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Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति के हैं विभिन्न नाम, जानें पर्व से जुड़ी परंपरा और मनाने के तरीके

Mon, 13 Jan 2025 06:09 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

हर क्षेत्र में इसे अपने पारंपरिक अंदाज में मनाया जाता है, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है। आइए जानते हैं देशभर में मकर संक्रांति का पर्व अलग-अलग तरीके से कैसे मनाते हैं। मकर संक्रांति को किन नामों से जाना जाता है और इसे मनाने की परंपरा क्या है।
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मकर संक्रांति 2025 - फोटो : Amar Ujala
Makar Sankranti 2025 :  संक्रांति का पर्व देश के प्रमुख हिंदू त्योहारों में से एक है जो कि अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक साल के पहले महीने में मनाया जाता है। इसे साल का पहला हिंदू प्रमुख त्योहार भी मान सकते हैं। मकर संक्रांति का पर्व वैसे तो लगभग पूरे देश में ही मनाया जाता है लेकिन इसे राज्यों के मुताबिक, लोग अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाते हैं। यह सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने और दिन के बढ़ने की शुरुआत का प्रतीक है। मकर संक्रांति का पर्व मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश और बिहार में मनाया जाता है। इस दिन को उत्तर प्रदेश में खिचड़ी के पर्व के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि इस दिन नई फसल से खिचड़ी और गुड़, तिल और मूंगफली के लड्डू बनते हैं।

मकर संक्रांति न केवल फसल कटाई का त्योहार है बल्कि यह सूर्य की उत्तरायण गति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक भी है। हर क्षेत्र में इसे अपने पारंपरिक अंदाज में मनाया जाता है, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है। आइए जानते हैं देशभर में मकर संक्रांति का पर्व अलग-अलग तरीके से कैसे मनाते हैं। मकर संक्रांति को किन नामों से जाना जाता है और इसे मनाने की परंपरा क्या है।
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मकर संक्रांति 2025 - फोटो : Amar Ujala
पर्व से जुड़ी परंपराएं और मनाने के तरीके

राज्यों के मुताबिक मकर संक्रांति के कई नाम है। जैसे उत्तर प्रदेश और बिहार में इसे मकर संक्रांति ही कहते हैं। वही पंजाब-हरियाणा में लोहड़ी का पर्व मनाते हैं। असम में भोगाली बिहू तो गुजरात और राजस्थान में उत्तरायण का पर्व मनाते हैं। तमिलनाडु में पोंगल, महाराष्ट्र में तिलगुल पर्व, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में संक्रांति, केरल में मकरविलक्कू और जम्मू कश्मीर में उत्तरायणी कहते हैं।
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उत्तरायण का पर्व - फोटो : istock
गुजरात और राजस्थान में उत्तरायण का पर्व

यहां उत्तरायण के मौके पर पतंगबाजी का आयोजन होता है। लोग छतों पर चढ़कर पतंग उड़ाते हैं और इसे एक बड़े उत्सव की तरह मनाते हैं। उत्तरायण को प्रकाश का समय माना जाता है। इस दिन सूर्य देव की किरणें ज्यादा देर तक पृथ्वी पर चमकती हैं। इसे देवताओं का दिन माना जाता है। इस दिन यज्ञ, दान और मांगलिक कार्यों का विधान है।

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मकर संक्रांति 2025 - फोटो : अमर उजाला
महाराष्ट्र और उत्तर भारत का पर्व

महाराष्ट्र में तिलगुल पर्व के मौके पर तिल और गुड़ से बनी मिठाइयां खाई और बांटी जाती हैं। इस दिन तिल और गुड़ के लड्डू भी बनते हैं। महाराष्ट्र में एक कहावत भी है, "तिलगुन घ्या, गोड गोड बोला" यानी तिलगुल खाओ और मीठा बोलो।
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लोहड़ी का पर्व - फोटो : Amar Ujala
पंजाब-हरियाणा की लोहड़ी

लोहड़ी के दिन आग जलाकर उसमें तिल, गुड़, मूंगफली और रेवड़ी अर्पित की जाती है। मान्यता है कि किसान नई फसल को अग्नि में अर्पित करके भगवान का आभार व्यक्त करते हैं। फिर उसी अग्नि की ताप लेते हैं और भांगड़ा-गिद्दा कर नाचते-गाते हैं। लोहड़ी का पर्व रबी की फसलों की कटाई का प्रतीक है। साथ ही सर्दियों के दिनों के अंत का प्रतीक भी हैं। फसल पकने और अच्छी खेती के लिए पर्व को समर्पित किया जाता है। इस दिन भगवान सूर्य और अग्नि देव की पूजा की जाती है।
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पोंगल 2025 - फोटो : Amar Ujala
तमिलनाडु का पोंगल पर्व

नए धान की फसल से चावल पकाया जाता है, जिसे पोंगल कहते हैं। ये चार दिन का पर्व होता है, जिसमें सूर्य भगवान की पूजा की जाती है। पोंगल का पर्व भी फसल कटाई के बाद संपन्नता और खुशी का प्रतीक है। इस दिन किसान प्रकृति, ईश्वर, सूर्य व इंद्र  देव और मवेशियों का आभार प्रकट करते हैं। समृद्धि के लिए वर्षा, धूप और कृषि से जुड़ी चीजों की पूजा की जाती है।
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