मिजोरम जायका
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करी की जगह बाई
भारत का यह सुदूर सीमावर्ती क्षेत्र नई दिल्ली के मुकाबले बैंकॉक के ज्यादा नजदीक है। करी यहां विदेशी चीज है। मिजोरम में करी की जगह बाई खायी जाती है जो एक तरह का शोरबा स्टू है। यह मिजो खाने की जान है। जिस तरह मसालेदार करी की कई किस्में हैं, उसी तरह बाई में भी विविधता है जो स्थानीय फसलों पर निर्भर करती है। चीनियों की बदौलत बांस की मुलायम कोपलें यहां का लोकप्रिय खाना है। मिजो लोग दूसरे पौधों की टहनियां और मुलायम तने भी खाते हैं। इनमें केला, गन्ना, अरबी (कचालू) और सैसू शामिल हैं। स्थानीय मौसमी खाने में कुछ देसी जंगली पौधे भी होते हैं, जैसे बाइबिंग। यह एलोकेसिया फॉर्निकेट की स्थानीय किस्म के कंटीले फूल वाला हिस्सा होता है। एंथुरियम और पीस लिली इसी फैमिली के पौधे हैं।
शन फ्रूट (कृष्णा फल), कद्दू, अरबी, सेम और स्क्वैश के फलों की जगह उनकी पत्तियों और कोंपल को ज्यादा पसंद किया जाता है। इनका कौन सा हिस्सा खाना है यह मौसम के हिसाब से तय होता है। मायं बाई कुछ पसंदीदा व्यंजनों में से एक है। इसमें कद्दू के छोटे पत्तों को रोसेला प्लांट (एंथर) के सूखे पत्तों के साथ स्टू बनाया जाता है। बेलवाई बाई में पोर्क के शोरबे में स्ट्रिंग बीन्स के पत्ते डाले जाते हैं। शोरबे को गाढ़ा करने के लिए थोड़ा चावल मिलाया जाता है और अंत में फर्मेंट किए हुए पोर्क फैट (सा-उम) से तड़का लगाया जाता है। बाई का जायका बढ़ाने के लिए कुछ पत्तियां और जड़ी-बूटियां मिलाई जाती हैं, जैसे- चिंगिट (जो सिचुआन मिर्च की करीबी रिश्तेदार है) और एशियाई सिलैंट्रो (बखार) के नुकीले पत्ते। खाने में एक देसी पौधे लेंगसर या मिजो लोंबा (एल्सोल्त्जिया ब्लैंडा) के फूल भी शामिल होते हैं। इसके तीखे खट्टे स्वाद की तुलना अक्सर लेमनग्रास से की जाती है।