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फेसबुक, व्हॉट्सएप पर चैट करने से बेहतर है कॉल कर के बात करना, मजबूत होगा रिश्ता: शोध

Thu, 29 Oct 2020 10:12 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हम अपने स्मार्टफोन का इस्तेमाल मैसेज करने, चैट करने के लिए ज्यादा कर रहे हैं - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
हाल के दशकों में सोशल मीडिया का क्रेज बढ़ा है और एक-दूसरे से जोड़े रखनेवाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और मोबाइल एप्लिकेशन(एप) भी खासी संख्या में बढ़े हैं। अक्सर हम फेसबुक, व्हॉट्सएप जैसे एप पर अपनों से चैटिंग करते हैं। दोस्तों से, रिश्तेदारों से या फिर ऑफिस के सहकर्मियों या बॉस से भी। एक अध्ययन में यह सामने आया है कि अपनों से कॉल पर बात करने से ज्यादा हम चैटिंग या टेक्स्ट मैसेज में लिखकर (टाइप कर) बात कर रहे हैं। हम अपने स्मार्टफोन का इस्तेमाल मैसेज करने, चैट करने के लिए ज्यादा कर रहे हैं और कॉल या वीडियो कॉल बहुत कम कर रहे हैं। इस कारण हमारी सोशल बॉन्डिंग कमजोर हो रही है यानी रिश्ता कमजोर पड़ रहा है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
दरअसल, अमेरिकी लेबर सप्लाई कंपनी ऐडको ने आठ हजार कर्मियों में वर्क फ्रॉम होम को लेकर एक सर्वे किया। इसके मुताबिक, हर पांच में से चार लोगों को वर्क फ्रॉम होम ही पसंद है। हालांकि, वर्क फ्रॉम होम यानी घर से काम करने के दौरान उनमें कम्यूनिकेशन गैप बढ़ गया है और लोग अकेलेपन का भी सामना कर रहे हैं। कर्मियों के बीच लोगों से फेस-टू-फेस बात करने का समय भी कम हो गया है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
रिसर्च करनेवाले अमेरिकी वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना लॉकडाउन के कारण वर्क फ्रॉम होम करनेवाले लोगों के लिए किसी दोस्त का एक फोन कॉल उन्हें अपनों से जुड़ा हुआ महसूस कराने के लिए काफी है। शोधकर्ताओं ने इस शोध अध्ययन के दौरान लोगों को उनके पुराने साथियों से फोन, मेल, वॉइस चैट, वीडियो कॉल आदि के जरिए जुड़ने को कहा। उन्होंने पाया कि लोग एक-दूसरे से कॉल पर बात करके ज्यादा जुड़ा हुआ महसूस कर रहे हैं। 

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लोग बोलकर बात करने में पीछे हिचकते हैं - फोटो : PTI
इस अध्ययन के मुताबिक, जो लोग सिर्फ वॉइस चैट से जुड़े, उनमें भी अपने साथियों के साथ अच्छी बॉन्डिंग दिखी। पाया गया कि लोग बोलकर बात करने में पीछे हिचकते हैं और उसकी बजाय मेल या चैटिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि अक्सर बोलकर बात करना अजीब लग सकता है या फिर कॉल करने पर उन्हें गलत समझा जा सकता है।
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लोग टेक्स्ट करना ज्यादा सहज समझते हैं - फोटो : Pixabay
विशेषज्ञों के मुताबिक, लोग अपनों की आवाज के जरिए ज्यादा जुड़ाव महसूस करते हैं। आवाज सुनकर वह सामने वाले के बोलने का भाव भी समझ पाते हैं। हालांकि लोगों को लगता है कि कॉल करने से सामने वाला व्यक्ति कहीं खुद को डिस्टर्ब न महसूस करे। इस कारण टेक्स्ट कर देना ज्यादा सहज समझते हैं। 
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अपना स्क्रीन टाइम कम करें - फोटो : पेक्सेल्स
सोशल बॉन्डिंग के लिए क्या करें?
  • चैटिंग या टेक्स्ट मैसेज करने की बजाय कॉल कर के बात करें।
  • अपने सहकर्मियों, रिश्तेदारों, दोस्तों से फोन पर बात करें।
  • सोशल मीडिया एप पर अपना स्क्रीन टाइम कम करें।
  • वर्क फ्रॉम होम में अकेलापन महसूस हो तो कार्यालय जाकर भी काम कर सकते हैं।
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