World Suicide Prevention Day: किसके मन में क्या चल रहा है, ये समझना हर किसी के बस में नहीं होता। पर, कई बार सामने वाले में कुछ ऐसे लक्षण दिख जाते हैं, जिससे ये पता लग जाता है कि वो कितना परेशान है। यहां हम आपसे इसी बारे में बात करेंगे।
World Suicide Prevention Day: विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस हर साल 10 सितंबर को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य आत्महत्या की रोकथाम को लेकर जागरूकता बढ़ाना और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बात करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करना है।
कई बार कोई व्यक्ति भीतर से बेहद परेशान होता है, लेकिन अपनी भावनाओं को दूसरों के सामने व्यक्त नहीं कर पाता। हालांकि, कुछ व्यवहारिक बदलाव संकेत दे सकते हैं जिससे पता लगता है कि सामने वाला किसी संकट से गुजर रहा है। इन संकेतों को नजरअंदाज करने के बजाय सामने वाले से बिना जज किए बात करना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद दिलाना महत्वपूर्ण है।
हमेशा याद रखें कि आत्महत्या के विचारों पर बातचीत करना उन्हें बढ़ावा देना नहीं है; सही तरीके से की गई बातचीत व्यक्ति को अकेलेपन से बाहर आने और मदद लेने की दिशा में पहला कदम दे सकती है। इसलिए हम सभी को इस बारे में अच्छी तरह से पता होना चाहिए।
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विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस
- फोटो : AI
आत्महत्या के विचारों के संकेतों को पहचानना क्यों जरूरी है?
किसी के मन में क्या चल रहा है, यह हमेशा उसके चेहरे या सामान्य बातचीत से पता नहीं चलता। फिर भी कुछ वार्निंग साइन पर ध्यान देना मददगार हो सकता है:
लगातार निराशा, बेबसी या खुद को बोझ समझने की बात करना
परिवार और दोस्तों से अचानक दूरी बनाने लगना
व्यवहार, मूड या रोजमर्रा की आदतों में बड़ा बदलाव आना
पहले पसंद आने वाली गतिविधियों में रुचि खत्म होना
मौत या खुद को नुकसान पहुंचाने से जुड़ी बातें करना
भविष्य को लेकर बेहद नकारात्मक नजरिया व्यक्त करना
जरूरी चीजों या निजी मामलों को अचानक व्यवस्थित करने जैसा असामान्य व्यवहार
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ऐसे समय में कैसे बात करें?
जब कोई व्यक्ति मानसिक या भावनात्मक संकट से गुजर रहा हो, तो उससे बात करते समय सबसे जरूरी है कि उसे यह महसूस हो कि वह अकेला नहीं है और उसकी बात सुनी जा रही है। कई बार लोग अपनी परेशानी इसलिए साझा नहीं करते क्योंकि उन्हें डर होता है कि सामने वाला उन्हें जज करेगा, उनकी समस्या को छोटा समझेगा या उन्हें कमजोर समझेगा।
ऐसे में बातचीत की शुरुआत बहुत सहज तरीके से की जा सकती है। जैसे कि, “मैंने महसूस किया है कि तुम इन दिनों थोड़े परेशान लग रहे हो, अगर तुम बात करना चाहो तो मैं सुनने के लिए हूं” जैसे शब्द व्यक्ति को खुलकर बात करने का मौका दे सकते हैं।
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अगर सामने वाला आत्महत्या या खुद को नुकसान पहुंचाने की बात करता है, तो उसकी बात को गंभीरता से लेना जरूरी है। उसे डांटने, दोष देने या यह कहने से बचें कि “ऐसा मत सोचो”, “सब ठीक हो जाएगा” या “तुम्हें मजबूत बनना चाहिए।” इसके बजाय उसकी भावनाओं को समझने की कोशिश करें और शांत रहकर उसकी बात सुनें।
जरूरत पड़ने पर सीधे लेकिन संवेदनशील तरीके से यह भी पूछा जा सकता है कि क्या उसे खुद को नुकसान पहुंचाने या आत्महत्या करने का विचार आ रहा है। ऐसा सवाल पूछना व्यक्ति के मन में आत्महत्या का विचार पैदा नहीं करता। बल्कि इससे उसकी स्थिति को समझने और समय रहते मदद उपलब्ध कराने में सहायता मिल सकती है।
अगर आपको लगे कि व्यक्ति तत्काल खतरे में है, तो उसे अकेला न छोड़ें और किसी भरोसेमंद परिजन, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या स्थानीय आपातकालीन सेवा की मदद तुरंत लें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।