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'क्लैमाइडिया ट्रेकोमैटिस' बीमारी बना सकती है आपको अंधा, जानें क्या हैं इसके लक्षण और उपचार

Sat, 24 Aug 2019 09:50 AM IST
पंखुड़ी सिंह लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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आंखें शरीर का बहुत ही नाजुक अंग है और इसके साथ हुई जरा सी लापरवाही से रोशनी भी जा सकती है। इसीलिए आंखों की साफ-सफाई का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। बारिश के मौसम में सफाई की अनदेखी का ही नतीजा होता है कि कंजेंटिवाइटिस जैसी समस्या हो जाती है। शरीर के सभी अंगों की साफ-सफाई के साथ ही आंखों की सफाई और सही देखभाल भी जरूरी है। ऐसा न करने से अंधेपन का खतरा हो सकता है। जी हां, आंखों की साफ-सफाई की अनदेखी के कारण ही लोग ट्रेकोमा जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं। आइए जाने की इस बीमारी के लक्षण और उपचार क्या हैं।
 
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- फोटो : pixa
ट्रेकोमा 
साफ-सफाई का ध्यान नही देने से एक तरह का बैक्टीरिया जिसे क्लैमाइडिया ट्रेकोमैटिस बैक्टीरिया कहते हैं का संक्रमण आंखों पर हो जाता है। जिसके कारण लोगों में अंधेपन की समस्या हो जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया कि दुनियाभर में करीब 14 करोड़ लोग ट्रेकोमा से पीड़ित हैं और उनमें अंधेपन का खतरा मंडरा रहा है।
 
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ट्रेकोमा के बैक्टीरिया से पीड़ित व्यक्ति ही एक तरीके का संवाहक होता है। ऐसे व्यक्ति से हाथ मिलाने, कपड़े का आदान-प्रदान करने से यह बैक्टीरिया दूसरे इंसान तक पहुंचते हैं। गंदे वातावरण में रहने वाले लोग इस बीमारी की चपेट में ज्यादा आते हैं। साफ पानी का अभाव, शौचालयों की समुचित व्यवस्था न होना और खुद की सफाई न रखने से यह गंभीर बीमारी फैलती है। ज्यादातर यह बीमारी नवजात बच्चों और उनके साथ संपर्क में रहने वाली मांओं को होती है।
 

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- फोटो : pixa
ट्रेकोमा के लक्षण
ट्रेकोमा के बैक्टीरिया आंखों की ऊपरी पलक की अंदरूनी सतह और कार्निया को प्रभावित करते हैं। इस बीमारी में आंखों की ऊपरी पलक में घाव होने लगता है और फिर पलक अंदर की तरफ मुड़ जाती है। जिससे भयंकर दर्द होता है और पलक रगड़ने से कार्निया को नुकसान होता है।
 
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किसी की आंख में अगर पांच-दस दिन से खुजली और जलन, पानी निकलने की शिकायत होती है और पलक के ऊपर वाले हिस्से में सूजन, गांठ नजर आए और साथ ही दर्द, लालिमा हो तो तुरंत ही डॉक्टर को दिखाना चाहिए। 
 
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- फोटो : pixa
क्या है उपचार
पूरे विश्व में इस गंभीर बीमारी के परिणाम की वजह से डब्ल्यूएचओ ने सेफ नाम से एक मुहिम शुरु किया है। जिसका मतलब है एस से सर्जिकल देखभाल, ए यानी एंटीबायोटिक्स, एफ यानी चेहरे की सफाई और ई यानी साफ-सुथरा वातावरण। मरीज के आंखो की गंभीरता के हिसाब से एजिथ्रोमाइसिन एंटीबायोटिक की सिंगल डोज दी जाती है और इसे कम से कम तीन साल तक दिया जाता है। जिस मरीज को यह बीमारी होती है, उसके आसपास के लोगों को भी एंटीबायोटिक की डोज दी जाती है।  
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