आज के समय में पर्यावरण प्रदूषण दुनियाभर के लिए बड़ी मुसीबत का कारण बना हुआ है। प्रदूषण के बढ़ते स्तर के कारण नदियां और झीलें प्रभावित हो रही हैं। वैसे तो पृथ्वी के केवल एक फीसदी हिस्से पर ही नदियां और झीलें हैं, हालांकि यह मछली, स्तनधारी, पक्षी, कीड़े और क्रस्टेशियंस सहित तमाम प्रकार की लगभग 10 फीसदी प्रजातियों का निवास भी है। पर्यावरण वैज्ञानिकों का कहना है कि मानव इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है कि इन प्रजातियों में तेजी से गिरावट आ रही है। कई सारे जीव, जो नदियों और समुद्रों को साफ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे वह तेजी से विलुप्त होते जा रहे हैं, इसका सीधा असर मानव समाज पर पड़ सकता है।
हालिया अध्ययनों के आधार पर वैज्ञानिकों का कहना है कि वनों की तुलना में आर्द्रभूमि तीन गुना तेजी से विनाश की तरफ बढ़ती जा रही है। जिस तरह से दुनियाभार में प्लास्टिक, सीवेज, खनन कीचड़, औद्योगिक और कृषि रसायनों का उपयोग बढ़ा है, ऐसे में यह पानी की गुणवत्ता को बुरी तरह से प्रभावित कर रही है। भविष्य में इसके कई प्रकार के नुकसान देखने को मिल सकते हैं। आइए आगे की स्लाइडों में इस बारे में विस्तार से जानते हैं।