नवजात बच्चों में मलेरिया के मामले
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क्या कहते हैं डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक?
डब्ल्यूएचओ के डायरेक्टर-जनरल डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने कहा, सदियों से मलेरिया लाखों नवजात शिशुओं का जान ले रहा है। लेकिन अब कहानी बदल रही है। नए टीके, डायग्नोस्टिक टेस्ट, मच्छरदानी के इस्तेमाल को लेकर जागरूकता और असरदार दवाएं, इस बीमारी के खिलाफ लड़ाई का रुख मोड़ने में मदद कर रही हैं।
हमारे जीवनकाल में मलेरिया को खत्म करना अब सिर्फ एक सपना नहीं रहा, लेकिन इसके लिए लगातार राजनीतिक और आर्थिक प्रतिबद्धता की जरूरत होगी। अब हम ऐसा कर सकते हैं और हमें ऐसा करना ही होगा।
तीन नए रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट को भी मंजूरी
इससे पहले 14 अप्रैल 2026 को डब्ल्यूएचओ ने मलेरिया के निदान में आ रही नई चुनौतियों से निपटने के लिए डिजाइन किए गए तीन नए रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (आरडीटी) को भी प्री-क्वालीफाई किया।
46 देशों में हुई स्टडी और सर्वे के आधार पर विशेषज्ञों ने पाया कि अब तक मलेरिया के लिए किए जाने वाले सबसे आम आरडीटी से भी बीमारी की पहचान नहीं हो पा रही है क्योंकि नए स्ट्रेन्स में वे खास जीन नहीं हैं जिसकी टेस्ट में पहचान की जाती थी। ये नए टेस्ट इस समस्या का समाधान करते हैं। बताया जा रहा है कि नए आरडीटी भरोसेमंद हैं और गुणवत्ता-सुनिश्चित करते हैं।