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Schizophrenia Day: सुनाई देती हैं अजीब आवाजें और लगा रहता है अनजाना डर? कहीं ये सिजोफ्रेनिया का संकेत तो नहीं

Sun, 24 May 2026 07:47 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Schizophrenia Kya Hai: सिजोफ्रेनिया एक गंभीर मानसिक बीमारी है, जो इंसान की सोच, भावनाओं, व्यवहार और वास्तविकता को समझने की क्षमता को प्रभावित करती है। यह बीमारी केवल मरीज तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पूरे परिवार और समाज पर गहरा असर डालती है।
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सिजोफ्रेनिया का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
मानसिक रोगों का खतरा दुनियाभर में तेजी से बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। स्ट्रेस-एंग्जाइटी, डिप्रेशन हो या फिर सिजोफ्रेनिया की समस्या ये सभी स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए लगातार गंभीर चिंता का कारण बनी हुई हैं। आज वर्ल्ड सिजोफ्रनिया डे है। इस गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्या के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाने, इससे जुड़ी आम भ्रांतियों को दूर करने और रोगियों में इसकी जल्द पहचान और इलाज को बढ़ावा देने के लिए ये मनाया जाता है।

सिजोफ्रेनिया एक गंभीर मानसिक बीमारी है, जो इंसान की सोच, भावनाओं, व्यवहार और वास्तविकता को समझने की क्षमता को प्रभावित करती है। इसका अब तक कोई पुख्ता इलाज नहीं है, लेकिन एंटीसाइकोटिक दवाओं और थेरेपी के माध्यम से इसका बहुत हद तक इलाज किया जा सकता है। समय पर इलाज मिलने से मरीजों के  लक्षणों को काबू में रखने और जीवन को आसान बनाने में मदद मिल सकती है।

सिजोफ्रेनिया रोग को लेकर लोगों में शर्म और कलंक देखा जाता रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इस रोग को लेकर फैली भ्रांतियों, कलंक को तभी दूर किया जा सकता है जब सभी लोग को इस रोग के बारे में सही जानकारी हो। आइए सिजोफ्रेनिया के बारे में जान लेते हैं। 
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सिजोफ्रेनिया में क्या होता है? - फोटो : Adobe Stock Photo
दुनियाभर में करोड़ों लोग सिजोफ्रेनिया का शिकार

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार दुनियाभर मेंलगभग 20 से 23 मिलियन (करीब 2.3 करोड़) लोग इस गंभीर बीमारी का शिकार हैं। यह दुनिया भर में विकलांगता का एक प्रमुख कारण है। यह बीमारी किसी व्यक्ति की वास्तविकता की समझ को गंभीर रूप से बदल देता है, जिससे अक्सर मतिभ्रम, भ्रम और अव्यवस्थित सोच जैसी दिक्कतें होती हैं।
 
  • समाज में सिजोफ्रेनिया को अक्सर लोग पागलपन समझ लिया जाता है जबकि यह एक मेडिकल और न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है। 
  • इस बीमारी में व्यक्ति ऐसी आवाजें सुन सकता है जो वास्तव में मौजूद ही नहीं होतीं।
  • मरीज अजीब व्यवहार कर सकता है या फिर सामाजिक रूप से खुद को अलग कर लेता है। 
  • कई बार मरीज अपनी भावनाएं व्यक्त करना बंद कर देता है और धीरे-धीरे सामान्य जीवन से कटने लगता है। 
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सिजोफ्रेनिया में क्या दिक्कतें होती हैं? - फोटो : Freepik.com
विशेषज्ञों के अनुसार आनुवंशिक कारण, मस्तिष्क के रसायनों में असंतुलन, तनाव, नशे की आदत और बचपन के मानसिक आघात सिजोफ्रेनिया रोग का बड़ा कारण हो सकते हैं। आइए इस समस्या के बारे में सबकुछ 10 प्वाइंट्स में समझते हैं।


1. सिजोफ्रेनिया के मरीजों में हैलिसिनेशन के कारण अक्सर ऐसी आवाजें सुनाई देती हैं जो वास्तव में मौजूद नहीं होतीं। कुछ लोगों को लगता है कि कोई उनका पीछा कर रहा है या उन्हें नुकसान पहुंचाना चाहता है।


