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ADHD Disorder: बहुत ज्यादा उछलता-कूदता है आपका बच्चा तो इस रोग से हो सकता है पीड़ित, जानें लक्षण और उपचार

Sat, 31 Aug 2024 04:06 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

एडीएचडी यानी अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर। यह बच्चों को प्रभावित करने वाले सबसे आम मानसिक विकारों में से एक है।
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Parenting Tips - फोटो : istock
दीपिका शर्मा

कुछ बच्चे घंटों तक रंग भरने या आधे दिन तक चुपचाप ब्लॉकों के साथ खेलने में संतुष्ट रहते हैं। वहीं कुछ बच्चे दो मिनट भी शांत नहीं बैठ पाते। ये एडीएचडी के लक्षण भी हो सकते हैं। 12 साल के रोहन की स्कूल से अक्सर शिकायत आती कि वह एक जगह टिक कर नहीं बैठता और टीचर का सवाल सुने बिना ही जवाब देने लगता है। रोहन के माता-पिता, दोनों ही नौकरी करते हैं, इसलिए वे उसे सही से समझ नहीं पा रहे। इस परेशानी से छुटकारा पाने के लिए रोहन की मां रीना ने वर्क फ्रॉम होम करना शुरू किया और अपने बेटे का व्यवहार अलग पाया। स्कूल से मिल रही शिकायतों को अब वह समझ पा रही थी। इसलिए जब वह रोहन को डॉक्टर के पास लेकर गई तो पता चला कि वह एडीएचडी से पीड़ित है।
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Parenting Tips - फोटो : Istock
क्या है एडीएचडी

एडीएचडी यानी अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर। यह बच्चों को प्रभावित करने वाले सबसे आम मानसिक विकारों में से एक है। यह एक न्यूरो डेवलपमेंटल विकार है। इस बीमारी से पीड़ित बच्चे में ध्यान केंद्रित करने की कमी, अतिसक्रियता और आवेगशीलता के लक्षण पाए जाते हैं। अधिकतर यह कुछ बदलावों से बचपन में ही ठीक हो जाता है, लेकिन कभी-कभी बड़े होने तक भी सक्रिय रहती है। ऐसे में बच्चे के विकास के लिए इसका समय पर निदान और उचित प्रबंधन बहुत जरूरी है। एडीएचडी के मुख्य रूप से तीन प्रकार होते हैं- संयुक्त प्रस्तुति, अतिसक्रिय/आवेगपूर्ण प्रस्तुति और असावधान प्रस्तुति।
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Parenting Tips - फोटो : istock
कब होती है यह समस्या

एडीएचडी की समस्या अक्सर प्री-स्कूल या केजी तक के बच्चों में देखी जाती है। कुछ बच्चों में किशोरावस्था में यह स्थिति और गंभीर हो सकती है, तो कई बार यह समस्या वयस्कों को भी परेशान करती है। एडीएचडी से पीड़ित बच्चे में असावधानी और अतिसक्रियता, दोनों के लक्षण होते हैं। मसलन, बिना अनुमति के दूसरों का सामान ले लेना या उनके काम में बाधा डालना। साथ ही दूसरों की बात न सुनना, बस अपनी बातों को ऊपर रखना, बिना वजह चिल्लाना इनकी आदत बन जाता है।

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Parenting Tips - फोटो : Pixabay
माता-पिता के लिए संकेत

बच्चा किसी भी कार्य पर लंबे समय तक ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता। हमेशा अत्यधिक ऊर्जा से भरा रहता है और शांत नहीं बैठ पाता। बच्चा अक्सर अपने काम को शुरू तो करता है, लेकिन उसे पूरा नहीं कर पाता। उदाहरण के लिए, वह खेलते समय एक खिलौने को छोड़कर दूसरे की ओर भागता है। बच्चा दूसरों के साथ खेलते समय समस्याएं दिखा सकता है, जैसे कि दोस्तों से झगड़ा करना, उनकी बात न सुनना या खेल के नियमों का पालन न करना।
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Parenting Tips - फोटो : iStock
प्रबंधन और चिकित्सा उपचार

एडीएचडी का निदान एक योग्य चिकित्सक या मनोचिकित्सक ही कर सकता है। इसके लिए डॉक्टर परिवार का इतिहास, गर्भावस्था और प्रसव के दौरान की जानकारी, बच्चे के शुरुआती विकास, शिक्षा, सामाजिक संबंध और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की जानकारी लेते हैं, ताकि पता लगाया जा सके कि समस्या आनुवांशिक तो नहीं है। फिर इसके जरिए उसे आत्मनियंत्रण और सकारात्मकता का गुण सिखाया जाता है, ताकि बच्चा सामाजिक और शैक्षिक समस्याओं का सामना कर पाने में समर्थ बने।
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Parenting Tips - फोटो : Pexel
सुरक्षित और समर्थित माहौल

मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान, दिल्ली में मनोचिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ. ओम प्रकाश कहते हैं, एडीएचडी का सही समय पर निदान और प्रबंधन बच्चों के शैक्षिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास में मदद कर करता है। बच्चे में एडीएचडी के लक्षण दिखाई देते हैं तो समय रहते विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें। सही उपचार और पारिवारिक सहयोग बच्चे के लिए बहुत जरूरी है।

एडीएचडी के प्रबंधन में माता-पिता और शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। माता-पिता को बच्चे के सकारात्मक पहलुओं को प्रोत्साहित करना चाहिए और उसके व्यवहार को समझने की कोशिश करनी चाहिए। स्थिर और समर्थनकारी वातावरण बनाना बच्चे के आत्मविश्वास को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शिक्षकों को बच्चों के लिए संरचित और शांत वातावरण बनाना चाहिए, जहां बच्चा सुरक्षित महसूस करे।
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