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Zika Virus: मुंबई में पहले मामले की पुष्टि के बाद अलर्ट जारी, जानिए जीका के लक्षण से लेकर जोखिमों तक सबकुछ

Thu, 24 Aug 2023 02:14 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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जीका वायरस के मामले - फोटो : Amar Ujala Digital
मुंबई में जीका वायरस के मामले की पुष्टि ने सभी राज्यों को अलर्ट कर दिया है। बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक चंबूर निवासी 79 वर्षीय व्यक्ति में वायरस से संक्रमण की पुष्टि की गई थी, हालांकि अब वह पूरी तरह से ठीक हो गए हैं। मामले की पुष्टि के बाद कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की गई, हालांकि इसमें किसी नए मामले का पता नहीं चला है।

जीका मच्छरजनित रोग है, सबसे पहले साल 1947 में युगांडा में इसकी पहचान की गई थी। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जीका के कारण कुछ लोगों में गंभीर रोग विकसित होने का खतरा हो सकता है, इसमें ज्यादातर लक्षण मच्छरजनित अन्य रोगों और फ्लू की तरह ही होते हैं।

छोटे बच्चों में इसके संक्रमण के कारण गंभीर रोग विकसित होने का जोखिम अधिक देखा जाता रहा है। आइए जीका वायरस के बारे में आगे विस्तार से जानते हैं। 
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मच्छरों से फैलता है जीका वायरस - फोटो : istock
जीका वायरस के बारे में जानिए

जीका, डेंगू और मलेरिया जैसा ही एक मच्छर जनित रोग है, यह संक्रमण माइक्रोसेफली नामक जन्म दोष से जुड़ा है, जो गर्भावस्था के दौरान जीका से संक्रमित मां से पैदा होने वाले बच्चों को प्रभावित कर सकता है। संक्रमितों में इसके कारण गंभीर रोग या अस्पताल में भर्ती होने का खतरा कम देखा जाता रहा है।

सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) विशेषज्ञों के मुताबिक गर्भवती को इस रोग से बचाव को लेकर गंभीरता से ध्यान देते रहने की आवश्यकता होती है,  मच्छरों के काटने से बचने के लिए सावधानी बरतनी चाहिए।
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जीका के कारण बुखार की समस्या - फोटो : istock
जीका वायरस के कैसे होते हैं लक्षण?

जीका के लक्षण आमतौर पर हल्के होते हैं और अपने आप ठीक भी हो जाते है। हालांकि, इस वायरस का असर सबसे ज्यादा गर्भवती महिलाओं और उनके गर्भस्थ शिशु पर देखा गया है।

जीका से संक्रमित लगभग 5 में से केवल एक व्यक्ति में लक्षण दिखाई देते हैं। आमतौर पर इसमें बुखार, त्वचा पर लाल धब्बे, आर्थ्राल्जिया (जोड़ों का दर्द), कंजंक्टिवाइटिस (लाल, सूजी हुई आंखें) और सिरदर्द की समस्या हो सकती है। लक्षण आमतौर पर दो-तीन दिनों से लेकर एक सप्ताह तक रह सकते हैं। 

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जीका वायरस का जोखिम - फोटो : Pixabay
कैसे फैलता है ये रोग

जॉन हॉपकिंस मेडिसिन की रिपोर्ट के अनुसार, जीका वायरस मुख्यरूप से संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलता है। यदि किसी गर्भवती महिला को संक्रमित मच्छर ने काट लिया है, तो संक्रमण का असर भ्रूण पर भी हो सकता है। इसके अलावा संक्रमित खून चढ़ाने से भी वायरस का संचार एक से दूसरे व्यक्ति में होने का खतरा रहता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जीका वायरस संचरण यौन संबंधों के माध्य्म से भी हो सकता है।
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जीका से बचाव के लिए करें उपाय - फोटो : Pixabay
कैसे करें जीका से बचाव?

जीका वायरस से बचाव के लिए जरूरी  है कि मच्छरों से बचाव करें। उन देशों या इलाकों की यात्रा न करें जहां जीका का प्रकोप अधिक हो। कुछ बातों का ध्यान रखकर मच्छरों के काटने से बचाव किया जा सकता है। 
  • लंबी बाजू वाली शर्ट और लंबी पैंट पहनें।
  • जितना संभव हो घर के अंदर रहें।
  • सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
  • गर्भवती महिलाएं संक्रमण से बचाव का विशेष ध्यान रखें।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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