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Physiotherapy: लकवा से विकलांगता ही नहीं मानसिक स्वास्थ्य पर भी खतरा, फिजियोथेरेपी से दोनों में सुधार संभव

Mon, 08 Sep 2025 08:00 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • लकवा यानी पैरालिसिस आम लेकिन, जीवन के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाली दिक्कत है। हाल के वर्षों में युवाओं में भी इसके मामले बढ़ते हुए देखे गए हैं। 
  • डॉक्टर बताते हैं, फिजियोथेरेपी की मदद से लकवा के शिकार लाखों लोगों की सेहत में सुधार हो रहा है और धीरे-धीरे वह फिर से चलने-उठने में सफल भी हो रहे हैं।
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लकवा में फिजियोथेरेपी से आराम - फोटो : Freepik.com
आपने अपने आसपास के कई लोगों को लकवा का शिकार देखा होगा। लकवा यानी पैरालिसिस आम लेकिन, जीवन के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाली दिक्कत है। हाल के वर्षों में युवाओं में भी इसके मामले बढ़ते हुए देखे गए हैं।

लकवा तब होता है जब आप अपनी मांसपेशियों को अपनी इच्छा के अनुसार हिलाने में असमर्थ हो जाते हैं। तंत्रिका तंत्र की समस्याएं इसका प्रमुख कारण है। तंत्रिकाएं आपकी मांसपेशियों को संकेत भेजती हैं कि उन्हें किस तरह से काम करना है। यही संकेत आपकी मांसपेशियों को गति प्रदान करते हैं। आमतौर पर स्ट्रोक या स्पाइन कॉर्ड में किसी प्रकार की चोट के कारण ये संदेश बाधित हो जाता है।

उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, धूम्रपान-शराब का सेवन, मोटापा, मानसिक तनाव जैसी स्थितियां ब्रेन स्ट्रोक और लकवा के जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती हैं। 

शरीर के साथ मन पर भी असर

लकवा सिर्फ शरीर को ही नहीं, मन को भी प्रभावित करता है। इससे चलने-फिरने, बोलने और सोचने में भी परेशानी होती है। कई बार व्यक्ति दूसरों पर निर्भर हो जाता है जिसके चलते तनाव-अवसाद का शिकार हो सकता है। इसलिए समय पर इसके लक्षणों को पहचानना और इलाज प्राप्त करना बहुत जरूरी है।

आज विश्व फिजियोथेरेपी दिवस है। अमर उजाला से बातचीत में लखनऊ स्थित एक निजी अस्पताल में फिजियोथेरेपिस्ट डॉ जोहैब काजी बताते हैं, फिजियोथेरेपी की मदद से लकवा के शिकार लाखों लोगों की सेहत में सुधार हो रहा है और धीरे-धीरे वह फिर से चलने-उठने में सफल भी हो रहे हैं।
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लकवा और इसके कारण चलने में समस्या - फोटो : Freepik.com
लकवा के इलाज में फिजियोथेरेपी के प्रभावों को समझने से पहले पैरालिसिस की दिक्कत के बारे में जान लेते हैं।

लकवा और इसके कारण होने वाली दिक्कतें

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लकवा मारने का सबसे आम कारण स्ट्रोक को माना जाता है। स्ट्रोक की स्थिति में मस्तिष्क में खून का प्रवाह बाधित हो जाता है, जिससे शरीर के हिस्सों में सिग्नल पहुंचने की दिक्कत होती है। इसमें शरीर के एक तरफ का हिस्सा सुन्न हो सकता है। रीढ़ की हड्डी में चोट, ऑटोइम्यून बीमारी (जैसे मल्टीपल स्क्लेरोसिस), नर्व डैमेज या रक्त संचार की बीमारी के कारण भी ये समस्या हो सकती है। 

बुजुर्गों में स्ट्रोक का खतरा ज्यादा होता है, क्योंकि उनकी रक्त नलिकाएं कमजोर हो जाती हैं। हालांकि युवा भी इसका शिकार हो सकते हैं।
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चलने में समस्या - फोटो : Freepik.com
किन लोगों में लकवे का खतरा अधिक होता है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वैसे तो लकवा किसी को भी हो सकता है पर कुछ स्थितियां इसके जोखिमों को बढ़ा देती हैं। 
  • 55 वर्ष से ऊपर के लोगों में स्ट्रोक और लकवे का खतरा ज्यादा देखा जाता रहा है। इसके अलावा लगातार बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाकर मस्तिष्क में खून के प्रवाह को रोक सकता है, जिसके कारण भी आप लकवा का शिकार हो सकते हैं।
  • मोटापा-अधिक वजन, दिल और रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं, जिसके कारण भी आपको खतरा अधिक हो सकता है।

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पैरालिसिस के कारण हो सकती है विकलांगता - फोटो : Freepik.com
लकवा के कारण विकलांगता का खतरा

लकवा होने के बाद व्यक्ति का प्रभावित हिस्सा काम करना बंद कर देता है। इससे शरीर की सामान्य गतिविधियां जैसे चलना, उठने-बैठने, खाना बनाने, यहां तक कि बोलने और सोचने में भी परेशानी हो सकती है। विकलांगता की गंभीरता लकवे की जगह और प्रभाव पर निर्भर करती है।

शोध बताते हैं कि स्ट्रोक के बाद 30% लोगों में स्थायी विकलांगता देखी जाती है। इसलिए समय पर पहचान, इलाज और रिहैबिलिटेशन से इसके प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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फिजियोथेरेपी से दर्द में मिलता है आराम - फोटो : Adobe Stock
फिजियोथेरेपी इसमें विशेष मददगार हो सकती है। लकवाग्रस्त हिस्से की मांसपेशियों को मजबूत करने, संतुलन और चलने की क्षमता वापस पाने में इससे लाभ पाया जा सकता है।

फिजियोथेरेपी से लौट सकती हैं जिंदगी में रफ्तार

फिजियोथेरेपिस्ट डॉ जोहैब काजी बताते हैं, पैरालिसिस या स्ट्रोक के बाद होने वाली कमजोरी से पीड़ित लोगों के लिए फिजियोथेरेपी बहुत जरूरी उपचार है। लाखों लोग इसकी मदद से दोबारा जीवन के सामान्य काम आसानी से कर पा रहे हैं। 

इसमें रोगी की हालत देखकर व्यायाम, स्ट्रेचिंग, संतुलन अभ्यास और अन्य तकनीकों से इलाज किया जाता है। इसका उद्देश्य मांसपेशियों को सक्रिय करना, जोड़ों की गति बढ़ाना और दर्द कम करना होता है। लकवे के बाद शुरुआती दिनों में उपचार जितनी जल्दी शुरू किया जाए, उतनी जल्दी लाभ मिलता है।
 
  • नियमित स्ट्रेचिंग और मसाज से शरीर लचीला रहता है। जब रोगी दोबारा से चलने और सामान्य कामकाज को करने लगता है तो इससे  मानसिक स्वास्थ्य में भी सुधार होता है। 
  • लकवा के बाद समय रहते फिजियोथेरेपी शुरू करने से मांसपेशियों की ताकत और शरीर की गतिविधि में 30–50% तक सुधार हो सकता है।



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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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