नवरात्रि में भक्त उपवास रखकर मां दुर्गा की आराधना करते हैं। नवरात्रि के दिनों में प्याज, लहसुन और अनाज नहीं खाया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन दिनों अनाज के बजाय फलाहार का सेवन क्यों किया जाता है। आइए जानते हैं इसके पीछे की वजह।
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- फोटो : getty images
वैज्ञानिक तर्क
हिन्दू धर्म के मुताबिक मदिरा और मांसाहार का सेवन नवरात्रि के दौरान नहीं करना चाहिए। इसके पीछे वैज्ञानिक मत कहता है कि जब नवरात्रि आती है तब मौसम का मिजाज बदलता रहता है। इसलिए अगर आप यह दोनों चीज़े अपने आहार में शामिल करेंगे तो आपकी सेहत खराब हो सकती है।
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FRUITS
आध्यात्मिक मत
ऐसा माना जाता है कि नवरात्र में नौ दिन व्रत रखने से तन और मन को शक्ति मिलती है। इसके अतिरिक्त नौ दिन व्रत रखने से आध्यात्मिक शुद्धिकरण भी होता है। ऐसा कहा जाता है कि नवरात्र में जो लोग फलाहार करते हैं वो आध्यात्मिक रूप से खुद को ईश्वर के करीब महसूस करते हैं।
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fruits
आयुर्वेदिक
नवरात्र का समय बेहद ही पावन होता है। आयुर्वेदिक के अनुसार इन दिनों अंडा, मांस, अनाज, मदिरा ,प्याज और लहुसन का सेवन करने से शरीर में नकारत्मक शक्तियों का वास होने लगता है, इसलिए नवरात्र के समय इन चीज़ो का सेवन नहीं करना चाहिए।
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garlic
लहुसन और प्याज
लहसुन और प्याज तामसिक भोजन का अंग है। इसके सेवन से मन और शरीर दोनों सुस्त हो जाते हैं। यही नहीं बल्कि इससे बने भोजन को पचने में काफी समय लगता है। खासकर अंडा, मांस, मछली और सभी तरह के ऐसे भोजन या तरल पदार्थ जिससे नशा होता हो सब शामिल होते हैं। बासी खाना भी तामसिक भोजन में आता है, इसलिए इसे खाना नहीं चाहिए।
व्रत में क्या खाना चाहिए
व्रत के दौरान हमारे नियमित खानपान की आदतों में बदलाव आता है। व्रत में आहार पौष्टिक होता है और आसानी से पच भी जाता है। लेकिन वहीं साबूत अनाज जैसे बाजरा, गेंहू इन्हें पचाना पेट के लिए थोड़ा मुश्किल होता है। इसके कारण पाचन तंत्र धीमा पड़ जाता है। यही वजह है कि व्रत के दौरान लोग ज्यादा से ज्यादा दूध से बने पर्दाथ , फल, जूस और हल्की सब्जियों का सेवन करना पसंद करते हैं। यह हल्के होने के साथ जल्दी पच भी जाते हैं।