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Gyrotonic Exercise: मांसपेशियों के लिए मालिश की तरह असरदार है ये व्यायाम, मिलते हैं कई लाभ

Thu, 22 Dec 2022 03:20 PM IST
स्वाति शैवाल लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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शरीर की मजबूती के लिए जरूरी है व्यायाम - फोटो : pixa
शरीर और मन दोनों को फुर्तीला और स्वस्थ बनाने के लिए नियमित एक्सरसाइज बहुत जरूरी है । यूं भी कोरोना के आने के बाद से शरीर और स्वास्थ्य को लेकर लोगों में सजगता बढ़ी है। एक्सरसाइज के कई प्रकार हैं। इसे लेकर असमंजस होना लाजमी है कि कौन सी एक्सरसाइज अपनाई जाए या किस एक्सरसाइज का असर ज्यादा अच्छा होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सबसे अच्छा एक्सरसाइज रूटीन वह होता है जिसमें शरीर के हिसाब से विभिन्न प्रकार के व्यायाम का मिश्रण हो। यानी कार्डियो, फ्लेक्सिबिलिटी, एंड्यूरेंस, बैलेंसिंग, स्ट्रेचिंग आदि का संतुलित मिश्रण। 

कुछ व्यायाम ऐसे भी होते हैं जो एक साथ पूरे शरीर को लाभ दे सकते हैं। जैसे कि दौड़, ब्रिस्क वॉक, योगा आदि बस इसके लिए इन्हें सही तरीके से अपनाने की जरूरत होती है। जायरोटॉनिक एक ऐसी एक्सरसाइज है जो एकसाथ कई एक्सरसाइज के फायदे आपको दे सकती है। जरूरत बस इसको सही तरीके से सीखने और लागू करने की होती है। 
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शरीर को लचीला बनाने में मिलती है मदद
शरीर और मन दोनों की एक्सरसाइज 

जायरोटॉनिक व्यायाम की एक ऐसी विधा है जो मुख्यतः विशेष मशीन या साधनों के साथ की जाती है। इसमें पूरे शरीर को एक निश्चित लय में गतिशील रखते हुए घुमाया जाता है और शरीर के हर जोड़ पर फोकस किया जाता है। भले ही यह तकनीक बाकी एक्सरसाइज जितनी प्रचारित न हो पाई हो लेकिन इसके फायदे किसी भी एक्सरसाइज से कम नहीं हैं, बल्कि यह एकसाथ पूरे शरीर और दिमाग दोनों की फिटनेस का टास्क पूरा करती है। साथ ही इससे पूरे  शरीर की स्ट्रेचिंग भी हो जाती है। जायरो एक ग्रीक शब्द है जिसका मतलब है 'स्पाइरल' या 'सर्कल' और टॉनिक से तात्पर्य है स्वस्थ मांसपेशियां। यानी शरीर की सभी मांसपेशियों पर इसका सकारात्मक असर होता है। 
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प्रशिक्षक के साथ जायरोटॉनिक एक्सरसाइज - फोटो : Google
शरीर की भीतरी मालिश जैसा फायदा 

जायरोटॉनिक में जिस प्रकार की गतिविधियां या एक्सरसाइज सम्मिलित की जाती हैं उनसे पूरा शरीर इस तरह से संचालित होता है कि हर एक जोड़ और शरीर की हर एक मांसपेशी को फैलने और रिलेक्स होने का मौका मिलता है। यह असर बहुत कुछ उसी तरह का है जैसा शरीर की ऊपरी मालिश करने पर मिलता है। इसलिए जायरोटॉनिक को विशेषज्ञ शरीर के भीतर से बाहर की मालिश के रूप में भी प्रचारित करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि इस एक्सरसाइज के एक सेशन में ही योगा, ताई ची और स्वीमिंग जैसा असर प्राप्त होता है। जोड़ों को सर्कल में घुमाने, शरीर को लय में फैलाने और संचालित करने की इस प्रक्रिया में दिमाग भी चूँकि पूरी तरह भाग लेता है। इसलिए इस एक्सरसाइज को शरीर और दिमाग दोनों की फिटनेस के लिहाज से अच्छा माना जाता है। सबसे अच्छी बात यह कि यह एक्सरसाइज चूँकि अपने आप में कई सारी एक्सरसाइज का मिश्रण है, ऐसे में यह अपने आप में एक सम्पूर्ण वर्कआउट है। 

