Valmiki Jayanti 2025: रामायण भारतीय संस्कृति और लोक आस्था का आधार स्तंभ है। इस महान संस्कृत महाकाव्य की रचना आदिकवि ऋषि वाल्मीकि ने की थी, जिन्होंने प्रभु श्रीराम के जीवन, आदर्शों और धर्म की गाथा को शब्दों में अमर कर दिया। किंतु बहुत कम लोग जानते हैं कि वाल्मीकि जी का प्रारंभिक जीवन रत्नाकर नाम के एक डाकू के रूप में बीता था।
कथा के अनुसार, नारद मुनि के उपदेश ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। उन्होंने अपराध का मार्ग छोड़कर तप और सत्कर्म का मार्ग अपनाया। वर्षों की कठोर तपस्या के दौरान उनके शरीर पर दीमकों की परत जम गई, और इसी कारण उन्हें वाल्मीकि नाम मिला जिसका अर्थ है ‘दीमक की मिट्टी से उत्पन्न’।
मान्यता है कि माता सीता ने प्रभु श्रीराम से अलग होकर ऋषि वाल्मीकि के आश्रम में ही शरण ली और वहीं लव-कुश का जन्म हुआ। इन्हीं बालकों के माध्यम से श्रीराम की कथा संसार में प्रसारित हुई। आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि को ऋषि वाल्मीकि जयंती मनाई जाती है। वर्ष 2025 में यह तिथि 07 अक्टूबर को पड़ रही है। इस दिन आदिकवि वाल्मीकि को स्मरण कर उनके आदर्शों सत्य, करुणा और धर्म को जीवन में अपनाने का संकल्प लें और शुभकामनाएं साझा करें।