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Sardar Vallabhbhai Patel Jayanti: सरदार पटेल की जयंती आज, जानें लौह पुरुष बनने तक का रोचक सफर

Mon, 31 Oct 2022 07:58 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सरदार पटेल की जयंती - फोटो : Social Media
Sardar Vallabhbhai Patel Jayanti: लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती 31 अक्तूबर को मनाई जा रही है। इस दिन को भारत में राष्ट्रीय एकता दिवस के तौर पर मनाया जाता है। सरदार पटेल आजाद भारत के पहले उप प्रधानमंत्री थे। देश की आजादी में सरदार पटेल ने अभूतपूर्व योगदान दिया। जिसके बाद अंग्रेजो की गुलामी से आजाद हुए भारत में सरदार पटेल को देश के पहले प्रधानमंत्री के तौर पर देखा जाने लगा था। कांग्रेस में लगभग सभी चाहते थे कि सरदार पटेल प्रधानमंत्री बने लेकिन महात्मा गांधी के कहने मात्र से उन्होंने प्रधानमंत्री बनने की रेस से अपना नाम वापस ले लिया। इसी लौह पुरुष ने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को भारत और चीन के रिश्ते पर पहले से आगाह किया था। सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती के मौके पर जानिए उनके जीवन से जुड़े रोचक तत्थ। सरदार वल्लभ भाई पटेल को क्यों कहा जाता है लौह पुरुष और उनकी जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के तौर पर मनाने की वजह जानें।
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सरदार पटेल को भारत का लौह पुरुष कहा जाता है - फोटो : Statue of Unity
सरदार पटेल की पारिवारिक पृष्ठभूमि

सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म गुजरात के खेड़ा जिले में 31 अक्तूबर को हुआ था। वह एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते थे। हालांकि एक साधारण किसान परिवार का लड़का अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर भविष्य में खास बन गया।
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सरदार पटेल - फोटो : Social Media
देश की आजादी में भूमिका

वल्लभ भाई पटेल ने शराब, छुआछूत और नारियों पर अत्याचार के खिलाफ लड़ाई लड़ी। हिन्दू-मुस्लिम एकता को बनाए रखने की पुरजोर कोशिश की। आजादी की लड़ाई के दौरान वह कई बार जेल भी गए लेकिन पटेल की दृढ़ता के सामने अंग्रेजी हुकूमत को झुकना पड़ा।

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सरदार पटेल। - फोटो : Amar Ujala
आजाद भारत के प्रधानमंत्री बन सकते थे पटेल

जब देश आजाद हुआ तो भारत में नई सरकार बनने की तैयारी शुरू हुई। कांग्रेस के नए अध्यक्ष के नाम पर सभी की निगाहें टिकी थी। उम्मीद की जा रही थी कि कांग्रेस का नया अध्यक्ष ही भारत का पहला प्रधानमंत्री होगा। सरदार पटेल की लोकप्रियता के चलते कांग्रेस कमेटी ने नेहरू का नाम प्रस्तावित नहीं किया और पटेल पूर्ण बहुमत से पार्टी के अध्यक्ष बन गए लेकिन इस बात से पार्टी में विच्छेद न हो जाए, इस डर से गांधी जी ने सरदार पटेल को पीछे हटने को कहा। सरदार वल्लभ भाई पटेल का पता था कि वह देश के प्रधानमंत्री बन सकते हैं लेकिन उन्होंने गांधी जी की बात का मान रखा और अपना नामांकन वापस ले लिया।
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सरदार पटेल और नेहरू - फोटो : Social Media
रियासतों का भारतीय संघ में विलय

हालांकि पटेल को देश का पहला उप प्रधानमंत्री बनाया गया। यह पद गृहमंत्री के समान था। उन्हें कई और जिम्मेदारियां सौंपी गईं। सबसे बड़ी चुनौती देसी रियासतों का भारत में विलय था। छोटे बड़े राजाओं, नवाबों को भारत सरकार के अधीन करते हुए रजवाड़े खत्म करना कोई आसान काम नहीं था लेकिन बिना किसी जंग के सरदार पटेल ने 562 रियासतों का भारत संघ में विलय कराया।

चीन से किया आगाह

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद बहुत पुराना है। चीन के षड्यंत्रों को पहले से सरदार पटेल ने भांप लिया था। 1950 में उन्होंने नेहरू को खत लिख कर चीन से संभावित खतरे के बारे में चेतावनी दी थी। हालांकि नेहरू जी ने उस वक्त सरदार पटेल की चेतावनी पर ध्यान न दिया और परिणामस्वरूप 1962 की चीन की लड़ाई हुई।
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