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वर्ल्ड रोज डे 2019: जानें क्यों मनाया जाता है यह दिवस और कैंसर से है इसका क्या नाता?

Sun, 22 Sep 2019 12:14 PM IST
ललित फुलारा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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breast cancer - फोटो : pixabay
22 सितंबर, वर्ल्ड रोज डे के रूप में मनाया जाता है। इस दिवस को कैंसर पीड़ितों के मनोबल बढ़ाने और उनके अंदर फिर से जीने की उम्मीद जगाने की एक छोटी-सी कोशिश के तौर पर मनाया जाता है।
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breast cancer - फोटो : pixabay
वर्ल्ड रोज डे की शुरुआत 
यह दिन कनाडा में रहने वाली 12  वर्षीय मेलिन्डा रोज की याद में मनाया जाता है। मेलिन्डा रोज को  साल 1994 में महज 12 साल की उम्र में ही बल्ड कैंसर हो गया था। मेलिन्डा कैंसर से आखिरी जंग लड़ रही थी। डॉक्टर्स ने भी कह दिया था कि वह 2 सप्ताह से ज्यादा जी नहीं पाएगी। लेकिन छोटी-सी बच्ची ने हार नहीं मानी और डॉक्टर्स को गलत साबित कर दिखाया। 
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cancer
मेलिन्डा करीब 6 महीने तक जिंदा रही। लेकिन फिर सिंतबर के महीने में इस बच्ची ने सबका साथ छोड़ दिया और इस दुनिया को अलविदा कह दिया। यह बच्ची जिस तरह से 6 महीने तक अपनी बीमारी से लड़ती रहती। यह बात सभी कैंसर से पीड़ित लोगों के एक मिसाल बन गई। 

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breast cancer - फोटो : file photo
वल्ड कैंसर डे जो कि 4 फरवरी को मनाया जाता है। इस दिन कैंसर पीड़ित के सभी रिश्तेदार और दोस्त उनसे मिलने जाते हैं और उनकी परेशानियों को कुछ हद तक कम करने की कोशिश करते हैं। इसलिए इस दिन कैंसर से पीड़ित लोगों को गुलाब दिया जाता है और उन्हें जिंदगी से लड़ने की हिम्मत रखने का हौसला देने की कोशिश की जाती है। 
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गुलाब - फोटो : social media
इस दिन गुलाब देकर कैंसर पीड़ित को यह संदेश देने की कोशिश करते हैं कि कैंसर जिंदगी का अंत नहीं है। कैंसर से लड़ा जा सकता है और लड़कर जीत हासिल भी की जा सकती है। अक्सर लोग कैंसर का नाम सुनते ही हिम्मत खो बैठते हैं। उन्हें लगता है कि अब वह ज्यादा दिनों तक नहीं जी पाएंगे। गुलाब देकर उन्हें यह महसूस कराने की कोशिश की जाती है कि उनकी जिंदगी भी फिर से गुलाब जैसी ही महक और खिल सकती है। 
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