फैशन हर दिन रंग बदलता है। पियर्सिंग भी इसी फैशन का एक हिस्सा है। आज से कई साल पहले यह कबीलों या गाँव कस्बों में परम्परा या संस्कृति का हिस्सा रहा है। आज भी बची खुची जगहों पर इसे देखा जा सकता है लेकिन अब इसका एक आधुनिक स्वरूप भी है। वह है फैशनेबल तरीकों के साथ लोगों का पियर्सिंग को अपनाना। नाभि, कान, नाक तो आम हैं ही, भौंहें, जुबान, ओठ और यहां तक कि प्राइवेट पार्ट्स तक में पियर्सिंग का ट्रेंड अब सामान्य बात है। लेकिन फैशन से इतर इसका एक खतरनाक स्वरूप भी है।
पियर्सिंग कई कारणों से शरीर और स्वास्थ्य दोनों के लिए हानिकारक हो सकती है। इसे करवाते समय हाइजीन का ध्यान न रखा जाए, अप्रशिक्षित व्यक्ति से इसे करवाया जाए, तब तो यह मुश्किल खड़ी करती ही है लेकिन कई बार यह तब भी मुश्किल खड़ी करती है जब इसे गलत जगह पर करवाया जाए और इसकी वजह से उस अंग या स्थान के ठीक से काम करने में बाधा आने लगे। ऐसी ही जगह है मुंह पर मौजूद ओठ और भीतर मौजूद जुबान।