2. सिजोफ्रेनिया से पीड़ित कई लोगों को यह पता नहीं होता कि उन्हें कोई मानसिक विकार है और हो सकता है कि उन्हें यह भी न लगे कि उन्हें इलाज की जरूरत है। सिजोफ्रेनिया से पीड़ित लोगों में आमतौर पर 30 साल की उम्र में इस बीमारी का पता चलता है। 


3. विशेषज्ञों के अनुसार सिजोफ्रेनिया का कोई एक कारण नहीं है। आनुवंशिकता, मस्तिष्क में कैमिकल इंबैलेंस, तनाव और नशे की आदत आपको इसका शिकार बना सकती है। यदि परिवार में किसी को पहले से ये बीमारी रही हो तो लोगों को और सावधान हो जाना चाहिए।

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सिजोफ्रेनिया की समस्या को जानिए - फोटो : Adobe Stock
4. अध्ययनों से पता चलता है कि मस्तिष्क में डोपामिन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर का असंतुलन आपकी सोच और व्यवहार को प्रभावित कर सकता है। बचपन का मानसिक आघात, घरेलू हिंसा और सामाजिक अलगाव भी इस बीमारी को ट्रिगर कर सकते हैं। 


5. गर्भावस्था और जन्म से जुड़ी कुछ समस्याएं जैसे कि जन्म से पहले या बाद में पर्याप्त पोषण न मिलना, जन्म के समय वजन कम होना या जन्म से पहले विषाक्त पदार्थों या वायरस के संपर्क में आना मस्तिष्क के विकास को प्रभावित कर सकता हैं। ऐसे लोगों में भी सिजोफ्रेनिया का जोखिम हो सकता है।


6. कई लोग समाज के डर और शर्म की वजह से इलाज नहीं करवाते। इससे धीरे-धीरे बीमारी की जटिलताएं बढ़ती जाती हैं। अध्ययनों के अनुसार मरीजों का लगातार अकेलापन उनमें डिप्रेशन और आत्महत्या के विचार वाले खतरे को बढ़ा सकता है। 


7. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार सिजोफ्रेनिया से पीड़ित लोगों में आत्महत्या का खतरा अधिक होता है। मरीज अक्सर अवसाद, सामाजिक अलगाव और मानसिक भ्रम के कारण निराशा महसूस कर सकता है। यदि कोई व्यक्ति बार-बार मरने की बातें करे, अचानक व्यवहार बदल दे या खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करे तो इसे गंभीर चेतावनी माना जाता है।
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सिजोफ्रेनिया के लक्षणों का हो सकता है इलाज - फोटो : Adobe Stock Photo
8. सिजोफ्रेनिया से वैसे तो पूरी तरह रोका या बचा नहीं जा सकता, लेकिन कुछ उपाय जोखिम कम करने में मदद कर सकते हैं। तनाव कम लेना, पर्याप्त नींद लेना, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। विशेषज्ञ नशे और शराब से दूरी बनाने की सलाह देते हैं। जिन लोगों के परिवार में मानसिक बीमारी का इतिहास हो उन्हें खास सावधानी बरतनी चाहिए।


9. सिजोफ्रेनिया का समय पर पता चल जाए तो इलाज के माध्यम से रोगी सामान्य जीवन जी सकता है। एंटीसाइकोटिक दवाइयां भ्रम और आवाजें सुनाई देने जैसी समस्याओं को कम करने में मदद करती हैं। इसके अलावा काउंसलिंग मरीज को अपनी सोच और व्यवहार समझने में मदद करती है। 


10. सिजोफ्रेनिया से पीड़ित लोगों को जीवन भर इलाज की जरूरत होती है। इसमें दवाएं, टॉक थेरेपी और रोजमर्रा की जिंदगी की गतिविधियों को संभालने का तरीका सीखने में मदद शामिल है। अगर आपके आसपास भी कोई इस बीमारी के लक्षणों वाला दिखे तो तुरंत उसे मनोचिकित्सक के पास ले जाएं।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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