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Sudden Heart Attak: क्रिकेट खेलते-खेलते हार्ट अटैक से मौत, क्या वैक्सीनेशन है इसकी वजह?

Mon, 03 Jun 2024 07:26 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हार्ट अटैक के बढ़ते मामले - फोटो : amarujala.com
पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि देश के कई हिस्सों में सडेन हार्ट अटैक के मामले काफी तेजी से बढ़े हैं। डीजे पर डांस करते हुए, पार्टी का आनंद लेत हुए और ऑफिस में काम करते-करते हार्ट अटैक और इसके कारण होने वाली मौतों के बारे में आपने भी जरूर सुना होगा। पिछले एक सप्ताह में सडेन हार्ट अटैक के ऐसे ही दो मामलों ने लोगों में एक बार फिर से डर बढ़ा दिया है।

31 मई को मध्यप्रदेश के इंदौर में एक कार्यक्रम के दौरान सेवानिवृत्त फौजी की हार्ट अटैक से मौत हो गई। इसी तरह से 3 जून को मुंबई के मीरा रोड इलाके में क्रिकेट खेलते समय एक युवक अचानक गिर गया और उसकी मौत हो गई। मौत के लिए कार्डियक अरेस्ट को ही कारण माना जा रहा है, हालांकि अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। इसी तरह से जनवरी में नोएडा में भी मैदान पर खेलते समय दिल का दौरा पड़ने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। 

युवाओं, विशेषकर अच्छी फिटनेस वाले लोगों में बढ़ते हार्ट अटैक के मामलों ने कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या इन घटनाओं के लिए कोविड वैक्सीन जिम्मेदार है या फिर कुछ और? हार्ट अटैक के मामले आखिर क्यों बढ़ रहे हैं? आइए इस बारे में डॉक्टर से समझते हैं।
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हार्ट अटैक के मामले - फोटो : istock
युवा रहे हैं हार्ट अटैक के शिकार

हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों को लेकर सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है। कई यूजर लिखते हैं, ''कोविड वैक्सीनेशन की वजह से युवाओं में ये खतरा बढ़ गया है, जिन लोगों ने टीके लिए हैं उनमें इस तरह के मामले अधिक देखे जा रहे हैं।''
 
 

क्या वास्तव में कोविड वैक्सीन की वजह से ऐसा हो रहा है या फिर इसका कोई और कारण है? इस बारे में समझने के लिए हमने दिल्ली स्थित इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल में हृदय रोग विशेषज्ञ और सर्जन डॉ निरंजन हीरेमथ से बातचीत की। 
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हृदय रोगों के मामले - फोटो : istock
क्यों बढ़ रहे हैं युवाओं-स्वस्थ लोगों में हार्ट अटैक के मामले?

डॉ निरंजन कहते हैं, हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के मामले किसी भी उम्र के व्यक्ति में हो सकते हैं। रिटायर्ड फौजी की मौत संभवत: पहले हार्ट अटैक और फिर कार्डियक अरेस्ट के कारण हुई होगी। इसी तरह युवाओं में सडेन कार्डियक अरेस्ट के मामले भी अधिक देखे जाते रहे हैं। जिन युवाओं को पहले से ही हृदय रोगों से संबंधित समस्याएं रही हैं उनमें कार्डियक अरेस्ट का खतरा अधिक हो सकता है।

यहां जानना जरूरी है कि हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट दो अलग-अलग समस्याएं हैं। कोरोनरी धमनियों में ब्लॉकेज बढ़ने या किसी कारणवश इसके अवरुद्ध होने के कारण दिल का दौरा पड़ सकता है। इसमें तुरंत सीपीआर और अन्य उपायों की मदद से रोगी की जान बचाई जा सकती है। हालांकि कार्डियक अरेस्ट तब होता है जब हृदय रक्त को पंप करना बंद ही कर देता है, इसे अधिक घातक माना जाता है।
 

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वैक्सीनेशन से होने वाली समस्याएं - फोटो : Istock
क्या वैक्सीनेशन के वजह से बढ़ गया है जोखिम?

हार्ट अटैक-कार्डियक अरेस्ट के बढ़ते मामलों ने कोविड वैक्सीन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। असल में हाल ही में वैक्सीन निर्माता कंपनी एस्ट्रजेनेका ने स्वीकार किया था दुर्लभ स्थितियों में टीके के कारण रक्त के थक्के बनने और हार्ट अटैक का जोखिम हो सकता है।

डॉ निरंजन कहते हैं, ये निराधार बात है कि टीकों की वजह से हार्ट अटैक बढ़ रहे हैं। अध्ययनों में भी स्पष्ट किया गया है कि टीका लेने के तुरंत बाद ही इसके दुष्प्रभाव हो सकते हैं, हालांकि ऐसे मामले भी दुर्लभ हैं। इतने लंबे समय के बाद इसके जोखिम नहीं देखे जाते हैं।
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सीपीआर से बच सकती है जान - फोटो : freepik.com
तुरंत सीपीआर से बचाई जा सकती है जान

डॉ निरंजन कहते हैं हार्ट अटैक की स्थिति में अगर तुरंत सीपीआर देकर रोगी को आपातकालीन चिकित्सा मिल जाए तो इससे जान बचाई जा सकती है।  हालांकि कार्डियक अरेस्ट के 90 फीसदी मामलों में सीपीआर या अन्य उपायों के लिए भी समय नहीं होता है।

हृदय रोगों के मामले में सीपीआर प्रभावी तरीका हो सकता है। इस बारे में सभी लोगों को जानना जरूरी है। अगर किसी व्यक्ति में हार्ट अटैक के लक्षण जैसे सीने में दर्द, जकड़न, कंधे-हाथ गर्दन-जबड़े में दर्द हो रहा हो, सीने में जलन या चक्कर आने जैसी दिक्कत हो रही है तो तुरंत सीपीआर और आपातकालीन चिकित्सा के लिए पहुंचाएं।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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