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आयुर्वेद के अनुसार 4 तरह का होता है नमक, शरीर पर पड़ते हैं अलग प्रभाव

Wed, 12 Sep 2018 09:34 AM IST
डॉ. विनोद वर्मा, आयुर्वेद विशेषज्ञ
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आयुर्वेदिक पाक-कला में उपयोग होने वाले मसालों के इस्तेमाल से पहले कुछ आधारभूत बातें और बुनियादी चीजों का ध्यान रखना जरूरी है। मसालों के बिना भोजन की कल्पना अधूरी सी लगती है। हालांकि कुछ मसालों के भ्रामक नामों के कारण गड़बड़ी भी होती है। इसलिए इन मसालों का विस्तृत विवरण जानना आवश्यक है। 
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नमक-
संसार के अधिकांश लोग जानते हैं कि नमक समुद्र से प्राप्त होता है। आयुर्वेदिक दृष्टि से नमक चार प्रकार का होता है। समुद्र से प्राप्त नमक के अलावा दो अन्य प्रकार का नमक भोजन बनाने में प्रयोग होता है।
 
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सेंधा नमक
पहाड़ी नमक
सैंधव या पहाड़ी नमक सफेद पारदर्शी होता है। इसमें अन्य खनिजों के कारण अन्य रंग भी होते हैं। इसके अलावा काला नमक भी होता है, जिसमें लौह तत्व और गंधक मिला रहता है।
 

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सेंधा नमक
सामान्य रूप से नमक कफ और पित्तवर्धक तथा वातरोधक होता है। पहाड़ी नमक पाचन बढ़ाने वाला तथा भूख कम होने में उपचार के काम आता है, किंतु यह कफ नहीं बढ़ाता। 

 
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अच्छा तो यह हो कि कभी समुद्री नमक और कभी पहाड़ी नमक को बदल-बदलकर प्रयोग किया जाए। संसार के कुछ भागों में आयोडीन की कमी होती है, वहां समुद्री नमक खाना चाहिए, क्योंकि उसमें आयोडीन काफी मात्रा में होती है। 
 
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