कई बार बचपन के लाड़ प्यार में हम बच्चों को पैसों के महत्व और मनी मैनेजमेंट के बारे में बताना ही भूल जाते हैं, सही मायने में दस साल की उम्र के बाद से ही बच्चों को मनी मैनेजमेंट के बारे में बताना शुरू कर देना चाहिए। एम्स की बाल रोग मनोचिकित्सक डॉ. शेफाली गुलाटी कहती हैं कि आठ से दस साल की उम्र के बीच बच्चे सबसे अधिक दूसरों से अपनी तुलना शुरू कर देते हैं, जैसे दोस्तों के पास महंगी चीजें हैं तो उसके पास क्यों नहीं, आदि। यह एक चुनौती भरा समय होता है, जब माता-पिता को बच्चे के मानसिक विकास पर सबसे अधिक ध्यान देना होता है। ऐसे में वह अपनी बाकी चीजों के साथ ही अपने खर्चों को भी खुद ही नियंत्रित करेगा तो उसे बेहतर मनी मैनेजमेंट सिखाया जा सकता है। दूसरा वह तुरंत ही दोस्तों से अपनी तुलना करना भी बंद कर देगा। ऐसा सभी माता-पिता को करना चाहिए। सही मायने में देखा जाए, तो अधिक धन के प्रवाह में बचपन बीतने से कहीं अधिक जरूरी है कि बच्चे का बचपन स्वाभाविक रूप से बीते, जो बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास, दोनों के लिए बेहतर है।