महात्मा गांधी जब अफ्रीका में थे तब वह कब्ज से बहुत पीड़ित रहते थे। इसके लिए उन्होंने बहुत सारी दवाओं का भी सहारा लिया लेकिन कोई भी फायदा नहीं हुआ। तब उनके एक अंग्रेज मित्र जो कि अफ्रीका में ही रहते थे, उनसे सलाह ली। तो उस मित्र ने गांधी जी को प्राकृतिक चिकित्सा के जनक लुई कूने की पुस्तक 'द न्यू साइंस ऑफ हीलिंग' और जुस्ट की पुस्तक 'रिटर्न टू नेचर' को पढ़ने का सुझाव दिया। इन पुस्तकों को पढ़ने का गांधी जी पर ऐसा असर हुआ कि उन्होंने पुस्तक में वर्णित प्राकृतिक चिकित्सा की विधियां जैसे ठंडा घर्षण, कटि स्नान, मेहन स्नान और पेड़ू पर मिट्टी की पट्टी आदि के प्रयोग स्वयं पर करने का अभ्यास किया। इन उपचार के सकारात्मक प्रभाव का असर था कि वो सबको प्राकृतिक चिकित्सा की सलाह देने लगे।