दोस्तों से चर्चा
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स्वाभाविक है गप्पें मारना
अमेरिका की फ्लोरिडा स्टेट यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च कहती है कि महिलाओं को गपशप करना काफी भाता है। उनके लिए दूसरों पर टीका-टिप्पणी करना एक सामान्य बात है। अक्सर महिलाएं दूसरी महिलाओं के ड्रेसिंग, स्टाइल, उनके लुक, लोक व्यवहार के तरीके, दूसरों से संबंध, कार्यस्थल की बातें, प्रमोशन के मसले और स्वास्थ्य समस्याओं के इर्द-गिर्द गॉसिप करती हैं। तो कई महिलाओं को आस-पास की घटनाओं पर पैनी नजर रखने की आदत होती है। उन्हें लगता है कि इससे उनके जीवन की नीरसता कम होती है।
कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान की प्रोफेसर मेगन रॉबिन्स के अनुसार, गप्पें मारना स्वाभाविक है। इस से संबंध मजबूत होते हैं। हां, ये गॉसिप तटस्थ एवं सकारात्मक हों तो ज्यादा अच्छा है, क्योंकि नकारात्मक होने से उसका मन पर दुष्प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा लगातार ऐसी चर्चाओं का हिस्सा बनने से तनाव आपको घेर सकता है।
गॉसिप में महिलाएं आगे
महिलाओं पर अक्सर ये तोहमत लगती है कि उन्हें दूसरों की बातों को नमक-मिर्च लगाकर या चटपटा बनाकर पेश करने में मजा आता है। लेकिन जब हम ‘सोशल, साइकोलॉजिकल एवं पर्सनैलिटी साइंस’ जर्नल में प्रकाशित रिसर्च पर नजर डालते हैं, तो कुछ और ही सच सामने आता है।
कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए इस शोध में जब 467 व्यस्क पुरुषों एवं महिलाओं की दो से पांच दिनों की बातचीत रिकॉर्ड की गई। जिनमें 75 फीसद गॉसिप तटस्थ पाई गईं और बाकी सकारात्मक वह नकारात्मक का मिश्रण थीं। इससे स्पष्ट है कि गॉसिप हमेशा नकारात्मक, दुर्भावनापूर्ण या मिथ्या नहीं होती है। हां, हर मिथ्या गॉसिप अवश्य होती है। इसके अलावा किसी को भरोसे में लिए बिना जब हम उसकी निजी बातें भी सार्वजनिक करते हैं तो वह गॉसिप घातक मानी जाती है।