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Parenting Tips: जब बेटी को जाना हो स्कूल ट्रिप पर तो ये 5 सलाह आएंगी काम

Sat, 20 Aug 2022 01:56 PM IST
स्वाति शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बिटिया की सुरक्षा के लिए दें सलाह - फोटो : Istock
बच्चों की सुरक्षा और भलाई का मुद्दा हमेशा पैरेंट्स के लिए प्राथमिकता होता है। इसके लिए बकायदा हर चीज को पूरी तरह परख कर ही कदम आगे बढ़ाया जाता है। लेकिन असुरक्षा और हानि होने के डर से बच्चों को हमेशा के लिए घर में बंद करके तो रखा नहीं जा सकता। बच्चों के सम्पूर्ण विकास के लिए उन्हें समय समय पर बाहरी दुनिया से रूबरू होने का अवसर देना भी जरूरी है। ऐसे में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं स्कूल। यहाँ बच्चे न केवल ज्ञान पाते हैं बल्कि अपने हमउम्रों से साथ दुनिया को सीखने और समझने की ओर भी आगे बढ़ते हैं। यही वह अनुभव है जो बच्चों को बड़ा होने पर आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार करता है। 

बच्चों की स्कूल ट्रिप इस अनुभव यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होता है। ऐसी ट्रिप के जरिये बच्चे खुद को संभालने, आपातकाल में चीजों का प्रबंधन करने, सामाजिक स्थितियों से सामंजस्य बैठाने और आत्मविश्वास को बढ़ाने जैसी चीजें सीखते हैं। यह लड़कियों के लिए और भी महत्वपूर्ण इसलिए हो जाता है क्योंकि आज भी लड़कों की तुलना में लड़कियों का दुनियावी एक्सपोजर कम होता है। ऐसे में स्कूल ट्रिप उनके लिए सीखने का माध्यम बन सकता है। जानिए कुछ ऐसी सलाहें जो इस तरह की ट्रिप से पहले खासतौर पर बेटियों को देनी चाहिए। ताकि वे ट्रिप से बहुत कुछ सीखें, इसका आनंद लें और सुरक्षित भी रहें। 
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ट्रिप पर जाने से पहले समझाएं हर बात - फोटो : Pixabay
पूरी जानकारी लें, फिर भेजें

यह सही है कि पहले की तुलना में अब माहौल बहुत बदल गया है। अपने बच्चों की सुरक्षा का मुद्दा अब पहले से ज्यादा परेशान करता है लेकिन केवल इस एक वजह को बच्ची के खुलकर जीने के बीच बाधा न बनने दें। अधिकांश स्कूल लम्बी (2-3 दिन या इससे ज्यादा) की ट्रिप पर छोटे बच्चों को नहीं ले जाते। इसलिए लम्बी ट्रिप पर जाने वाली बच्चियां आमतौर पर 10-15 वर्ष के बीच होती हैं। इस उम्र में उन्हें आप अच्छी तरह हर बात समझा सकते हैं। उन्हें समझाने से पहले ट्रिप से संबंधित पूरी जानकारी स्कूल से लें। कितने टीचर हैं, कितने बच्चे जा रहे हैं, किस जगह जा रहे हैं, सफर कैसे होगा, रुकेंगे कहाँ, आदि।

पूरी जानकारी मिलने के बाद एक रफ खाका बनाकर जरूरी सभी फोन नंबरों के साथ बच्ची के साथ रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर वह उनका उपयोग कर सके। यदि आपको लगता है कि ट्रिप जिस तरह से प्लान की गई है वह बच्ची की सुरक्षा के लिहाज से ठीक नहीं है तो बेटी को इस बात को शांति से समझाएं कि आप जाने को क्यों मना कर रहे हैं। इसके एवज में अगर आपको अलग से कोई छोटी फैमेली ट्रिप प्लान करना पड़े तो वह भी करें। 
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हाइजीन का पालन करने की दें सलाह - फोटो : iStock
ये बातें समझाएं

