फिजियोथेरेपी से दर्द में मिलता है आराम
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फिजियोथेरेपी इसमें विशेष मददगार हो सकती है। लकवाग्रस्त हिस्से की मांसपेशियों को मजबूत करने, संतुलन और चलने की क्षमता वापस पाने में इससे लाभ पाया जा सकता है।
फिजियोथेरेपी से लौट सकती हैं जिंदगी में रफ्तार
फिजियोथेरेपिस्ट डॉ जोहैब काजी बताते हैं, पैरालिसिस या स्ट्रोक के बाद होने वाली कमजोरी से पीड़ित लोगों के लिए फिजियोथेरेपी बहुत जरूरी उपचार है। लाखों लोग इसकी मदद से दोबारा जीवन के सामान्य काम आसानी से कर पा रहे हैं।
इसमें रोगी की हालत देखकर व्यायाम, स्ट्रेचिंग, संतुलन अभ्यास और अन्य तकनीकों से इलाज किया जाता है। इसका उद्देश्य मांसपेशियों को सक्रिय करना, जोड़ों की गति बढ़ाना और दर्द कम करना होता है। लकवे के बाद शुरुआती दिनों में उपचार जितनी जल्दी शुरू किया जाए, उतनी जल्दी लाभ मिलता है।
- नियमित स्ट्रेचिंग और मसाज से शरीर लचीला रहता है। जब रोगी दोबारा से चलने और सामान्य कामकाज को करने लगता है तो इससे मानसिक स्वास्थ्य में भी सुधार होता है।
- लकवा के बाद समय रहते फिजियोथेरेपी शुरू करने से मांसपेशियों की ताकत और शरीर की गतिविधि में 30–50% तक सुधार हो सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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