World Organ Donation Day 2026: अंगदान को सबसे बड़ा दान माना जाता है। ऐसे में इस दिन का महत्व लोगों को समझाने के लिए हर साल विश्व अंगदान दिवस मनाया जाता है। यहां हम इस लेख में हम आपको बताएंगे इस दिन का महत्व और इतिहास।
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कब और क्यों मनाया जाता है विश्व अंगदान दिवस?
- फोटो : AI
World Organ Donation Day 2026: अंगदान को मानवता के सबसे बड़े कार्यों में से एक माना जाता है। किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके स्वस्थ अंग किसी जरूरतमंद मरीज के जीवन को नई उम्मीद दे सकते हैं। किडनी, लिवर, हृदय, फेफड़े और आंखों जैसे अंगों का प्रत्यारोपण गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकता है।
WHO के अनुसार, कई गंभीर और जानलेवा बीमारियों में अंग प्रत्यारोपण जीवन बचाने का सबसे प्रभावी या कई बार एकमात्र उपचार हो सकता है। इसी क्रम में भारत में भी अंगदान और प्रत्यारोपण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत लगातार महसूस की जाती है। ऐसे में जानते हैं इस दिन का महत्व, इतिहास और अंगदान से जुड़ी जरूरी बातें।
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विश्व अंगदान दिवस कब है?
विश्व अंगदान दिवस 2026 इस साल 13 अगस्त, गुरुवार को मनाया जाएगा। इस मौके पर अंगदान के महत्व, प्रत्यारोपण की जरूरत और लोगों को डोनर बनने के लिए प्रोत्साहित करने से जुड़े जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं।
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विश्व अंगदान दिवस का महत्व
अंगदान का सबसे बड़ा महत्व यह है कि इससे गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को जीवन का दूसरा मौका मिल सकता है। कई मरीज अंग प्रत्यारोपण के इंतजार में रहते हैं और समय पर उपयुक्त अंग उपलब्ध होना उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। WHO के मुताबिक अंग प्रत्यारोपण की जरूरत पूरी दुनिया में बढ़ रही है, लेकिन कई देशों में दान और प्रत्यारोपण से जुड़ी सुविधाओं, जागरूकता और उपलब्धता में बड़ी चुनौतियां हैं।
इस दिन लोगों को यह समझाने का प्रयास किया जाता है कि अंगदान केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी और मानवता की मिसाल भी हो सकता है।
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कब हुआ था पहला ऑर्गन ट्रांसप्लांट
ऑर्गन ट्रांसप्लांट की शुरुआत 20वीं सदी में तेजी से हुई चिकित्सा प्रगति के साथ मानी जाती है। साल 1954 में डॉ. जोसेफ मरे ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए जीवित डोनर रोनाल्ड ली हेरिक की किडनी उनके जुड़वां भाई रिचर्ड हेरिक में सफलतापूर्वक ट्रांसप्लांट की थी। यह दुनिया का पहला सफल जीवित डोनर किडनी ट्रांसप्लांट माना जाता है। इस सफलता ने मेडिकल साइंस में एक नए युग की शुरुआत की। इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने यह साबित किया कि अंगदान के जरिए गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को जीवन की नई उम्मीद दी जा सकती है।
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अंगदान से कौन-कौन से अंग काम आ सकते हैं?
मृत्यु के बाद चिकित्सकीय जांच और लागू नियमों के अनुसार कई अंगों और ऊतकों का प्रत्यारोपण किया जा सकता है। इनमें किडनी, लिवर, हृदय और फेफड़े जैसे महत्वपूर्ण अंग शामिल हैं। इसके अलावा आंखों के कॉर्निया और कुछ अन्य ऊतकों का भी उपयोग जरूरतमंद मरीजों के उपचार में किया जा सकता है।हालांकि, कौन-सा अंग दान किया जा सकता है, यह व्यक्ति की मेडिकल स्थिति, मृत्यु की परिस्थितियों और चिकित्सकीय मूल्यांकन पर निर्भर करता है।
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अंगदान को लेकर जागरूकता क्यों जरूरी?
अंगदान को लेकर समाज में कई तरह की गलतफहमियां और संकोच देखने को मिलते हैं। जानकारी की कमी के कारण कई लोग डोनर बनने के बारे में फैसला नहीं कर पाते। ऐसे में जागरूकता अभियान लोगों को सही जानकारी देने और परिवार के साथ अंगदान की इच्छा पर बातचीत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। WHO भी अंगदान और प्रत्यारोपण के क्षेत्र में सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर जोर देता है।
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अंगदान का संकल्प कैसे लें?
अगर कोई व्यक्ति अंगदान करना चाहता है तो उसे अपने देश में उपलब्ध आधिकारिक व्यवस्था और मान्यता प्राप्त संस्थाओं के माध्यम से पंजीकरण या प्रतिज्ञा की प्रक्रिया की जानकारी लेनी चाहिए। साथ ही अपने परिवार को भी अपनी इच्छा के बारे में बताना महत्वपूर्ण है, ताकि जरूरत पड़ने पर परिवार को व्यक्ति की इच्छा की जानकारी हो।
ध्यान रखें इसे
हमेशा याद रखें कि अंगदान से जुड़े नियम, पात्रता और प्रक्रिया देश तथा परिस्थिति के अनुसार अलग हो सकती है। अंगदान का निर्णय लेने से पहले संबंधित आधिकारिक स्वास्थ्य संस्था या चिकित्सकीय विशेषज्ञ से प्रमाणित जानकारी जरूर लें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।