माँ पार्वती ने अल्प साधनों की किया शिव जी का पूजन
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2. साधन महत्वपूर्ण नहीं
देवी पार्वती राजकुमारी थीं। उन्हें किसी बात की कोई कमी नहीं थी। वे चाहतीं तो कोई भी सुविधा उनको तुरंत मिल जाती, लेकिन उन्होंने जब कठिन तपस्या और व्रत का मार्ग चुना तो वे स्वयं कठिनाई भरे पथ पर चलीं, अल्प साधनों के साथ। उन्होंने शिवलिंग बनाने से लेकर भोले भंडारी को चढ़ाये जाने वाले फल-फूल तक बजाय आडंबर करने के, अपने पास प्राप्त अल्प संसाधनों का प्रयोग किया। वे स्वय गुफा में रहीं और प्राकृतिक साधनों से ही पोषण प्राप्त करती रहीं। यह हमें सीख देता है कि जब लक्ष्य सामने हो तो संसाधन या सुविधा नहीं, केवल आपका समर्पण मायने रखता है। भले ही फिर आप संसाधनहीन ही क्यों न हों, अगर आप लक्ष्य को पाने के लिए पूरी तरह समर्पित हैं, तो लक्ष्य अवश्य मिलेगा।