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किसी दवाखाने से कम नहीं आपकी रसोई, यहां डॉक्टर से लेकर कम्पाउंडर आप खुद

Thu, 14 Feb 2019 06:08 PM IST
मोना नारंग नेहा सजवाण
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masala box
आज जिस प्रकार के वातवरण में हम रह रहे हैं, वहां बुखार, जुखाम, पेट दर्द और अन्य बीमारियां आम है। इनके लिए आप आए दिन हॉस्पिटल और मेडिकल स्टोर के चक्कर काटती रहती होंगी। लेकिन बाहर के इतने चक्कर लगाने का क्या फायदा जब आपके पास आपका अपना दवाखाना मौजूद है, जहां कि डॉक्टर भी आप हैं, नर्स भी आप हैं और कम्पाउंडर भी आप ही हैं। ये दवाखाना है आपका किचन। यहां हर वह चीज मौजूद है, जो आपकी बीमारी का इलाज कर सकती है। दैनिक जीवन में उपयोग में आने वाले मसालों के कई औषधीय गुण भी हैं। यह मसाले आपके खाने का स्वाद ही नहीं बढ़ाते बल्कि आपको बीमारियों से दूर भी रखते हैं। 
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cinnamon paste
दालचीनी
सर्दी, खांसी या गले की तकलीफों में दालचीनी बेहद असरदार है। इसे पीसकर एक चम्मच शहद के साथ एक चुटकी मात्रा में खाने से जुकाम में आराम मिलता है। गुनगुने पानी में दालचीनी के पाउडर को शहद के साथ मिलाकर पीने से खांसी में भी फायदा होता है। दालचीनी के पाउडर को पिसी हुई काली मिर्च के साथ लेने से कफ में राहत मिलती है। अगर सर्दी के कारण सिर में दर्द है, तो दालचीनी का लेप लगाने से आराम मिलता है। इसके अलावा दालचीनी के तेल की कुछ बूंदें, तिल के तेल में मिलाकर सिर पर मालिश करने से भी सिरदर्द में आराम मिलता है।
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long pepper
पिपली
पिपली का इस्तेमाल वैसे तो खाने में होता है, लेकिन इसका पाउडर बनाकर आंखों में लगाने से आंखें तेज होती है और नाईट ब्लाइंडनेस भी ठीक रहता है। एक पिपली और दो हरीतकी को पानी के साथ पीसकर उसकी बत्तियां बनाकर आंखों पर रखने से आई-फ्लू और आंखों से पानी बहने की समस्या हल होती है। पिपली पाउडर, सेंधा नमक, हल्दी और सरसों के तेल का मिश्रण दांतों पर लगाने से दांत का दर्द दूर होता है। पेट में ऐंठन को कम करने के लिए पिपली की जड़ का पाउडर, दूध और बांसा का मिश्रण बनाकर पानी के साथ लें। पिपली वात और कफ संबंधी बीमारियों को दूर करने में मदद करता है। तीन ग्राम पिपली को एक ग्राम पानी में उबालकर एक चम्मच शहद के साथ सुबह-शाम खाने से कफ में फायदा होता है।

