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World Mental Health Day 2024: डिप्रेशन की कैसे करें पहचान? मनोचिकित्सक ने दी सारी जानकारी

Thu, 10 Oct 2024 11:25 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2024 - फोटो : Freepik.com
मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं वैश्विक स्तर पर गंभीर चिंताओं में से एक हैं। साल 2019 के आंकड़ों के अनुसार हर आठ में से एक व्यक्ति या दुनियाभर में 970 मिलियन (97 करोड़) से अधिक लोग मानसिक विकार, चिंता और अवसाद के शिकार थे। कोविड-19 महामारी के दौरान उत्पन्न नकारात्मक परिस्थितियों ने इस खतरे को और भी बढ़ा दिया है। स्ट्रेस-एंग्जाइटी और डिप्रेशन जैसी समस्याएं साल-दर-साल बढ़ती जा रही हैं।

मानसिक स्वास्थ्य को लेकर लोगों को शिक्षित और जागरूक करने के साथ सामाजिक कलंक की भावना दूर के लिए हर साल 10 अक्तूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (World Mental Health Day) मनाया जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मेंटल हेल्थ का ध्यान रखना उसी तरह जरूरी है जैसा कि आप शरीर का ध्यान रखते हैं। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य एक दूसरे पर निर्भर हैं, दोनों में से एक में भी होने वाली समस्या संपूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है।

मेंटल हेल्थ के संदर्भ में डिप्रेशन (अवसाद) काफी चर्चित शब्द रहा है। पर क्या आप जानते हैं कि डिप्रेशन होता क्या है, इसकी पहचान कैसे की जा सकती है और यदि किसी को डिप्रेशन हो जाए तो क्या करना चाहिए?
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डिप्रेशन हो सकता है गंभीर - फोटो : freepik.com
बढ़ रहे हैं डिप्रेशन के मामले

आंकड़े बताते हैं कि अवसाद दुनियाभर में मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित प्रमुख विकार है। हर तीन में से एक महिला और पांच में से एक पुरुष को डिप्रेशन का शिकार पाया जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, डिप्रेशन मूड से संबंधित विकार है जिसके कारण व्यक्ति को लगातार उदासी और किसी काम में मन न लगने जैसी दिक्कत हो सकती है। यह आपके महसूस करने, सोचने और व्यवहार करने के तरीके को भी नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती है। दुनियाभर में बढ़ती आत्महत्याओं के लिए भी डिप्रेशन को प्रमुख कारण माना जाता है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ डिप्रेशन को गंभीर स्थिति बताते हैं, जिसमें समय रहते इलाज की आवश्यकता होती है। इलाज न होने पर कई तरह की शारीरिक स्वास्थ्य समस्याओं और यहां तक कि आत्मघाती विचार आने का भी खतरा हो सकता है।
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मानसिक स्वास्थ्य की समस्या - फोटो : freepik.com
डिप्रेशन होता क्या है?

अमर उजाला से बातचीत में भोपाल स्थित वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ सत्यकांत त्रिवेदी बताते हैं, जीवन की कठिन परिस्थितियों जैसे कि नौकरी छूट जाने या तलाक, पारिवारिक समस्याओं को लेकर दुखी होना सामान्य बात है, हालांकि ये डिप्रेशन नहीं है। अवसाद कई मायनों में अलग होता है, यह कुछ सप्ताह से लेकर कई महीनों तक रह सकता है।

डिप्रेशन किसी को भी हो सकता है चाहे वह बच्चा हो या वयस्क। अगर डिप्रेशन की समय पर पहचान या इलाज न हो पाए तो इसके कारण हार्ट अटैक-स्ट्रोक जैसी जानलेवा समस्याओं का भी खतरा बढ़ जाता है।

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डिप्रेशन के लक्षण - फोटो : Freepik.com
कैसे जानें कि किसी को डिप्रेशन है?

डॉक्टर बताते हैं, अवसाद के लक्षण हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं। सामान्य तौर पर इसमें व्यक्ति बहुत दुखी-निराश या चिंतित महसूस करता है। आपको उन चीजों से भी चिड़चिड़ापन हो सकता है जो पहले खुशी देती थीं। डिप्रेशन में लोग जल्दी चिढ़ने या गुस्सा होने लगते हैं। ये नींद को भी प्रभावित करती है, जिसके कारण या तो नींद नहीं आती या फिर बार-बार टूट जाती है।

ऊर्जा की कमी या थकान होना, ध्यान केंद्रित करने, निर्णय लेने या चीजों को याद रखने में कठिनाई होना भी डिप्रेशन का संकेत हो सकता है। गंभीर स्थितियों में खुद को नुकसान पहुंचाने या आत्महत्या के विचार भी आ सकते हैं।
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डिप्रेशन में क्या करें? - फोटो : Adobe stock
किसी को डिप्रेशन हो जाए तो क्या करें?

डॉ सत्यकांत बताते हैं, मस्तिष्क में कुछ रसायनों जैसे सेरोटोनिन और डोपामाइन के असंतुलन के कारण अवसाद होता है। कुछ प्रकार के ट्रॉमा भी इसकी वजह हो सकते हैं, इसलिए इसका समय पर सही इलाज जरूरी है।

डिप्रेशन की स्थिति में आस-पास के लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अगर आपको किसी दोस्त या परिजन में डिप्रेशन के लक्षण नजर आते हैं तो उन्हें तुरंत किसी मनोचिकित्सक के पास ले जाएं। दवाओं और थेरेपी के माध्यम से इसे ठीक किया जा सकता है। इस विकार की पहचान और इलाज जितनी जल्दी हो जाए, गंभीर समस्याओं से बचना उतना ही आसान हो सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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