चाहे बात दो दिनों की हो या हफ्ते भर की, कुछ महत्वपूर्ण सलाहें जो आपकी बेटी को सुरक्षित व स्वस्थ रहने में मदद करेंगी वे इस प्रकार हैं-

1. हाइजीन का पूरा ख्याल रखने की सलाह। यूं यह बात हर व्यक्ति पर लागू होती है लेकिन घर से बाहर जा रही बेटी के लिए यह और भी महत्वपूर्ण सलाह हो जाती है। खासकर अब कोरोना जैसी महामारी के आने के बाद। उसे समझाएं कि ट्रिप के दौरान वह जहाँ तक हो सके साफ़ बाथरूम का ही उपयोग करे। साबुन, सेनेटाइजर, हाथ पोंछने के लिए टिशू और वाइप्स हमेशा अपने पास रखे और इनका ही उपयोग करे। पीने के पानी को लेकर भी सावधानी बरते। यदि फील्ड में जाए तो अपनी बॉटल साथ रखे।

कई बार बच्चे सामान्य हाइजीन का ध्यान न रख पाने से इंफेक्शन के शिकार हो जाते हैं और ऐसे में ट्रिप का पूरा मजा खराब हो सकता है। यदि बच्ची के पीरियड्स का समय उस दौरान हो तो उसे और खास ख्याल रखने की सलाह दें। सेनेटेरी नैपकिंस और साफ़ अंडरगार्मेंट्स का प्रयोग सही तरीके से करने की आदत बच्ची में डालें। इससे वह कई तरह के संक्रमणों से बच सकेगी। 
 

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बाथरूम के दरवाजों आदि की जांच करें - फोटो : istock
सुरक्षित रहें, सावधानी रखें 

2. सुरक्षा व होशियारी की सलाह। वैसे लड़कियों में छठी इंद्री यूँ भी थोड़ी अधिक सक्रिय होती है लेकिन कई बार मासूमियत और अल्हड़पन में वे अपनी सुरक्षा को लेकर सावधानी नहीं रख पातीं। बेटी को बताएं कि यदि उनके ठहरने का इंतजाम खुले में (टेंट या कैम्पिंग आदि) के रूप में किया गया है तो भी और यदि होटल या किसी हॉस्टल में किया गया है तो भी, अपने रूम के दरवाजों के लॉक और बाथरूम की खिड़कियों आदि को पहले ही पूरी तरह चैक करें। अगर बाथरूम की कोई खिड़की या वेंटिलेशन या दरवाजा ठीक से बंद नहीं है तो तुरंत अपनी टीचर को बताकर उसे ठीक करवाएं।

कभी अकेले या अंधेरे में खुले में स्थित बाथरूम का उपयोग करने न जाएँ। हमेशा 2-3 के ग्रुप में रहें या जरूरी हो तो टीचर को साथ ले जाएँ। चाहे कमरे में चेंज करना हो या स्वीमिंग पूल में नहाना हो, कोशिश करें कि इस समय भी सतर्कता बरतें। यदि अनजान शहर में शॉपिंग करने जा रही हैं तो वहां भी ड्रेस के लिए ट्रायल रूम का प्रयोग सावधानी से करें। 
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अकेले कहीं जाने को बाध्य करने वाले से बचे - फोटो : Social Media
संकेत को पहचाने और सतर्क रहे 

3. बिटिया को बताएं कि कभी भी किसी पर आँख मूंदकर भरोसा न करे। जीवन में हर मोड़ पर यह सलाह बेटी के काम आएगी लेकिन जब वह आपसे दूर किसी शहर में है तो यह सलाह वहां भी उसकी रक्षा का काम करेगी। उसे समझाएं कि उसे सहज ही किसी पर भी भरोसा नहीं करना है। खासकर तब जब कोई उसे अकेले में कहीं चलने को कहे, केवल उसी को कोई वस्तु खाने-पीने के लिए दे या किसी एक्टिविटी में केवल उसे ही शामिल करने पर जोर दे। फिर चाहे वह उसकी कोई मित्र हो या टीचर ही क्यों न हो। स्कूल ट्रिप का मतलब होता है, साथ मिलकर घूमने, फिरने, खाने-पीने का आनंद लेना। ऐसे में किसी का अकेले चलने के लिए फ़ोर्स करना खतरे का संकेत भी हो सकता है। इसलिए ऐसी किसी भी स्थिति से बचें। 
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अपरिचितों से जानकारी साझा न करने की सलाह - फोटो : istock
अनजान लोगों से जानकारी न बांटे 