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akakara
अकरकरा
कम प्रचलित अकरकरा का इस्तेमाल सामूहिक और राजसी दावतों की दाल, कढ़ी, मसाला बाटियों, गट्टा और पुलाव में किया जाता है। अकरकरा कड़वा, तीखा, प्रकृति में गर्म तथा कफ और वातनाशक है। यह खून को साफ करने, सूजन को कम करने, मुंह की बदबू को नष्ट करने, दंत रोग, दिल की कमजोरी, बच्चों के दांत निकलने के समय के रोग, तुतलाहट, हकलाहट, रक्तसंचार को बढ़ाने में भी गुणकारी है। इसका प्रयोग दंतमंजनों और पेस्ट में होता है। यह पाचक और रुचिवर्धक होता है। अर्जुन की छाल और अकरकरा का चूर्ण, दोनों को बराबर मिलाकर पीसकर दिन में सुबह और शाम आधा-आधा चम्मच खाने से घबराहट, हृदय की धड़कन, पीड़ा, कंपन और कमजोरी में लाभ होता है।
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िा - फोटो : getty images
सोंठ
सोंठ और अदरक एक ही पदार्थ के दो रूप हंै। गीले रूप में यह अदरक कहलाती है और सूखने पर यही सोंठ हो जाती है। यह रुचिकारक, गठिया नाशक, त्रिदोष नाशक, पाचक, स्वादिष्ट, गर्म, अतिसार, हृदयरोग और उदर रोग नाशक है। सोंठ का उपयोग हर घर में किसी न किसी रूप में जरूर होता है। दाल-साग के मसाले में इसका उपयोग होता है। कच्ची अदरक चटनी, मुरब्बा, अचार के रूप में, सब्जी-दाल में सुगंध एवं स्वाद के साथ पाचन शक्ति बढ़ाने का काम करती है। अदरक की चाय से सर्दी, जुकाम, खांसी और सिरदर्द ठीक होता है। सोंठ, जीरा और सेंधा नमक का चूर्ण ताजा दही में, मट्ठे में मिलाकर भोजन के बाद पीने से पेट साफ होता है।
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cumin seed
जीरा
जीरा का इस्तेमाल रसोई में रोज दाल या सब्जी में ज्यादातर छौंक लगाने के लिए किया जाता है, लेकिन जीरा आयरन का एक अच्छा स्रोत भी है। अगर आप नियमित रूप से इसका सेवन करती हैं, तो खून की कमी दूर होती है। इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-ऑक्सीडेंट के गुण ट्यूमर को बढ़ने से रोकते हैं। इसके अलावा जीरे का सेवन बवासीर में लाभदायक है। इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर होता है, जो आपकी पाचन क्रिया को ठीक करता है। जीरा त्वचा के लिए भी काफी फायदेमंद है। इसमें मौजूद एंजाइम्स, विटामिन और मिनरल त्वचा को स्वस्थ रखते हैं।
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Clove
लौंग
लौंग आपके पाचन तंत्र को ठीक रखता है। साथ ही दांत दर्द से बचने के लिए लौंग के तेल का इस्तेमाल करना काफी फायदेमंद होता है। इसमें मौजूद एंटीसेप्टिक गुण माउथवॉशनर का काम भी करते हैं। लौंग में प्रोटीन, आयरन, कार्बोहाइड्रेट्स, कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम, सोडियम और हाइड्रोक्लोरिक एसिड जैसी कई चीजें भरपूर मात्रा में पाई जाती हैं। इसमें विटामिन-ए और सी, मैग्नीशियम और फाइबर भी पाया जाता है। यह सभी शरीर के लिए बहुत फायदेमंद हैं। इसके अलावा यह मुहांसों को दूर करने में भी मदद करता है।

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ajwain - फोटो : file photo
अजवाइन
अजवाइन शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में मददगार है। इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट दिमाग के लिए एक औषधि की तरह काम करता है। अजवायन आपकी भूख व पाचन शक्ति को बढ़ाकर पेट संबंधी अनेक रोग जैसे- गैस, अपच, कब्ज आदि को दूर करने में मदद करती है। अजवायन डायबिटीज रोगी को फंगल इंफेक्शन से भी बचाती है। पेट दर्द होने पर आधा चम्मच अजवायन को पानी के साथ फांकने से राहत मिलती है। नियमित रूप से इसका सेवन करने से पेट साफ रहता है।

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चक्र फूल
चक्र फूल
स्टार के आकार का यह मसाला गर्म मसाले का मुख्य घटक है, जिसे चक्र फूल या स्टार ऐनिस के नाम से जाना जाता है। तेज खुशबू के कारण, इसका इस्तेमाल बिरयानी, सीफूड और अन्य व्यंजनों में किया जाता है। मसाला चाय में डलने वाले मुख्य मसालों में से एक चक्र फूल है। भोजन के बाद इसकी चाय पीने से सूजन, गैस, अपच और कब्ज जैसे पाचन संबंधी रोगों को दूर करने में मदद मिलती है। इसके अलावा चक्र फूल में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट और विटामिन-ए एवं सी, डायबिटीज से लड़ने में मदद करता है।

