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World Organ Donation Day: यहां जानें अंगदान से जुड़े 4 बड़े सवालों के जवाब, इन मिथकों पर अब न करें भरोसा

Thu, 13 Aug 2026 10:01 AM IST
Shruti Gaur हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

World Organ Donation Day 2026: अंगदान से जुड़ी कई मिथ्या को लोग आज भी सच मान लेते हैं। आज हम आपसे ऐसी की कुछ गलत अफवाहों के बारे में बात करेंगे, ताकि आप उनकी सच्चाई जान सकें। 
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यहां जानें अंगदान से जुड़े 4 बड़े सवालों के जवाब - फोटो : AI
World Organ Donation Day 2026: हर साल 13 अगस्त को विश्व अंगदान दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को अंगदान के महत्व के बारे में जागरूक करना और इससे जुड़े भ्रम व मिथकों को दूर करना है। भारत में अंग प्रत्यारोपण की जरूरत और उपलब्ध अंगों के बीच अभी भी बड़ा अंतर है। ऐसे में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है।

अंगदान को लेकर आज भी लोगों के मन में कई तरह की गलत धारणाएं मौजूद हैं, जिन्हें सोच सही मानते हैं। जबकि ये धारणाएं पूरी तरह सही नहीं हैं। भारत में अंगदान की प्रक्रिया निर्धारित चिकित्सा और कानूनी नियमों के तहत होती है। इसलिए आइए जानते हैं इससे जुड़ी कुछ अफवाहें और उनकी सच्चाई...

 
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यहां जानें अंगदान से जुड़े 4 बड़े सवालों के जवाब - फोटो : AI
मिथक 1: उम्र ज्यादा है तो अंगदान नहीं किया जा सकता।

सच्चाई: केवल उम्र के आधार पर किसी व्यक्ति को स्वतः अंगदान से बाहर नहीं किया जाता। कौन-सा अंग प्रत्यारोपण के योग्य है, इसका फैसला चिकित्सा विशेषज्ञ व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और अंग की गुणवत्ता देखकर करते हैं।

 
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यहां जानें अंगदान से जुड़े 4 बड़े सवालों के जवाब - फोटो : AI
मिथक 2: डायबिटीज या किसी पुरानी बीमारी वाले व्यक्ति अंगदान नहीं कर सकते।

सच्चाई: डायबिटीज या कुछ अन्य बीमारियां अपने-आप में हर प्रकार के अंगदान पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगातीं। अंतिम निर्णय मेडिकल टीम करती है कि कौन-से अंग या ऊतक उपयोग के योग्य हैं।

 

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यहां जानें अंगदान से जुड़े 4 बड़े सवालों के जवाब - फोटो : AI
मिथक 3: अंगदान के बाद शरीर के साथ अंतिम संस्कार नहीं किया जा सकता।

सच्चाई: अंग और ऊतक निकालने की प्रक्रिया चिकित्सकीय तरीके से की जाती है और शरीर को सम्मानपूर्वक परिवार को सौंपा जाता है। अंगदान के कारण अंतिम संस्कार की प्रक्रिया खत्म नहीं होती।

 
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मिथक 4: अंगदान का संकल्प लेने के बाद परिवार की कोई भूमिका नहीं होती।

सच्चाई: भारत में व्यक्ति द्वारा अपील करने के बावजूद मृत्यु के बाद परिवार/कानूनी निकट संबंधी की सहमति की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इसलिए परिवार से पहले ही अपनी इच्छा के बारे में बात करना जरूरी है।

 
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अंगदान सिर्फ एक फैसला नहीं, बल्कि किसी जरूरतमंद व्यक्ति को जीवन की नई उम्मीद देने का माध्यम हो सकता है। इसलिए किसी अफवाह पर भरोसा करने के बजाय सही जानकारी हासिल करना और अपने परिवार के साथ इस विषय पर खुलकर बात करना बेहद जरूरी है।

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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