सिज़ोफ्रेनिया एक मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है जिसके चलते लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित हो सकता है। इस गंभीर मानसिक बीमारी के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 24 मई को 'वर्ल्ड सिजोफ्रेनिया डे' मनाया जाता है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक सिज़ोफ्रेनिया के शिकार व्यक्ति को हमेशा भ्रम की स्थिति रहती है। मस्तिष्क में रसायनिक असंतुलन के कारण किसी भी व्यक्ति को किसी भी उम्र में सिजोफ्रेनिया की समस्या हो सकती है।
देश में कोरोना संक्रमण और ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों के बीच कई लोगों के मन में सवाल आ रहे हैं कि क्या यह भी सिज़ोफ्रेनिया के कारक हो सकते हैं? आइए इस मानसिक समस्या के बारे में विशेषज्ञ से जानते हैं।
विज्ञापन
2 of 6
कोरोनावायरस और मानसिक स्वास्थ्य
- फोटो : Social media
क्या कोरोना या ब्लैक फंगस बन सकता है कारण
अमर उजाला से बातचीत के दौरान मनोरोग विशेषज्ञ डॉ आशीष मित्तल बताते हैं कि कोरोना या ब्लैक फंगस प्रत्यक्ष रूप से सिज़ोफ्रेनिया का कारण नहीं हो सकता है। हालांकि कोरोना के समय में बढ़े तनाव के कारण लोगों में सिजोफ्रेनिया की समस्या बढ़ सकती है। यानी कि जिन लोगों के परिवार में किसी को इस तरह की दिक्कतें रह चुकी हों, उन लोगों में सिजोफ्रेनिया होने का डर रहता है। कोरोना या ब्लैक फंगस को प्रत्यक्ष रूप से इसका कारक नहीं माना जा सकता है।
विज्ञापन
3 of 6
अवसाद और सिज़ोफ्रेनिया में अंतर समझें
- फोटो : pixabay
अवसाद, चिंता और सिजोफ्रेनिया में अंतर को कैसे पहचानें?
डॉ आशीष कहते हैं कि लोगों के लिए इसमें अंतर कर पाना कठिन हो सकता है। अवसाद, चिंता में मरीज को पता होता है कि वह बीमार है लेकिन सिजोफ्रेनिया में रोगी को इस समस्या के बारे में पता ही नहीं होता है। रोगियों को लगता है कि सारी चीजें उनके साथ असामान्य रूप से घटित हो रही हैं। आसपास के लोग ही किसी व्यक्ति के लक्षणों को देखते हुए सिजोफ्रेनिया की पहचान कर सकते हैं।
4 of 6
भ्रम की स्थिती को पहचाने
- फोटो : Pexels
सामान्य लक्षण क्या होते हैं?
डॉ आशीष बताते हैं कि सिजोफ्रेनिया में लोगों को हमेशा भ्रम की स्थिती बनी रहती है। उन्हें आसपास से आवाजें आने का अनुभव होता है पर उन्हें नहीं पता होता कि यह दिक्कत बीमारी के कारण हो रही है। रोगी को शक होता है कि दूसरे लोग उनके बारे में बातें कर रहे हैं, लोग उसकी बारे में बुराई कर रहे हैं। इस स्थिति को 'इनसाइड अब्सेंट' के रूप में जाना जाता है। इसके अलावा कुछ रोगियों में यह समस्याएं भी हो सकती हैं।
चेहरे की अभिव्यक्ति की कमी
भावनात्मक अभिव्यक्ति की कमी
किसी चीज पर ध्यान देने में कठिनाई।
मनोविकृति जैसे भ्रम और मतिभ्रम की स्थिति।
व्यक्ति उन चीजों को देख, महसूस या सूंघने का अनुभव कर सकता है जो वास्तव में वहां होती ही नहीं हैं।
विज्ञापन
5 of 6
रासायनिक असंतुलन के कारण होती है यह दिक्कत
- फोटो : Social media
सिजोफ्रेनिया किन कारणों से हो सकता है?
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ आशीष के मुताबिक इसके कई कारक हो सकते हैं।
आनुवंशिक: यदि परिवार किसी को सिज़ोफ्रेनिया की दिक्कत रही हो तो अन्य लोगों को हो सकता है।
मस्तिष्क में रासायनिक असंतुलन
वातावरणीय कारक जैसे जन्म के समय आघात, विषाणु संक्रमण आदि।
कुछ प्रकार की दवाइयां भी इस समस्या को जन्म दे सकती हैं।
व्यक्ति के व्यवहार में असामान्यता पर रखें नजर
- फोटो : iStock
क्या करना चाहिए?
डॉ आशीष कहते हैं कि यदि आपको अपने आसपास किसी भी व्यक्ति के व्यवहार में असामान्यता दिखे, तो उसे डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए। कुछ प्रकार की दवाइयों से इसको ठीक किया जा सकता है, हालांकि सबसे जरूरी है कि लोगों में इस समस्या के लक्षणों की पहचान की जाए।
------ नोट: यह लेख एम्स के डॉ आशीष मित्तल (एमडी, मनोरोग) से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें तथा किसी भी दवा का सेवन बिना डॉक्टरी सलाह के न करें।