जिंक की कमी से छोटे बच्चों के मलेरिया, निमोनिया और दस्त संबंधी बीमारियों से पीड़ित होने का खतरा रहता है। शोधकर्ताओं ने भारतीय आहार पैटर्न पर आधारित विस्तृत सर्वेक्षण आंकड़ों का उपयोग किया है ताकि यह अनुमान लगाया जा सके कि बदलते वातावरण में अपर्याप्त जिंक सेवन की दर कैसे बदल सकती है। भोजन में जिंक की मात्रा कम होने का कारण भारतीय लोगों के आहार से जौ, बाजरा, चना जैसे मोटे अनाजों का गायब होना भी जिम्मेदार है। इसके अलावा, पैकेजिंग में मिलने वाले आटे का उपयोग भी जिंक के अपर्याप्त सेवन से जुड़ा एक प्रमुख कारक है। यह अध्ययन इंडियन इंस्टीट्यूट ऑप पब्लिक हेल्थ, नई दिल्ली, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस, हैदराबाद और अमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय एवं हार्वर्ड टीएच चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के शोधकर्ताओं ने मिलकर किया है। औसत भारतीय के लिए जिंक की आवश्यकता पांच प्रतिशत बढ़ गई है क्योंकि वयस्कों को बच्चों की तुलना में अधिक जिंक की आवश्यकता होती है।