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देश में हर जगह अलग तरह से मनाई जाती है नवरात्रि, देखें कहां कैसे होती है मां की आराधना

Sun, 29 Sep 2019 10:48 AM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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- फोटो : Amar Ujala
नवरात्रि यानी की देवी दुर्गा की आराधना और भक्ति के नौ दिन का पर्व 29 सितंबर से शुरू होने वाला है। इन भक्ति से सराबोर नौ दिनों के आगमन की तैयारियां भी शुरू हो चुकी है। एक ओर जहां देश के पूर्व में पश्चिम बंगाल में देवी पंडालों का सजना शुरू हो गया है तो वहीं पश्चिम के गुजरात में नौ दिनों की रौनक की झलकियां दिखाई देने लगी है। एक ओर गरबा नृत्य है तो वहीं व्रतधारी भजन पूजन की तैयारियां कर रहे हैं। इधर उत्तर भारत में माता रानी के जगराते और पूजन की तैयारियां हैं। इस तरह नौ दिनों लगभग भारत के हर कोने में लोग नवरात्रि का उत्सव मनाने के लिए लगे हुए दिखाई दे रहे हैं। आइए जाने कि भारत के चारों कोनों में किस तरह से इन नौ दिनों का उत्सव मनाया जाता है।


 
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- फोटो : pixa
भारत के उत्तर में
उत्तर भारत में नवरात्रि का पर्व बड़े ही उल्लास के साथ मनाया जाता है। पूरे उत्तर भारत में नवरात्रि के दिनों में मां दुर्गा की आराधना के साथ ही भगवान राम का रावण के साथ युद्ध का भी वर्णन राम लीला के मंचन के रूप में होता है।  विजयदशमी को लंका पर विजय और भगवान राम के अयोध्या आगमन के रूप में मनाया जाता है। लंका पर विजय प्राप्त करने के कारण ही नवरात्र के दसवें दिन रावण और उसके भाई कुम्भकर्ण के पुतले का दहन किया जाता है और बुराई पर अच्छाई का जश्न मनाया जाता है। इस समय लोग घरों और मंदिरों में कलश स्थापना करने के साथ मां दुर्गा की पूजा करते हैं और साथ ही नौ दिन का व्रत भी करते हैं।

 
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पश्चिम भारत में नवरात्रि की धूम
भारत के पश्चिम में यानी की गुजरात में नवरात्रि को गरबा या डांडिया उत्सव के रूप में मनाते हैं। गरबा एक तरह का डांस है जिसमें एक मिट्टी के दिये के चारो तरफ महिलाएं नाचती हैं। यहां गरबा का विशेष अर्थ है गरबा यानी गर्भ। गर्भ से तात्पर्य नये जीवन से है। दिये को यहां नये जीवन के रूप में देखते हैं। गरबा के साथ ही डांडिया रास किया जाता है। जिसमें पुरुष एवं महिलाएं हाथों में बांस के सजे हुए डंडे लेकर गोले में नाचते हैं। नवरात्रि के समय पूरे गुजरात में डांडिया और गरबा की धूम रहती है और हर शहर में अलग तरीके से इस डांस को किया जाता है।

 

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पूरब में नवरात्रि
पश्चिम बंगाल में नवरात्रि के आखिरी के पांच दिन बहुत ही धूम-धाम से मनाए जाते हैं जिसे दुर्गा पूजा कहते हैं। उत्तर-पूर्व भारत में मां दुर्गा की प्रतिमा में उनके हाथ में बहुत से अस्त्र लिए शेर की सवारी करते देखा जा सकता है। इसमें शेर, धर्म का प्रतिनिधित्व करता है और अस्त्र, मन से नकारात्मकता को दूर करने का इशारा करते हैं। पश्चिम बंगाल में अष्टमी वाले दिन बहुत बड़ी सी प्रतिमा स्थापित की जाती है और पांच दिन पूजा करने के बाद पांचवे दिन उसे नदी में प्रवाहित कर दिया जाता है। 
 
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- फोटो : instagram
दक्षिण में नवरात्रि
दक्षिण में भी इस समय त्योहार की धूम रहती है। यहां पर नवरात्रि के समय कर्नाटक में दसारा मनाया जाता है। इसमें भी बुराई के ऊपर अच्छाई की विजय बताई गई है। दसवें दिन विजय दशमी के रूप में मनाया जाता है जिसे केरल में विद्यारंभ भी कहा जाता है। इस दिन केरल में बच्चों की पढ़ाई शुरू करवाई जाती है। इसके साथ दक्षिण के कुछ राज्यों में महानवमी मनाई जाती है जिसमें शस्त्रों की पूजा की जाती है। तमिलनाडु में इस दिन मेहमानों को घर पर बुलाया जाता है और बहुत सी गुड़ियों की प्रदर्शनी लगाई जाती है, जिसे कोलु कहते हैं।
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