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Fennel Seeds
सौंफ
ओरल कैंसर से बचने का अचूक उपाय है- सौंफ। रोजाना खाने के बाद सौंफ चबाने से ओरल कैंसर का खतरा नहीं होता और खाना भी अच्छे तरीके से पचता है। यह खाने के स्वाद और खुशबू को भी बढ़ाता है। सौंफ को पानी में उबाल लें, फिर ठंडा होने पर इसे पी लें। इस पानी से खून साफ रहता है और चेहरे पर चमक आती है।

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hing
हींग
हींग दर्द निवारक और पित्तवर्द्धक होती है। छाती और पेट दर्द में हींग का सेवन लाभकारी होता है। छोटे बच्चों के पेट में दर्द होने पर हींग को पानी में घोलकर पकाने और उसे बच्चों की नाभि के चारों ओर उसका लेप करने से दर्द में राहत मिलती है।

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Nutmeg
जायफल
औषधीय गुणों के कारण जायफल को आयुर्वेद में सालभर उपयोगी माना जाता है। यह वातनाशक और कृमिनाशक होता है। गर्म मसाले में जायफल का प्रयोग बहुत ही थोड़ी मात्रा में किया जाता है। बच्चों को दस्त, जुकाम व खांसी होने पर जायफल को गर्म पानी में घिसकर चटाया जाता है। इसके फूल जावित्री कहलाते हैं। सांस  के रोग में पान में दो-तीन पंखुड़ी जावित्री डालकर लेने से फायदा होता है। भूख नहीं लगती हो, तो चुटकी भर जायफल लें, आराम मिलेगा। इससे पाचन शक्ति बढ़ेगी और भूख लगेगी।

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हल्दी शिव पूजा में - फोटो : haldi
हल्दी
हल्दी के एंटी सेप्टिक और एंटी इंफ्लेमेट्री गुण प्राकृतिक पेन किलर का काम करते हैं। हल्दी शरीर की बाहरी चोट के साथ, शरीर की आंतरिक चोट पर भी असर करता है। अंदरूनी चोट के लिए दूध को गर्म करके उसमें हल्दी डालकर कुछ दिन लगातार पीएं। अगर बाहरी चोट है, तो हल्दी को प्याज के रस में मिलाकर चोट पर लगाएं, इससे सूजन और दर्द से राहत मिलेगी।

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धनिया पाउडर
धनिया
हर व्यंजन का स्वाद बढ़ाने के लिए धनिया का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन साबुत धनिया में ब्लड शुगर को कंट्रोल करने की क्षमता भी होती है। धनिया में ऐसे तत्व होते हैं, जो शरीर से कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं और उसे कंट्रोल में रखते हैं। इसके अलावा धनिया में भरपूर मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट, मिनरल, विटामिन-ए, सी और आयरन पाया जाता है, जो एनिमिया की समस्या को दूर करने और कैंसर से बचाव में मदद करता है। साथ ही यह दर्द में राहत देता है।
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Black Pepper
गठिया के दर्द में काली मिर्च को तिल के तेल में पकाकर ठंडा करके लगाने से राहत मिलती है। इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट शरीर से सभी तरह के टॉक्सिंस को बाहर निकालता है, जिससे शरीर में किसी तरह की बीमारी जन्म नहीं लेती। सर्दी में पांच काली मिर्च एक गिलास दूध में उबालकर पीने से फायदा होता है। आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए आटा भूनकर काली मिर्च का चूर्ण, घी, चीनी मिलाकर पंजीरी बना एक-एक चम्मच सवेरे और शाम को खाली पेट दूध के साथ लें। नमक आपके जायके को बढ़ाने के साथ शरीर में पानी के स्तर को नियंत्रित करता है। यह पाचन शक्ति बढ़ाता है। हमारी हड्डियों और आंसूओं में नमक का समावेश होता है। लेकिन ध्यान रखें, जरूरत से अधिक नमक हानिकारक हो सकता है। - वैद्य हरि कृष्ण पांडे
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