नवरात्रि के व्रत शुरू होने वाले हैं। नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा आराधना और कलश स्थापना के साथ ही व्रत भी किया जाता है। इस व्रत में केवल फलाहार खाने की अनुमति है। जिसमे कुट्टू, सिंघाड़ा, समा के चावल ही अनाज के रूप में खाए जाते हैं। इसके अलावा बहुत से लोग राजगीर का आटा भी खाते हैं। फलाहार के भोजन में कई बार लोग सिंघाड़े की आटे की रोटी या पूड़ियां बनाना चाहते हैं। लेकिन ये मनचाही नर्म और मुलायम बन कर तैयार नहीं होती। अगर आपके साथ भी इस तरह की समस्या होती है और सिंघाड़े की पूड़ियां ठीक से नहीं बन पातीं। तो इन सिंपल स्टेप को फॉलो करें। इससे फटाफट और मिनटों में नर्म सिंघाड़े की पूड़ी बनकर तैयार हो जाएंगी। तो चलिए जानें सिंघाड़े की पूड़ी बनाने की विधि।
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सिंघाड़े के आटे की पूड़ी बनाना आसान नही है। क्योंकि सिंघाड़े का आटा गेंहू के आटे के जैसे चिपकता नही है। जिसकी वजह से जब सिंघाड़े के आटे को गूंथा जाता है। तो वह एक सार नहीं होता और पूड़ियां बनकर तैयार नहीं हो पाती हैं। लेकिन इन टिप्स की मदद से पूड़ियों को फटाफट तैयार किया जा सकता है। वैसे बता दें कि सिंघाड़े की पूड़ियों को व्रत के अलावा भी बनाकर खाया जा सकता है।
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सिंघाड़े के आटे की पूड़ियां बनाने की सामग्री
सिंघाड़े का आटा एक कप, एक छोटे आकार का आलू, एक चम्मच जीरा पाउडर, तलने के लिए देसी घी या मूंगफली का तेल, हरी मिर्च बारीक कटी हुई, सेंधा नमक, पानी।
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सिंघाड़े के आटे की पूड़ियां बनाने की विधि
सबसे पहले आलू उबालकर रख लें। इन्हें छील लें। अब किसी प्लेट में सिंघाड़े का आटा लें। इसमे सेंधा नमक, जीरा पाउडर, और हरी मिर्च डालकर मिक्स करें। अब उबले आलू को आटे में मैश करें और इसे गूंथे। जब तक जरूरत ना हो पानी ना डालें। इसे केवल उबले आलू के सहारे ही गूंथा जाता है। जरूरत हो तो कुछ उबले आलू के और टुकड़े ले लें। अच्छी तरह से गूंथ लें कि आटा ना ज्यादा कड़ा हो और ना ज्यादा चिपचिपा। बस गूंथे हुए आटे को छोटी लोई में बांटे।
गैस पर कड़ाही चढ़ाकर तेल या देसी घी डाल दें। किसी प्लेन एरिया पर छोटी लोईयों को रखकर सूखा सिंघाड़े का आटा छिड़के और पूड़ियां बेलें। बेलते ही इन्हें गर्म तेल या घी में डाल दें। बस फूली-फूली नर्म पूड़ियां बनकर तैयार होंगी।
टिप्स- सिंघाडे के आटे को तभी गूंथे जब पूड़ियां तलनी हो। गूंथकर रखा आटा चिपचिपा हो जाता है और पूड़ियां नर्म नहीं बनती हैं।