गई।
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- फोटो : pixa
हम सब साथ में बड़े हुए थे अब भी एक-दूसरे के काफ़ी क़रीब हैं। हम अक्सर अपनी सेक्शुलिटी के अनुभवों को लेकर बातें किया करते थे। लेकिन जब मैंने उनको अपने सेक्शुअल अनुभवों के बारे में बताया तो किसी ने समझा ही नहीं बल्कि उन लोगों को ये हास्यास्पद लगा। वो इस बात को लेकर मेरा मज़ाक बनाते रहे। मैं भी उनके चुटकुलों पर उनके साथ हंसती थी। पर भीतर ही भीतर मैं सोचती थी कि मेरे साथ क्या ग़लत है। तब मुझे पता चला कि मैं ख़ुद से कुछ इस तरह सेक्शुअली आकर्षित हूं जैसे आम लोग नहीं होते हैं। लेकिन अब मुझे इस तरह महसूस करने की आदत हो गई है। हाल ही में मुझे पता चला है कि जैसा मैं ख़ुद को लेकर महसूस करती हूं उसके लिए एक शब्द भी है जो विज्ञान में इस्तेमाल किया जाता है-'ऑटोसेक्शुअल' अब मैं खुद को गर्व से 'ऑटोसेक्शुअल' बताती हूं।''
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- फोटो : social media
क्या है ऑटोसेक्शुअलिटी?
वो लोग जो अपने शरीर को देखकर ही ख़ुद को यौन सुख दे पाते हैं और अपने शरीर को देखकर ही आकर्षित होते हैं, उन्हें विज्ञान 'ऑटोसेक्शुअल' कहता है। ऐसे लोग न तो गे होते हैं और न ही लेज़्बियन बल्कि इनके लिए 'ऑटोसेक्शुअल' टर्म का इस्तेमाल किया जाता है। इन लोगों को किसी भी जेंडर के व्यक्ति से यौन आकर्षण नहीं होता है। ऑटोसेक्शुअल एक ऐसा शब्द है जिसे परिभाषित करने के लिए वैज्ञानिकों को काफ़ी मेहनत करनी पड़ी। इस शब्द को ठीक से परिभाषित करने के लिए न तो ज़्यादा डेटा है और न ही ज़्यादा रिसर्च।

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- फोटो : pixa
साल 1989 में इस शब्द का ज़िक्र पहली बार सेक्स चिकित्सक बर्नाड एपेलबाउम ने एक पेपर में किया था। उन्होंने इस शब्द का इस्तेमाल उन लोगों के लिए किया था जो किसी दूसरे व्यक्ति की सेक्शुअलिटी से आकर्षित नहीं हो पाते हैं। लेकिन आज इस शब्द का इस्तेमाल उन लोगों के लिए किया जाता है जो विशेष रूप से अपने ही शरीर से सेक्शुअली आकर्षित होते हैं।
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- फोटो : pixabay
अपने साथ ही डेट और अपने साथ ही रोमांस
माइकल आरोन, 'मॉडर्न सेक्शुअलिटी: द ट्रुथ अबाउट सेक्स एंड रिलेशनशिप ' के लेखक हैं। वो बताते हैं कि अपने आपको देख कर आकर्षित होना काफ़ी आम है लेकिन कुछ लोग दूसरों की तुलना में ख़ुद को देखकर या छूकर अधिक उत्तेजित महसूस करते हैं। ऐसे ही लोग 'ऑटोसेक्शुअल' कहलाते हैं।
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- फोटो : pixabay
बहुत से लोगों ने मुझे 'नार्सिस्ट' कहा। यानी वो व्यक्ति जो ख़ुद से बहुत प्यार करते हों और अपने आप पर ही मुग्ध होते रहते हैं। लेकिन लंदन यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाले डॉ जेनिफर मैकगोवन का कहना है कि 'नार्सिसिस्टिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर' के मरीज़ में सहानुभूति की कमी, प्रशंसा की ज़रूरत या स्वयं को लेकर ज़्यादा भावनाएं जैसे लक्षण होते हैं, ऑटोसेक्शुअलिटी एक अलग चीज़ है। डॉक्टर जेनिफ़र बताते हैं, ''ऑटोसेक्शुअल्स अपने साथ सेक्शुअली ज़्यादा अच्छा महसूस करते हैं जबकि नार्सिस्ट लोगों को दूसरे लोगों के अटेंशन की चाह होती है। इसके अलावा ऑटोसेक्शुअलिटी का सहानुभूति या प्रशंसा की कमी से भी कोई लेना-देना नहीं है।''
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- फोटो : social media
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि दूसरे लोगों की तरह ऑटोसेक्शुअल लोगों में भी सेक्शुअलिटी के अलग-अलग स्तर देखने को मिलते हैं। कुछ लोग ऑटोसेक्शुअल होने के साथ-साथ ऑटोरोमेंटिक भी होते हैं, जो ख़ुद के साथ ही डेट पर या अच्छे मौसम में एक वॉक के लिए जाते हैं। ऑटोसेक्शुअल होने के साथ-साथ मुझे कभी-कभी आम व्यक्ति जैसा होने की इच्छा होती है। बहुत ग़ुस्सा आता है जब आपके दोस्त नहीं समझ पाते कि आप कैसा महसूस कर रहे हैं।

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जब मैं अपने बॉय फ़्रेड के साथ होती हूं तो मुझे लगता है कि मैं अलग तरह से महसूस कर रही हूं। मैं सेक्शुअली वो सब महसूस नहीं कर पाती, जो मेरा बॉयफ्रेंड करता है। ऐसे में मेरी भी इच्छा होती है कि काश मैं भी आम लोगों की तरह महसूस कर पाती। लेकिन फिर मैं सोचती हूं कि सेक्शुअलिटी में कुछ भी आम तो है ही नहीं, हम सब अलग हैं। हाल ही में मैं ऑनलाइन एक फ़ीमेल ऑटोसेक्शुअल से मिली हूं जिसे मैंने अपने ऑटोसेक्शुअल होने के बारे में भी बताया। उससे बात कर के मुझे बहुत अच्छा लगा। हम कुछ ऐसे लोगों के समुदाय में हैं जो इस बात की खोज कर रहे हैं कि हम सेक्शुअलिटी के ढांचे में कहां खड़े होते हैं।
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ऐसे बहुत-से लोग हैं जो इस बात को नहीं समझेंगे। जज करना या बातें बनाना बहुत आसान है लेकिन आप कभी नहीं समझ पाएंगे कि एक ऑटोसेक्शुअल कैसा महसूस करता है। मैं कई लोगों के साथ रिश्ते में रही हूं लेकिन जैसा मैं अपने साथ महसूस करती हूं वैसा किसी के साथ नहीं कर पाती हूं।
(इस कहानी को बयां करने वाली लड़की की पहचान गुप्त रखी गई है। ये स्टोरी बीबीसी थ्री की राधिका संघानी से बातचीत पर आधारित है।)
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