4. अपनी जानकारी शेयर करने से बचें। ट्रिप के दौरान कई बार नए दोस्त बनते हैं, नए लोगों से परिचय भी होता है। ये सारे लोग खराब या गलत हों जरूरी नहीं लेकिन ऐसे किसी भी व्यक्ति से अपनी हर निजी जानकारी शेयर करना बच्ची को मुश्किल में भी डाल सकता है। बेटी को बताएं कि किसी भी अन्य अपरिचित व्यक्ति के मोबाइल या कैमरे से तस्वीरें लेना, उनको अपने ठहरने, आने-जाने के कार्यकम की जानकारी देना, कहाँ रहते हैं, पैरेंट्स क्या करते हैं, आदि जानकारी देने से बचें। ऐसे प्रश्न अगर कोई व्यक्ति बार बार पूछ रहा है तो अपने टीचर को जरूर बताएं और उस व्यक्ति से तुरंत दूरी बना लें। 
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ग्रुप के साथ मजबूत रहेगी सुरक्षा - फोटो : Pixabay
ग्रुप का साथ न छोड़े 

5. अनजान जगह पर और देर रात बाहर निकलने से बचाव की सलाह। अक्सर किशोरावस्था में ऊर्जा और उत्साह दोनों ही चरम पर होते हैं और यही बनते हैं गलतियों का कारण भी। टीचर को बताये बिना, नियमों को तोड़कर किसी भी अनजान जगह अकेले घूमने निकल पड़ना सबसे खतरनाक स्थिति है। न आप उस जगह के बारे में पूरी तरह जानते हैं, न ही वहां के लोगों को। 

हादसों के होने की सबसे अधिक आशंका ऐसी ही जगहों पर होती है, जिनके बारे में हम आये दिन खबरों में पढ़ते हैं। इसलिए बिटिया को बताएं कि कभी भी अपने ग्रुप से अलग या अकेले में किसी जगह जाने का दुस्साहस न करे। यदि कभी गलती से किसी ऐसी जगह छूट जाए या अकेले रह भी जाए तो घबराने की बजाय तुरंत मदद के लिए कॉल करे या पुकारे। इसके लिए ट्रिप की शुरुआत में बच्ची के साथ रखे नंबर काम आएंगे। 
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सारा जरूरी सामान हो साथ में - फोटो : shutterstock
ये सलाह भी दें
  • अपना फोन हमेशा पूरी तरह चार्ज करके रखे। अगर फोन पर गाना सुनने या वीडियो देखने में बैटरी खर्च होती है तो बच्ची के साथ हमेशा पूरी तरह चार्ज पावर बैंक होना चाहिए। 
  • अपने सभी जरूरी डॉक्युमेंट्स की एक कलर्ड और एक ब्लैक एन्ड व्हाइट फोटोकॉपी अपने साथ रखे। ओरिजनल डॉक्युमेंट्स ऐसी जगह रखे जहाँ से उनके गुम होने की आशंका कम से कम हो। 
  • लगेज हमेशा इस तरह का हो कि उठाने और लेकर चलने में आसानी हो। इसके लिए बैगपैक हमेशा अच्छा विकल्प होते हैं। 
  • मच्छरों और कीड़े मकोड़ों से बचाव के साधन हमेशा पर्याप्त मात्रा में साथ हों और साथ ही सुई धागा, मोमबत्ती-माचिस  और सेफ़्टीपिंस भी। 
  • सभी जरूरी दवाइयां और इन्हेलर जैसी चीजें हमेशा छोटे बैग में साथ रहे और इसकी जानकारी टीचर को भी रहे। 
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