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Ganesh Chaturthi 2019: बप्पा की पूजा करते वक्त इन 5 बातों का जरूर रखें ध्यान, हर मनोकामना होगी पूरी

Mon, 02 Sep 2019 07:11 AM IST
मोना नारंग लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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किसी भी पूजा के प्रारम्भ में भगवान गणेश की पूजा का विधान है। हर साल भाद्रपद महीने की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन गणपति जी का जन्म हुआ था। इस साल यह त्योहार 2 सितंबर को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान श्री गणेश की पूजा सही तरीके से करने से जीवन के सारे कष्ट दूर होते हैं। इसलिए बप्पा को अमंगल और विघ्नहर्ता कहा जाता हैं। तो अगर इस बार गणेश चतुर्थी पर आप भी करना चाहते हैं गणपति बाबा को प्रसन्न तो पूजा के समय इन पांच बातों का विशेष ध्यान रखें।
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Citronella Grass
गणेश जी को प्रसन्न करने का सबसे सरल तरीका है कि सुबह उठते ही सबसे पहले स्नान करें और फिर गणेश जी को गिनकर पांच दूर्वा यानी हरी घास अर्पित करें। दुर्वा गणेश जी के मस्तक पर रखनी चाहिए। ध्यान रखें कि कभी भी गणेश जी के चरणों में दुर्वा नहीं रखनी चाहिए। दुर्वा अर्पित करते हुए मंत्र बोलें 'इदं दुर्वादलं ऊं गं गणपतये नमः'

 
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शास्त्रों के अनुसार शमी ही एक मात्र पौधा है जिसकी पूजा से गणेश जी और शनि दोनों प्रसन्न होते हैं। ऐसे माना जाता है कि भगवान श्री राम ने भी रावण पर विजय पाने के लिए शमी की पूजा की थी। शमी गणेश जी को अत्यंत प्रिय है। शमी के कुछ पत्ते नियमित रूप से गणेश जी को अर्पित करने से घर में धन एवं सुख की वृद्धि होती है।

 

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भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए पवित्र चावल अर्पित करें। पवित्र चावल उसे कहा जाता है जो टूटा हुआ नहीं हो। उबले हुए धान से तैयार चावल का पूजा में प्रयोग नहीं करना चाहिए। सूखा चावल गणेश जी को नहीं चढ़ाएं। चावल को गीला करें फिर, 'इदं अक्षतम् ऊं गं गणपतये नमः' मंत्र बोलते हुए तीन बार गणेश जी को चावल चढ़ाएं।

 
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सिंदूर की लाली गणेश जी को बहुत पसंद है। गणेश जी की प्रसन्नता के लिए लाल सिंदूर का तिलक लगाएं। गणेश जी को तिलक लगाने के बाद अपने माथे पर सिंदूर का तिलक लगाएं। इससे गणेश जी की कृपा प्राप्त होती है। इससे आर्थिक क्षेत्र में आने वाली परेशानी और विघ्न से गणेश जी रक्षा करते हैं। गणेश जी को सिंदूर चढ़ाते समय मंत्र बोलें, 'सिन्दूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम्। शुभदं कामदं चैव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम्॥ ओम गं गणपतये नमः।'

 

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- फोटो : social media
गणेश जी का एक दांत परशुराम जी से युद्ध में टूट गया था। इससे अन्य चीजों को खाने में गणेश जी को तकलीफ होती है, क्योंकि उन्हें चबाना पड़ता है। मोदक काफी मुलायम होता है जिससे इसे चबाना नहीं पड़ता है। यह मुंह में जाते ही घुल जाता है। इसलिए गणेश जी को मोदक बहुत ही प्रिय है।
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