'आपका सवाल ही गलत है'
इतना कहते-कहते वो अचानक जोर से चिल्लाई, "ऊपर! ऊपर!! ऊपर!!!" मैंने घबराकर इधर-उधर देखा। वो हंस पड़ी और बोली, "अरे कुछ नहीं मैडम, शायद कोई कस्टमर था। उसे ऊपर बुला रही थी। यही है हमारी जिंदगी। आपने हमसे सवाल ही गलत पूछा है…"अब मैं कोने में खड़ी एक दूसरी लड़की से बात करना चाहती थी जो चुपचाप हमारी बातें सुन रही थी।मैं उसकी ओर बढ़ी ही थी कि वो पीछे हट गई और बोली, "बाथरूम खाली हो गया है।मैं नहाने जा रही हूं। शिवरात्रि का व्रत है मेरा।" इतना कहकर वो चली गई।बातें करते-करते वक़्त काफी हो गया था।मैं भारी मन से अंधेरी सीढ़ियां उतरने लगी, इतनी औरतों में से कोई ऐसी नहीं मिली जिसकी जिंदगी में प्यार हो।इन्हीं ख्यालों में डूबी मैं भीड़भाड़ वाली सड़क पर वापस आ गई।पास की किसी दुकान में गाना बज रहा था- बन जा तू मेरी रानी, तैनूं महल दवा दूंगा...