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विश्व दृष्टि दिवस: मोबाइल और लैपटॉप के ज्यादा इस्तेमाल से आंखों पर क्या असर पड़ता है?

Wed, 07 Oct 2026 10:06 AM IST
Shruti Gaur हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

World Sight Day: अगर आप उन लोगो में से हैं, जो हमेशा लैपटॉप चलाते हैं और मोबाइल देखते हैं तो इस लेख को आखिर तक अवश्य पढ़ें।
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मोबाइल और लैपटॉप के ज्यादा इस्तेमाल से आंखों पर कितना असर? - फोटो : AI
World Sight Day: आज के डिजिटल दौर में मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। पढ़ाई से लेकर ऑफिस के काम और मनोरंजन तक, कई घंटे स्क्रीन के सामने बिताना आम बात हो गई है। लेकिन लगातार और लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों में कई परेशानियां हो सकती हैं। खासकर बिना ब्रेक के लंबे समय तक मोबाइल या लैपटॉप इस्तेमाल करने पर आंखों पर ज्यादा तनाव पड़ सकता है। 

हालांकि, स्क्रीन का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करना हर किसी के लिए संभव नहीं है, इसलिए कुछ आसान सावधानियां अपनाकर आंखों पर पड़ने वाले तनाव को कम किया जा सकता है। विश्व दृष्टि दिवस के मौके पर आइए जानते हैं कि स्क्रीन टाइम आंखों को कैसे प्रभावित करता है और आंखों की सेहत बनाए रखने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
 
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मोबाइल और लैपटॉप के ज्यादा इस्तेमाल से आंखों पर कितना असर? - फोटो : AI
मोबाइल और लैपटॉप से आंखों पर क्या असर पड़ता है?

लंबे समय तक मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर की स्क्रीन देखने से डिजिटल आंखों की थकान की समस्या हो सकती है। इसमें आंखों में थकान, सूखापन, जलन, पानी आना, धुंधला दिखाई देना और सिरदर्द जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं।

स्क्रीन को लगातार देखने के दौरान पलकें कम झपकाने की वजह से आंखों में सूखापन भी बढ़ सकता है। वहीं, लगातार एक ही दूरी पर स्क्रीन देखने से आंखों को फोकस करने में भी थकान महसूस हो सकती है।

 
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मोबाइल और लैपटॉप के ज्यादा इस्तेमाल से आंखों पर कितना असर? - फोटो : AI
आंखों की सेहत बचाने के आसान तरीके

1. 20-20-20 नियम अपनाएं

हर 20 मिनट में करीब 20 सेकंड के लिए स्क्रीन से नजर हटाकर लगभग 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखें। इससे आंखों को स्क्रीन से कुछ समय के लिए आराम देने में मदद मिल सकती है।

2. स्क्रीन से उचित दूरी रखें

मोबाइल को आंखों के बहुत पास रखकर देखने से बचें। लैपटॉप और कंप्यूटर की स्क्रीन को भी ऐसी दूरी पर रखें, जहां आपको पढ़ने के लिए आंखों पर ज्यादा जोर न डालना पड़े।
 

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मोबाइल और लैपटॉप के ज्यादा इस्तेमाल से आंखों पर कितना असर? - फोटो : AI

3. लगातार स्क्रीन न देखें

काम, पढ़ाई या मोबाइल इस्तेमाल करने के दौरान बीच-बीच में छोटे ब्रेक लेते रहें। कुछ देर स्क्रीन से नजर हटाकर आंखों को आराम देना फायदेमंद हो सकता है।

4. स्क्रीन की रोशनी सही रखें

बहुत ज्यादा तेज या बहुत कम रोशनी वाली स्क्रीन आंखों के लिए असहज हो सकती है। कमरे की रोशनी के अनुसार स्क्रीन की चमक को समायोजित करें और ऐसी जगह बैठकर काम करें जहां स्क्रीन पर अनावश्यक चमक या प्रतिबिंब न पड़ रहा हो।

 
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मोबाइल और लैपटॉप के ज्यादा इस्तेमाल से आंखों पर कितना असर? - फोटो : AI
5. पलकें नियमित रूप से झपकाएं

स्क्रीन देखते समय लोग अक्सर सामान्य से कम पलकें झपकाते हैं। इससे आंखों में सूखापन महसूस हो सकता है। इसलिए स्क्रीन का इस्तेमाल करते समय नियमित रूप से पलकें झपकाते रहें।

6. अंधेरे में मोबाइल देखने से बचें

पूरी तरह अंधेरे कमरे में तेज रोशनी वाली मोबाइल स्क्रीन देखने से आंखों पर असहजता बढ़ सकती है। इसलिए मोबाइल या लैपटॉप इस्तेमाल करते समय कमरे में पर्याप्त रोशनी रखें।

7. आंखों की समस्या को नजरअंदाज न करें

अगर लगातार धुंधला दिखाई दे, आंखों में दर्द या जलन रहे, बार-बार सिरदर्द हो या देखने में परेशानी महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में नेत्र विशेषज्ञ से आंखों की जांच करवाना बेहतर है।

 
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मोबाइल और लैपटॉप के ज्यादा इस्तेमाल से आंखों पर कितना असर? - फोटो : AI
क्या मोबाइल देखने से आंखों की रोशनी हमेशा कम हो जाती है?

स्क्रीन देखने से होने वाली आंखों की थकान और आंखों की स्थायी रोशनी कम होने को एक ही समस्या नहीं माना जाना चाहिए। लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों में अस्थायी थकान और दूसरी परेशानियां हो सकती हैं। हालांकि, अगर नजर में लगातार बदलाव महसूस हो रहा है या देखने में परेशानी हो रही है, तो इसके पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं। ऐसे में नेत्र विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।

इसलिए मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करने के बजाय स्क्रीन टाइम को संतुलित करना, नियमित ब्रेक लेना और आंखों को पर्याप्त आराम देना ज्यादा जरूरी है।

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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