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Year Ender 2025: मेडिकल साइंस के लिए सुनहरा रहा ये साल, नई वैक्सीन से लेकर गंभीर रोगों के इलाज में मिली सफलता

Sun, 28 Dec 2025 08:03 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • इस साल चिकित्सा विज्ञान ने कई ऐसी उपलब्धियां हासिल कीं, जिन्होंने न सिर्फ बीमारियों के इलाज के तरीकों को बदला, बल्कि लोगों की सोच और उम्मीदों को भी नई दिशा दी। 
  •  2025 ने यह साबित कर दिया कि मेडिकल साइंस लगातार आगे बढ़ रहा है।
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मेडिकल क्षेत्र के लिए काफी बेहतरीन रहा ये साल - फोटो : Amarujala.com
देखते-देखते साल 2025 अपनी समाप्ति की ओर आ गया है, जल्द ही हम सभी नए साल 2026 में प्रवेश करने जा रहे हैं। नया साल, नई उम्मीदें और नए हेल्थ रेजोल्यूशन के साथ आगे बढ़ने से पहले एक बार इस साल पर नजर डालें तो पता चलता है कि साल 2025 मेडिकल क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। इस साल चिकित्सा विज्ञान ने कई ऐसी उपलब्धियां हासिल कीं, जिन्होंने न सिर्फ बीमारियों के इलाज के तरीकों को बदला, बल्कि लोगों की सोच और उम्मीदों को भी नई दिशा दी। 

तेजी से बदलती जीवनशैली, बढ़ते संक्रमण, कैंसर और लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों के बीच वैज्ञानिकों और डॉक्टरों ने तकनीक के दम पर ऐसे समाधान पेश किए, जो कुछ साल पहले तक असंभव माने जाते थे। नई वैक्सीन से लेकर अत्याधुनिक इलाज तक, 2025 ने यह साबित कर दिया कि मेडिकल साइंस लगातार आगे बढ़ रहा है।

आइए इस साल की मेडिकल उपलब्धियों पर एक नजर डाल लेते हैं।
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छोटा पेसमेकर - फोटो : Adobe Stock Images
वैज्ञानिकों ने बनाया चावल के दाने जितना छोटा पेसमेकर

मेडिकल क्षेत्र में नवाचार क्रम में वैज्ञानिकों को अप्रैल के महीने में बड़ी सफलता हाथ लगी। नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने एक अतिसूक्ष्म पेसमेकर बनाया जिससे दिल के मरीजों को विशेष लाभ मिल सकता है। सबसे खास बात ये है कि इसका आकार चावल के दाने जितना छोटा है और अब तक जिस तरह से पेसमेकर लगाया जाता रहा है उससे इतर इसे आसानी से  इंजेक्शन के जरिये भी शरीर में इंजेक्ट किया जा सकता है।  जन्मजात हृदय दोष वाले नवजात शिशुओं के छोटे, नाजुक हृदय के लिए भी इसे विशेष रूप से उपयुक्त माना जा रहा है।
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वैज्ञानिकों ने बनाया आर्टिफिशियल खून - फोटो : Freepik.com
वैज्ञानिकों ने बनाया कृत्रिम रक्त

छोटे से पेसमेकर के साथ इस साल वैज्ञानिकों ने बनाया कृत्रिम रक्त यानी आर्टिफिशियल खून भी विकसित कर लिया। ये खबर काफी सुर्खियों में थी। रक्त की इस कमी को दूर करने के लिए जापानी वैज्ञानिकों ने ये आविष्कार किया था। इसका उपयोग किसी भी ब्लड ग्रुप के लिए किया जा सकता है और इसे बिना रेफ्रिजरेशन के लंबे समय तक सुरक्षित भी रखा जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह आपातकालीन चिकित्सा के दौरान सामने आने वाली सबसे बड़ी चुनौती को दूर करने और लोगों की जान बचाने में काफी मददगार हो सकती है।

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मलेरिया से बचाव के लिए वैक्सीन - फोटो : Freepik.com
मलेरिया की रोकथाम के लिए पहली स्वदेशी वैक्सीन

जुलाई 2025 में भारत ने मलेरिया की रोकथाम के लिए अपना पहला टीका तैयार किया। आईसीएमआर और भुवनेश्वर स्थित क्षेत्रीय चिकित्सा अनुसंधान केंद्र (आरएमआरसी) के शोधकर्ताओं ने मिलकर यह स्वदेशी टीका तैयार किया। विशेषज्ञों ने उम्मीद जताई कि इससे न सिर्फ अस्पतालों पर पड़ने वाले दवाब को कम किया जा सकेगा बल्कि रोगियों की जान बचाने में भी मदद मिल सकेगी। इसे फिलहाल एडफाल्सीवैक्स नाम दिया है, जो मलेरिया परजीवी प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम के खिलाफ पूरी तरह असरदार पाया गया है।
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हैजा से बचाव की वैक्सीन - फोटो : Adobe stock
हैजा रोग से बचाव की वैक्सीन

भारत जैसे विकासशील देश में हैजा एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बना हुआ है। शोधकर्ताओं ने इस साल हैजा संक्रमण से बचने के लिए एक टीका विकसित किया जिसके सभी परीक्षण पूरी तरह सफल रहे। विशेषज्ञों ने उम्मीद जताई है कि इस वैक्सीन की मदद से घातक संक्रामक रोगों की रोकथाम में मदद मिल सकती है। हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक कंपनी ने कारगर टीका बनाने की जानकारी दी। कंपनी ने इस टीका को हिलचोल नाम दिया है।
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प्रोस्टेट कैंसर की जांच - फोटो : Freepik.com
प्रोस्टेट कैंसर की जांच हुई आसान

पुरुषों में फेफड़े और मुंह के साथ प्रोस्टेट कैंसर का खतरा भी तेजी से बढ़ता जा रहा है। इसके समय रहते जांच के लिए वैज्ञानिकों ने एक 15 मिनट वाले कारगर प्रोस्टेट कैंसर स्कैन के बारे में जानकारी दी, जिससे इस कैंसर आसानी से पता लगाना और आसान हो सकता है। ये नया एमआरआई स्कैन, मौजूदा एमआरआई स्कैन से आधा समय लेता है और इसकी लागत भी आधी है।

ब्रिटिश शोधकर्ताओं ने कहा किइसकी मदद से अब कम समय में अधिक लोगों की जांच की जा सकेगी और स्कैन के लिए मरीजों की जेब पर पड़ने वाला आर्थिक दबाव भी कम होगा।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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