आज संत रविदास जयंती है। 14वीं सदी के भक्ति युग में माघी पूर्णिमा के दिन रविवार को काशी के मंडुआडीह गांव में रघु व करमाबाई के पुत्र रूप में जन्मी इस विभूति ने भले ही चर्मकारी के पैतृक व्यवसाय को चुना हो, मगर अपनी रचनाओं से जिस समाज की नींव रखी, वह वाकई अद्भुत है। पेशे से चर्मकार रविदास जी अपने आजीविका को धन कमाने का साधन बनाने की बजाय संत सेवा का माध्यम बना लिया।
संत रविदास जी ईश्वर की भक्ति पर पूर्ण विश्वास करते थे। उनके वाणी की मधुरता और ज्ञान से सभी लोग प्रभावित होते हैं। उनके द्वारा कहे शब्द, दोहे, पद और अनमोल वचन (विचार) आज भी हम सभी को सदैव आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। आइयें जानते हैं संत रविदास जी के कुछ अनमोल विचार...