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Jallianwala Bagh: जलियांवाला बाग नरसंहार की 104वीं बरसी, जानें कौन था इस हत्याकांड का दोषी

Thu, 13 Apr 2023 11:12 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जलियांवाला बाग हत्याकांड में बेकसूर भारतीयों के खून की नदियां बहीं थीं। कुएं में भारतीयों की लाशें और बच्चों से लेकर बूढ़ों तक पर गोलियों की बरसात कर दी गई थी। जलियांवाला बाग नरसंहार की 104वीं बरसी के मौके पर जानिए उस दिन का इतिहास।
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जलियांवाला बाग नरसंहार की बरसी - फोटो : Self
गुलाम भारत की दास्तां इतिहास के पन्नों में लहू से लिखी हुई है। यह लहू स्वतंत्रता सेनानियों, क्रांतिकारियों और बेकसूर भारतीयों का था, जिन्होंने अंग्रेजी की गुलामी की जंजीरों से आजाद होने का सपना देखा। कुछ ने आजादी की जंग लड़ी तो कुछ इस जंग में अंग्रेजी हुकूमत के पैरों तले कुचल दिए गए। अंग्रेजों के अत्याचार और भारतीयों के नरसंहार की दर्दनाक घटनाएं क्रोध से भर देने वाली हैं तो वहीं गर्व से सीना चौड़ा भी कर देती हैं। गुलाम भारत का एक दर्दनाक नरसंहार आज ही के दिन हुआ था। 13 अप्रैल को शहादत के दिन के तौर पर याद किया जाता है। इतिहास में आज ही के दिन जलियांवाला बाग हत्याकांड हुआ था। जलियांवाला बाग हत्याकांड में बेकसूर भारतीयों के खून की नदियां बहीं थीं। कुएं में भारतीयों की लाशें और बच्चों से लेकर बूढ़ों तक पर गोलियों की बरसात कर दी गई थी। जलियांवाला बाग नरसंहार की 104वीं बरसी के मौके पर जानिए उस दिन का इतिहास।
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जलियांवाला बाग नरसंहार की बरसी - फोटो : amar ujala
जलियांवाला बाग नरसंहार का इतिहास

पंजाब के अमृतसर में जलियांवाला बाग नाम की एक जगह है। 13 अप्रैल 1919 के दिन इसी जगह पर अंग्रेजों ने कई भारतीयों पर गोलियां बरसाई थीं। उस कांड में कई परिवार खत्म हो गए। बच्चे, महिला, बूढ़े तक को अंग्रेजो ने नहीं छोड़ा। उन्हें बंद करके गोलियों से छलनी कर दिया।
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जलियांवाला बाग नरसंहार की बरसी - फोटो : amar ujala
जलियांवाला बाग नरसंहार की वजह?

दरअसल, उस दिन जलियांवाला बाग में अंग्रेजों की दमनकारी नीति, रोलेट एक्ट और सत्यपाल व सैफुद्दीन की गिरफ्तारी के खिलाफ एक सभा का आयोजन किया गया था। हालांकि इस दौरान शहर में कर्फ्यू लगा हुआ था। लेकिन कर्फ्यू के बीच हजारों लोग सभा में शामिल होने पहुंचे थे। कुछ लोग ऐसे भी थे जो बैसाखी के मौके पर अपने परिवार के साथ वहीं लगे मेले को देखने गए थे।

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जलियांवाला बाग नरसंहार की बरसी - फोटो : facebook
जलियांवाला बाग का दोषी कौन?

जब ब्रिटिश हुकूमत ने जलियांवाला बाग पर इतने लोगों की भीड़ देखी, तो वह बौखला गए। उनको लगा कि कहीं भारतीय 1857 की क्रांति को दोबारा दोहराने की ताक में तो नहीं। ऐसी नौबत आने से पहले ही वह भारतीयों की आवाज कुचलना चाहते थे और उस दिन अंग्रेजों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी। सभा में शामिल नेता जब भाषण दे रहे थे, तब ब्रिगेडियर जनरल रेजीनॉल्ड डायर वहां पहुंच गए। कहा जाता है कि इस दौरान वहां 5000 लोग पहुंचे थे। वहीं जनरल डायर ने अपने 90 ब्रिटिश सैनिकों के साथ बाग को घेर लिया। उन्होंने वहां मौजूद लोगों को चेतावनी दिए बिना ही गोलियां चलानी शुरू कर दी।
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jallianwala bagh
जलियांवाला बाग नरसंहार के 10 मिनट

ब्रिटिश सैनिकों ने महज 10 मिनट में कुल 1650 राउंड गोलियां चलाईं। इस दौरान जलियांवाला बाग में मौजूद लोग उस मैदान से बाहर नहीं निकल सकते थे, क्योंकि बाग के चारों तरफ मकान बने थे। बाहर निकलने के लिए बस एक संकरा रास्ता था। भागने का कोई रास्ता न होने के कारण लोग वहां फंस कर रह गए।
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इसी कुंए में फेंके गए थे सैकड़ों शव - फोटो : File Photo
लाशों से पट गए कुएं

अंग्रेजों की गोलियों से बचने के लिए लोग वहां स्थित एकमात्र कुए में कुद गए। कुछ देर में कुआं भी लाशों से भर गया। जलियांवाला बाग में शहीद होने वालो का सही आंकड़ा आज भी पता न चल सका लेकिन डिप्टी कमिश्नर कार्यालय में 484 शहीदों की सूची है, तो जलियांवाला बाग में 388 शहीदों की लिस्ट है। ब्रिटिश सरकार के दस्तावेजों में 379 लोगों की मौत और 200 लोगों के घायल होने का दावा किया गया। हालांकि अनाधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, ब्रिटिश सरकार और जनरल डायर के इस नरसंहार में 1000 से ज्यादा लोग शहीद हुए थे और लगभग 2000 से अधिक भारतीय घायल हुए थे।
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