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Health Alert: स्वाद के चक्कर में कहीं आप भी तो नहीं ले रहे 'स्लो पॉइजन'? डाइटीशियन ने किया अलर्ट

Wed, 01 Jul 2026 08:30 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कोल्ड ड्रिंक, पैकेज्ड फ्रूट ड्रिंक, एनर्जी ड्रिंक और अधिक चीनी वाले पेय पदार्थ शरीर में बहुत तेजी से अतिरिक्त कैलोरी बढ़ाते हैं। इसका संपूर्ण स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर हो सकता है। 
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खान-पान संबंधी समस्याएं - फोटो : Amarujala.com/AI
हम जो कुछ भी खाते-पीते हैं, उसका शरीर, दिमाग और सेहत पर सीधा असर होता है। यही कारण है कि विशेषज्ञ सभी लोगों को अपनी डाइट को ठीक रखने की सलाह देते हैं। हालांकि जिस तरह से युवाओं के खान-पान का ट्रेंड देखा जा रहा है वह सेहत के लिए चिंताजनक संकेत हो सकता है।

 कई बार हमें लगता है कि कभी-कभार जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक या प्रोसेस्ड स्नैक्स खाने से कोई खास फर्क नहीं पड़ता, लेकिन कब ये चीजें हमारे रोजाना के खान-पान का हिस्सा बन जाती हैं इसका पता ही नहीं चलता। डाइटीशियन अलर्ट कर रहे हैं कि ये चीजें मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, टाइप-2 डायबिटीज, फैटी लिवर, हृदय रोग और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याओं को बढ़ाने वाली हो सकती हैं। ह

मारी कई पसंदीदा चीजों में चीनी-नमक की अत्यधिक मात्रा के साथ अनहेल्दी फैट, कृत्रिम रंग, फ्लेवर और प्रिजर्वेटिव हो सकते हैं, जो शरीर में सूजन बढ़ाने और मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करने वाले माने जाते रहे हैं। 

कहीं आप भी तो रोजाना सेहत के लिए स्लो पॉइजन मानी जाने वाली चीजें नहीं खा-पी रहे हैं?
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आहार पर दें ध्यान - फोटो : Freepik.com
सभी उम्र वालों में डाइट की गड़बड़ी

आहार विशेषज्ञ कहते हैं, बच्चे या युवा ही नहीं बुजुर्गों में भी खान-पान की गड़बड़ी देखी जा रही है।
 
  • कोल्ड ड्रिंक, पैकेज्ड फ्रूटऔर एनर्जी ड्रिंक बहुत तेजी कैलोरी बढ़ाते हैं। इनमें मौजूद चीनी ब्लड शुगर को अचानक बढ़ाती है, जिससे इंसुलिन पर दबाव बढ़ता है।
  • लंबे समय तक इनका सेवन मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, फैटी लिवर और हृदय रोग का खतरा बढ़ा सकता है। 

आइए जान लेते हैं कि सेहत के लिए किन चीजों को आहार विशेषज्ञ सबसे खतरनाक मानते हैं?
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अल्ट्रा-प्रोसेस्ड चीजों के खतरे - फोटो : Freepik.com
अल्ट्रा-प्रोसेस्ड चीजें बढ़ा रही हैं खतरा

चिप्स, नमकीन और फ्लेवर्ड स्नैक्स हम सभी का पसंदीदा होते हैं। ये स्वाद में अच्छे लगते हैं लेकिन इनमें नमक, अनहेल्दी फैट और एडिटिव्स की मात्रा अधिक होती है।
 
  •  इनका नियमित सेवन हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा और बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ा सकता है। 
  • इनमें फाइबर और जरूरी पोषक तत्वों की मात्रा न के बराबर होती है। इसलिए खाने के बाद भी शरीर को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता। 
  • पहले ही कई अध्ययन बता चुके हैं कि हम जाने-अनजाने जरूरत से ज्यादा नमक का सेवन कर रहे हैं। इसका सीधा असर हमारे ब्लड प्रेशर पर देखा जा रहा है। 

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खान-पान में गड़बड़ी - फोटो : Freepik.com
बेकरी वाले आइटम भी खतरनाक

केक, पेस्ट्री, डोनट, कुकीज में रिफाइंड मैदा, चीनी और अनहेल्दी फैट बहुत ज्यादा होता है। ये वजन बढ़ाने के साथ-साथ ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाते हैं। 
 
  • इस तरह की चीजों के नियमित सेवन से इंसुलिन रेजिस्टेंस और दांतों की समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। 
  • डाइटीशियन सलाह देते हैं कि मीठा खाने की इच्छा होने पर सीमित मात्रा में घर की बनी मिठाई या फल बेहतर विकल्प हो सकते हैं।

इंस्टेंट नूडल्स और रेडी-टू-ईट फूड के खतरे

इंस्टेंट नूडल्स और रेडी-टू-ईट भोजन समय बचाते हैं, लेकिन इनमें अक्सर सोडियम, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और प्रिजर्वेटिव अधिक होते हैं। नियमित सेवन से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और पोषण की कमी भी हो सकती है। इनकी जगह घर का ताजा बना भोजन हमेशा बेहतर माना जाता है।
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खान-पान संबंधी समस्याएं - फोटो : Adobe stock photos
हो सकते हैं गंभीर खतरे

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स हों या बेकरी और इंस्टेंट नूडल्स, ये सभी खाद्य पदार्थ शरीर में सूजन बढ़ा सकतें हैं। इससे मोटापा, डायबिटीज, हृदय रोग और मेटाबॉलिक सिंड्रोम का खतरा बढ़ जाता है। इसके सेवन के बाद भी ऊर्जा का स्तर कम महसूस होता है और थकान भी रहती है।
 
  • अत्यधिक प्रोसेस्ड चीजें केवल शरीर ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकती हैं। 
  • कुछ शोध बताते हैं कि खराब खान-पान के कारण मूड में बदलाव, तनाव और अवसाद का भी जोखिम रहता है।
  • बच्चों में जंक फूड की आदत जल्दी लग जाती है। इससे मोटापा, दांतों की समस्या, ध्यान और पोषण की कमी जैसी परेशानियां हो सकती हैं।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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