फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Depression In Men: 'मजबूत' दिखने के दबाव में पुरुष कैसे छुपाते हैं अपने डिप्रेशन के लक्षण? विशेषज्ञ से जानें

Fri, 10 Oct 2025 11:59 AM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हमारे समाज में एक बहुत पुरानी धारणा है कि 'मर्द को दर्द नहीं होता है'। यही वजह है कि बहुत से पुरुष अपनी समस्याओं को कहने से बचते हैं, और कई बार ये डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं कि ये पुरुष डिप्रेशन लक्षण कैसे छुपाते हैं।
विज्ञापन
1 of 8
डिप्रेशन के लक्षण - फोटो : Amar Ujala
Male Depression Symptoms: विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस हर साल 10 अक्तूबर को मनाया जाता है, इस दिन को मनाने का उद्देश्य लोगों के बीच में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों के बारे में लोगों को जागरूक करना है। समाज में पुरुषों को अक्सर एक ऐसे 'मजबूत' स्तंभ के रूप में देखा जाता है जो हर मुश्किल का सामना बिना किसी भावना को प्रकट किए कर सकता है। इसी सोच के चलते जब वे मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का शिकार होते हैं, तो वे अपनी भावनाओं और लक्षणों को छिपाने की कोशिश करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह छिपाना उनके लिए और भी खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इससे समस्या की गंभीरता बढ़ती जाती है और सही समय पर इलाज मिलना मुश्किल हो जाता है।

पुरुषों के लिए डिप्रेशन के लक्षणों को पहचानना इसलिए भी मुश्किल होता है क्योंकि उनके लक्षण महिलाओं से अलग दिख सकते हैं। वे अक्सर अपनी उदासी को गुस्सा, चिड़चिड़ापन, या अत्यधिक थकान के रूप में व्यक्त करते हैं। इसके अलावा सामाजिक दबाव और खुद को कमजोर न दिखाने की प्रवृत्ति उन्हें मदद मांगने से रोकती है।

इसी बारे हमने और अधिक जानकारी के लिए गुड़गांव के निजी अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. आशीष मित्तल से बात की। उन्होंने बताया कि पुरुष अक्सर अपनी भावनाओं को अंदर ही दबा लेते हैं, जिससे उनकी शारीरिक और मानसिक सेहत पर बुरा असर पड़ता है। सामान्य तौर पर उनमें कुछ लक्षण दिखते हैं जिसके बारे में आपको भी जानना चाहिए।
विज्ञापन

2 of 8
नींद नहीं आना - फोटो : Adobe Stock
इंसोम्निया और नशे की लत
डॉ. मित्तल के अनुसार डिप्रेशन से जूझ रहे लोगों में सबसे आम समस्याओं में से एक है अनिद्रा (इंसोम्निया)। उन्हें रात में सोने में बहुत दिक्कत होती है, जिससे उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती। नींद की कमी से डिप्रेशन के लक्षण और भी गंभीर हो सकते हैं।

इसके अलावा ऐसे लोग अपनी भावनाओं से बचने के लिए अक्सर शराब या सिगरेट जैसे नशे की लत में पड़ जाते हैं। यह उन्हें कुछ समय के लिए राहत तो दे सकता है, लेकिन लंबी अवधि में यह उनकी समस्या को और बढ़ा देता है और उनके स्वास्थ्य को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाता है।

ये भी पढ़ें- Eye Problems: बच्चों के आंखों की रोशनी बचाना है तो अनदेखा न करें ये शुरुआती लक्षण, सभी माता-पिता दें ध्यान
विज्ञापन

3 of 8
Office - फोटो : Freepik
वर्क प्लेस पर प्रदर्शन में गिरावट
जब कोई व्यक्ति डिप्रेशन में होता है तो इसका असर उसके काम पर भी पड़ता है। डॉ. मित्तल बताते हैं कि डिप्रेशन के कारण व्यक्ति की ध्यान केंद्रित करने की क्षमता (अटेंशन स्पैन) खराब होने लगती है, जिससे वे अपने काम पर ठीक से ध्यान नहीं दे पाते।

इस वजह से उनका प्रदर्शन प्रभावित होता है और वे कार्यस्थल पर अपने लक्ष्य पूरे नहीं कर पाते। यह उनके आत्मविश्वास को और भी कम कर सकता है और उन्हें एक निराशा के साइकिल में फंसा सकता है।

ये भी पढ़ें- Cough Syrup: शहद-अदरक वाले कफ सिरप कितने सुरक्षित, क्या इनका कर सकते हैं इस्तेमाल? विशेषज्ञ से जानिए

