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तलाक लेने से पहले मनोचिकित्सकों की इन 7 सलाहों को मान लेंगे, तो नहीं टूटेगा रिश्ता

Mon, 02 Nov 2020 03:37 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
दो लोग जब विवाह के बंधन में बंधते हैं तो वे एक बहुत खूबसूरत जीवन यात्रा की ओर चल पड़ते हैं। लेकिन आजकल की जीवनचर्या में जहां पति-पत्नी दोनों घर की बागडोर संभाल रहे होते हैं, वहां इसे निभाना इतना भी आसान नहीं हो पाता है। सिर्फ प्रेम से दाम्पत्य जीवन संपन्न नहीं बनता बल्कि इसमें सम्मान, आपसी समझ, धैर्य आदि भावों का होना भी आवश्यक है। जब दाम्पत्य जीवन में तालमेल नहीं बैठता है, तो तलाक की नौबत आ जाती है। तलाक मानसिक रुप से दोनों ही पक्षों पर लंबे समय के लिए हावी होता है। इसलिए जरूरी है कि तलाक के नतीजे पर पहुंचने से पहले थैरेपी, आपसी समझ और माफ करके रिश्ते को बचाया जाए। अगली स्लाइड्स में जानें तलाक लेने से पहले मनोचिकित्सकों की किन सलाहों को मानकर रिश्ते को दिया जा सकता है एक और मौका।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay
वे जैसे हैं, वैसा उन्हें स्वीकारें 
  • वैवाहिक रिश्ते में यह बिल्कुल संभव है कि दो लोगों की पसंद-नापसंद एक जैसी न हो। उसे बदलने का प्रयास करने की बजाय अपने हमसफर को स्वीकारने और उनकी इच्छाओं का सम्मान करने की कोशिश करें। इस बात को समझें कि विचार, दृष्टिकोण, रुचि में भिन्नता हो सकती है, लेकिन प्रेम का भाव दोनों में समान ही है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
थेरेपी का लें सहारा 
  • तलाक लेने से पहले थेरेपी और परामर्श लेना एक बहुत अच्छा विकल्प है, इससे रिश्ते के बचने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। जहां पति-पत्नी एक-दूसरे की बात को सुनते नहीं या समझना नहीं चाहते, वहां थेरेपिस्ट उन दोनों की ही भावनाओं को समझते हैं और सही तरीके से उन्हें समझाते हैं, जो कि दोनों के लिए बहुत जरूरी है।   

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
माफ करना सीखें 
  • गलतियां मनुष्यों से ही होती हैं। यदि सामने वाला व्यक्ति उन्हें स्वीकर करके, उन्हें ठीक करने का प्रयत्न कर रहा है तो उन्हें मौका दें, उन्हें माफ करें। माफ करके टूटते रिश्तों को बचाया जा सकता है। बातों की गांठ बांधने और माफ न करने से वैवाहिक रिश्ता तो खराब होता ही है, साथ ही स्वयं को भी तकलीफ पहुंचती है।  
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
जीवनसाथी को दें प्राथमिकता 
  • विवाह के बाद कई बार प्राथमिकता जीवनसाथी तक न रहकर परिवार और बच्चों की ओर चली जाती है। इसलिए जब महसूस हो कि संबंध टूटने की कगार पर है, तो कोशिश करें कि हमराही को उस तरह से प्राथमिकता दें, जिस तरह रिश्ते के शुरुआती समय में दी जाती थी, इससे सामने वाला रिश्ते की अहमियत समझ पाएगा। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
किसी दूसरे से तुलना न करें 
  • बातों में या बहस के दौरान अपने हमराही की तुलना किसी अन्य व्यक्ति के पति या पत्नी से न करें। ऐसा करने से आपके पति या पत्नी के मन में यह भाव आ सकता है कि वे इस रिश्ते के लिए उपयुक्त नहीं हैं। यह बात हमेशा याद रखने योग्य है कि दूर से जो जैसा दिखता है, वैसा होता नहीं है इसलिए स्वयं के रिश्ते पर ही ध्यान दें। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अपशब्द का प्रयोग न करें 
  • अपने साथी के लिए किसी भी ऐसे शब्द का प्रयोग न करें, जिससे उसकी भावनाएं आहत हो जाए। कितना ही गुस्सा क्यों न हो लेकिन कभी भी 'मैं तुम्हें छोड़ दूंगा या दूंगी, खत्म करो इस रिश्ते को, मुझसे और नहीं होगा अब' जैसे शब्द न कहें। इससे रिश्ते में कोई संभावनाएं नहीं बचतीं, साथ ही ये भुलाए नहीं भूले जा सकते।  
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
गुस्से पर रखें नियंत्रण  
  • गुस्से में इंसान वह सब कह जाता है, जो कि उसे नहीं कहना होता है। गुस्सा गहरी चोट भी पहुंचाता है। इसलिए बातचीत के दौरान यदि गुस्सा आने लगे तो कोशिश की जाए कि अपने शब्दों पर नियंत्रण रखें, एक लंबी गहरी सांस लें, 10 मिनट के लिए घूमकर आने के बाद उस विषय पर बात करें। तब तक गुस्सा शांत हो जाएगा।   
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