फेफड़ों की बीमारियां
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फेफड़ों की ‘बिग फाइव’ बीमारियां
इंटरनेशनल रेस्पिरेटरी सोसाइटीज ने फेफड़ों की पांच ऐसी बड़ी बीमारियों के बारे में बताया है, जो दुनियाभर में फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों और मौत का सबसे बड़ा कारण मानी जाती हैं। इन्हें ‘बिग फाइव’ यानी फेफड़ों की पांच प्रमुख बीमारियां कहा जाता है।
अस्थमा
- अस्थमा फेफड़ों की क्रॉनिक बीमारी है, जिसमें सांस की नलियों में सूजन और संकुचन के कारण होती है, इससे सांस लेने में परेशानी हो सकती है। दुनिया में 35 करोड़ से ज्यादा लोग इससे प्रभावित हैं। यह बीमारी बच्चों में भी तेजी से बढ़ रही है।
क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज यानी सीओपीडी
- सीओपीडी फेफड़ों की एक धीरे-धीरे बढ़ने वाली बीमारी है। इसमें सांस की नलियों में रुकावट पैदा होती है और हवा का अंदर-बाहर जाना मुश्किल हो जाता है। इसके कारण लगातार सांस फूलने और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। यह दुनिया में मौत का तीसरा सबसे बड़ा कारण है और हर साल 30 लाख से ज्यादा लोगों की मौत इससे होती है।
सांस की नली और फेफड़ों में होने वाले संक्रमण
- इनमें निमोनिया जैसी बीमारियां शामिल हैं। निमोनिया में फेफड़ों में संक्रमण हो जाता है और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। अकेले निमोनिया से हर साल 24 लाख से ज्यादा लोगों की मौत होती है। इसका असर खास तौर पर छोटे बच्चों और बुजुर्गों पर ज्यादा पड़ता है।
फेफड़ों का कैंसर
- फेफड़ों का कैंसर दुनिया में सबसे आम कैंसर में शामिल है और कैंसर से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण है। इससे हर साल करीब 18 लाख लोगों की जान जाती है।
ट्यूबरकुलोसिस
- ट्यूबरकुलोसि यानी टीबी हवा के जरिए फैलने वाला एक गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण है। माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नाम के बैक्टीरिया फेफड़ों को प्रभावित करते हैं। हर साल 1 करोड़ से ज्यादा लोग टीबी की चपेट में आते हैं, जबकि करीब 14 लाख लोगों की मौत हो जाती है।