4 of 8
उदासी की समस्या - फोटो : Freepik.com
छिपी हुई उदासी और भविष्य का डर
डॉ. मित्तल बताते हैं कि अगर आप किसी व्यक्ति से लंबे समय तक बात करते हैं, तो आप यह समझ सकते हैं कि वह डिप्रेशन में है। ऐसे लोग अक्सर अपनी पिछली गलतियों पर पछतावा करते हैं और अपने भविष्य को लेकर डरे रहते हैं।

वे बार-बार पुरानी घटनाओं का जिक्र करते हैं और यह महसूस करते हैं कि वे असफल हो गए हैं। कुछ गंभीर मामलों में यह निराशा इतनी बढ़ जाती है कि व्यक्ति खुद को नुकसान पहुंचाने या आत्महत्या करने के बारे में भी सोचने लगता है। यह एक बहुत ही गंभीर लक्षण है, जिसे तुरंत पहचानना और उस पर ध्यान देना जरूरी है।
विज्ञापन

5 of 8
ऑफिस कलीग को कैसे पहचानें? - फोटो : Freepik.com
ऑफिस कलीग को कैसे पहचानें?
अक्सर लोगों के मन में सवाल होता है कि अगर हमारा ऑफिस कलीग डिप्रेशन में हो तो उसे कैसे पहचानेंगे? डॉ. आशीष मित्तल के अनुसार अगर आप किसी व्यक्ति से महीने में एक या दो बार मिलते हैं तो वह आसानी से अपने डिप्रेशन के लक्षणों को छिपा सकता है। लेकिन अगर आप उनके साथ थोड़ा समय बिताते हैं तो लक्षणों को छिपाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे लोगों को कुछ खास तरीकों से पहचाना जा सकता है।
विज्ञापन

6 of 8
दफ्तर - फोटो : Adobe Stock
बनावटी मुस्कान, सामाजिक दूरी और काम में बदलाव
डॉ. मित्तल बताते हैं कि डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्ति अक्सर अपने कार्यस्थल पर बनावटी हंसी हंसते हैं। वे ऐसा इसलिए करते हैं ताकि दूसरों को दिखा सकें कि वे मजबूत हैं और सब कुछ ठीक है। उनकी यह 'आर्टिफिशियल लाफिंग' वास्तव में उनके डिप्रेशन को छिपाने का एक तरीका है। इसके अलावा वे धीरे-धीरे अपने सामाजिक दायरे से दूरी बनाने लगते हैं और कम लोगों से बात करते हैं। वे पहले की तुलना में ऑफिस की गतिविधियों में भी कम हिस्सा लेते हैं।

इसके साथ ही ऐसा भी देखा गया है कि जो लोग अपने काम को पहले आराम से कर लेते थे, अब उन्हें वही काम करने में काफी कठिनाई होती है, और वे अपने काम से खुश भी नहीं रहते। ऐसी स्थिति में कई लोग अपनी नौकरी छोड़ने का मन बना लेते हैं, यह सोचकर कि कुछ समय आराम करने से वे ठीक हो जाएंगे और फिर से काम शुरू कर पाएंगे।
 
विज्ञापन

7 of 8
स्ट्रेस की समस्या - फोटो : freepik.com
नौकरी छोड़ने की बजाय डॉक्टर से सलाह लें
डॉ. मित्तल सलाह देते हैं कि ऐसी परिस्थिति में व्यक्ति को तुरंत नौकरी नहीं छोड़नी चाहिए। इसके बजाय उन्हें डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और इलाज के साथ-साथ कुछ दिनों की छुट्टी लेनी चाहिए। डॉ. मित्तल के अनुसार अधिकांश लोग सही इलाज के बाद ठीक हो जाते हैं और अपनी पुरानी नौकरी फिर से शुरू कर लेते हैं। ठीक होने के बाद आप अपनी नौकरी जारी रखने, बदलने या कोई और निर्णय लेने के बारे में सोच सकते हैं।
विज्ञापन

8 of 8
बायपोलर डिसऑर्डर - फोटो : Freepik.com
ऐसे में क्या करें?
पुरुषों में डिप्रेशन को पहचानना और उसका इलाज कराना बहुत जरूरी है। अगर आपको अपने या किसी जानने वाले व्यक्ति में ऐसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो उन्हें मदद के लिए प्रोत्साहित करें। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।

यह समझना जरूरी है कि मानसिक बीमारी का इलाज संभव है और सही समय पर मदद लेकर व्यक्ति एक स्वस्थ और खुशहाल जीवन जी सकता है। मानसिक स्वास्थ्य के बारे में खुलकर बात करने से ही इस सामाजिक कलंक को दूर किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में मरीज को किसी साइकायट्रिस्ट या काउंसलर से जरूर मिलना चाहिए।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें