दोस्ती की नींव है भरोसा
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सुनी सुनाई पर विश्वास न करें
छोटी बात हो या कोई बड़ी जानकारी, खासकर यदि वो आपसे या आपके दोस्त से संबंधित है तो जब तक खुद दोस्त आपको सच न बता दे, किसी और पर विश्वास न करें। यदि कोई आपको चेतावनी भी देता है तो एकदम से विश्वास करके दोस्ती तोड़ने की बजाय पहले बात की पड़ताल करें। मान लीजिये कि कोई व्यक्ति आपका सच्चा दोस्त होने का दावा करता है लेकिन वह आपकी भावनाओं से खेल रहा है। आपका कोई शुभचिंतक इस बारे में आपको चेतावनी देता है। तो उस शुभचिंतक को भी धन्यवाद दें और पहले अपने तरीके से इस बात की असलियत का पता लगाएं। यदि आपको इसके सच होने के प्रमाण मिलते हैं तो दोस्त से सीधे पूछें। यदि दोस्त सही तर्क देकर अपनी स्थिति स्पष्ट करता है तो इसका मतलब उसने आपके साथ कोई धोखा नहीं किया, बल्कि कोई जानबूझकर आपकी दोस्ती तोड़ने की कोशिश कर रहा था। इसलिए किसी भी बात सुनकर उसपर आँख मूंदकर विश्वास करने की बजाय पहले बात को समझें और जानें। इसमें आपकी सबसे बेहतर मदद आपके पैरेंट्स या परिवार कर सकता है।