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Navratri 2020: शारदीय नवरात्रि के दौरान होता है रामलीला का मंचन, जानें कैसे हुई इस परंपरा की शुरुआत

Sat, 24 Oct 2020 06:00 AM IST
योगेश जोशी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Navratri 2020 - फोटो : social media
इस समय देशभर में शारदीय नवरात्रि की धूम मची हुई है। देशभर में शारदीय नवरात्रि के समय रामलीला का मंचन किया जाता है। इस बार कोरोना वायरस की वजह से बहुत जगहों पर रामलीला का लाइव प्रसारण किया जा रहा है। भगवान श्री राम की पावन नगरी अयोध्या की रामलीला का भी लाइव प्रसारण दूरदर्शन के माध्यम से किया जा रहा है। आज हम इस लेख के माध्यम से जानेंगे की रामलीला मंचन का क्या इतिहास और क्यों इसका मंचन किया जाता है। शारदीय नवरात्रि के समय रामलीला मंचन की परंपरा सदियों से चली आ रही है।
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Navratri 2020 - फोटो : अमर उजाला
विदेशों में भी होता है रामलीला मंचन 
  • रामलीला अपने देश भारत में ही नहीं, बल्कि बाली, जावा, श्रीलंका जैसे देशों में प्राचीनकाल से ही किसी न किसी रूप में प्रचलित रही है रामलीला का मंचन नेपाल, थाईलैंड, लाओस, फिजी, दक्षिण अफ्रीका, कनाडा, सूरीनाम, मॉरीशस में भी होता है। थाईलैंड में रामायण को रामाकिआन कहते हैं।
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Navratri 2020 - फोटो : social media
दशमी के दिन रावण-वध
  • नवरात्रि में दुर्गा मां के पूजन के साथ ही नौ दिन चलने वाली रामलीला के मंचन का शुभारंभ भी हो जाता है। रामलीला मंचन में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के जीवन की प्रमुख घटनाओं को दर्शाया जाता है। दशमी के दिन रावण-वध का मंचन किया जाता है और रावण परिवार के पुतले जलाएं जाते हैं।

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Navratri 2020 - फोटो : social media
सदियों से चली आ रही रामलीला के मंचन की परंपरा
  • रामलीला मंचन लोक-नाटक का एक रूप है। इस परंपरा की शुरुआत उत्तर भारत से हुई। इसके साक्ष्य लगभग ग्यारहवीं शताब्दी में मिलते हैं। शुरुआती दौर में रामलीला मंचन महर्षि वाल्मीकि के महाकाव्य रामायण की पौराणिक कथा पर आधारित था, लेकिन अब इसकी पटकथा गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित महाकाव्य ‘रामचरितमानस’ पर आधारित है।
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Navratri 2020 - फोटो : अमर उजाला
कथाओं के अनुसार 16वीं सदी में तुलसीदास के शिष्यों नें रामलीला का मंचन करना प्रारंभ किया था। कहा जाता है कि उस समय जब गोस्वामी तुलसीदास जी नें रामचरितमानस पूरी करी थी तब काशी के नरेश नें रामनगर में रामलीला मंचन कराने का संकल्प लिया था। तभी से देशभर में रामलीला का मंचन प्रारंभ हुआ।
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