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जायरोटॉनिक मशीन का एक प्रकार - फोटो : Google
एक साथ हो सकते हैं कई मूवमेंट्स 

जायरोटॉनिक जिस मशीन पर किया जाता है वह  मुख्यतः लकड़ी की बनी होती है। इससे एक साथ अनेक मूवमेंट्स किये जा सकते हैं। इसमें सामान्य पुली टॉवर भी होता है जो अक्सर जिम में देखने को मिलता है लेकिन जायरोटॉनिक में इस पुली के साथ बैले जैसे स्टेप्स एक्सरसाइज के रूप में किये जाते हैं। मशीन में साथ में जुड़ी होती है एक बेंच जिसपर बैठकर या अधलेटे रहकर एक्सरसाइज की जा सकती है। एक्सरसाइज की यह विधा काफी पुरानी है इसलिए वर्तमान में इसकी मशीनें भी जरूरत और एक्सरसाइज के हिसाब से और मोडिफाई की गई हैं। शरीर की संरचना, जरूरत और स्थिति के हिसाब से मशीन को एडजेस्ट किया जा सकता है। इसलिए इसे किसी प्रशिक्षण प्राप्त व्यक्ति की देख रेख में ही करने की सलाह दी जाती है, जैसा कि जिमिंग के लिए भी कहा जाता है। 
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शरीर को देती है कई फायदे - फोटो : istock
फायदे हैं कई 
 
  • मांसपेशियों को मजबूती देने के साथ ही लचीलापन प्रदान करती है।
  • रीढ़ की हड्डी को पूरी क्षमता से काम करने में मदद करती है और झुकने, मुड़ने व घूमने जैसे रीढ़ की हड्डी के संचालनों को सुचारू बनाती है।
  • पूरे शरीर को अधिक फुर्तीला, लचीला और मजबूत बनाने में मदद करती है और स्टेमिना बढ़ाती है ।
  • पोश्चर संबंधी असंतुलन को दूर करती है। जो लोग कम उम्र में ही झुककर बैठने, चलने की आदत बना लेते हैं, उनको इससे बहुत फर्क पड़ सकता है। वहीं उम्रदराज लोगों के पोश्चर को भी यह संतुलित बनाये रखने में मदद कर सकती है।
  • इसकी हर एक्सरसाइज के साथ सांस की लय को भी संतुलन में रखा जाता है। यह फेफड़ों को मजबूती देने के साथ ही श्वसन तंत्र को भी मजबूत बनाती है।
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मांसपेशियों को करती है बहुत मजबूत - फोटो : self
जोड़ों और मांसपेशियों पर ख़ास कारगर  
 
  • मांसपेशियों में जकड़न, जोड़ों की समस्या जैसी स्थितियों में भी यह आराम दे सकती है। कलाई से लेकर घुटनों, कूल्हे की हड्डी और कन्धों तक के जोड़ों के लिए इसमें विशेष मूवमेंट्स होते हैं।
  • मांसपेशियों का लचीलापन, मजबूती बढ़ाने, बैलेंस बनाये रखने, लोअर बैक पेन में राहत देने में भी यह मददगार होती है।
  • चूंकि यह एक लय में संचालित होती है इसलिए इन गतिविधियों में दिमाग भी पूरी तरह से शामिल होता है और एक तरह से ध्यान की अवस्था में आ जाता है। इससे मानसिक सेहत को भी सुचारू बनाये रखने में मदद मिलती है।
  • यह डांस, योगा आदि जैसी गतिविधियों के जैसा लाभ भी देती है, लिहाजा इसे सामान्य फिजिकल फिटनेस के अलावा उम्र के साथ होने वाली समस्याओं, विशेष शारीरिक परिस्थतियों व दुर्घटना के बाद की फिजियोथैरेपी आदि के लिए भी उपयोग में लाने की सलाह दी जाती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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