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फेफड़ा दिवस: फेफड़ों को धीरे-धीरे खोखला कर रही हैं आपकी रोज की ये आदतें, बस सिगरेट छोड़ने से नहीं चलेगा काम

Fri, 25 Sep 2026 01:24 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

world lung day 2026: तंबाकू का धुआं फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने वाले प्रमुख कारणों में से एक है। इसके अलावा सेकेंड हैंड स्मोक और प्रदूषित हवा का लंबे समय तक संपर्क भी जोखिम बढ़ा सकता है। लंबे समय तक निष्क्रिय रहना भी स्वस्थ जीवनशैली के लिए नुकसानदायक है। इसलिए लंग्स को हेल्दी रखने के लिए पूरी दिनचर्या में सुधार करें।
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फेफड़ों की बीमारियां - फोटो : Amarujala.com/AI
हृदय रोग और कैंसर को दुनियाभर में मौत के सबसे बड़े कारणों में से एक माना जाता है, पर क्या आप जानते हैं कि फेफड़ों की बीमारियां भी इसी तरह से गंभीर स्वास्थ्य जोखिम मानी जाती रही हैं।

यूरोपियन लंग्स फाउंडेशन की रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में होने वाली कुल मौतों में से लगभग हर छठी मौत फेफड़ों की बीमारियों के कारण होती है, जो स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती है। समस्या ये है कि ये बीमारियां सिर्फ बुजुर्गों को ही नहीं, बल्कि कम उम्र के लोगों को भी अपना शिकार बनाती जा रही हैं।

फेफड़ों की सेहत के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने और अस्थमा-सीओपीडी, टीबी और निमोनिया जैसी श्वसन संबंधी बीमारियों के बारे में अलर्ट करने के उद्देश्य से हर साल 25 सितंबर को वर्ल्ड लंग्स डे मनाया जाता है। अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया कि क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) किस तरह से लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ाती जा रही है।

वर्ल्ड लंग्स डे पर आइए उन आदतों के बारे में जान लेते हैं जो धीरे-धीरे हमारे फेफड़ों को डैमेज कर रही होती हैं। फेफड़ों की सेहत के लिए सिगरेट तो सबसे खतरनाक है ही, पर सिर्फ सिगरेट ही आपका दुश्मन नहीं है। लंग्स को हेल्दी रखने के लिए हमें कई और आदतों में सुधार की जरूरत होती है।
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फेफड़ों की बढ़ती बीमारियां - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

अमर उजाला से बातचीत में पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ गौरव चतुर्वेदी बताते हैं, हमारे फेफड़े दिन-रात बिना रुके काम करते हैं, लेकिन हम अक्सर उनकी सेहत पर तब ध्यान देते हैं जब सांस लेने में परेशानी शुरू हो जाती है। इसी अंग की मदद से हमे निरंतर प्राणवायु मिलती रहती है, ऐसे में फेफड़ों में होने वाली कोई भी गड़बड़ी गंभीर और जानलेवा समस्याओं का कारण बन सकती है।
 
  • फेफड़ों का डैमेज हमेशा अचानक नहीं होता। कई बार हमारी आदतें और परिस्थितियां लंबे समय में सांस लेने की क्षमता पर असर डालती रहती हैं, जिसका अंदाजा भी नहीं होता।
  • धूम्रपान इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, ये फेफड़ों के लिए सबसे खतरनाक है, लेकिन खतरा सिर्फ सिगरेट तक सीमित नहीं है। हमारी रोजमर्रा की कई गलतियां भी लंग्स की सेहत को नुकसान पहुंचाती रहती हैं।
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पैसिव स्मोकिंग के खतरे - फोटो : Amarujala.com/AI
सिगरेट और तंबाकू का धुआं सबसे बड़ा खतरा

डॉक्टर बताते हैं, सिगरेट पीना फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने वाली सबसे प्रमुख आदतों में से एक है है। तंबाकू के धुएं में हजारों रसायन होते हैं और इनमें कई कैंसर पैदा करने वाले भी पाए गए हैं। 
 
  • लंबे समय तक धूम्रपान से फेफड़ों में सूजन और ऊतकों को नुकसान हो सकता है। 
  • ये क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज यानी सीओपीडी से लेकर फेफड़ों के कैंसर तक के खतरे को बढ़ाने वाली आदत हो सकती है।
  • सिर्फ खुद सिगरेट पीना ही समस्या नहीं है। दूसरे व्यक्ति के सिगरेट के धुएं के बार-बार संपर्क में रहना भी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है। इसे सेकेंड हैंड स्मोकिंग कहा जाता है। 

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प्रदूषण का फेफड़ों पर असर - फोटो : Adobe Stock
प्रदूषित हवा का फेफड़ों पर असर

शहरों में रहने वाले लोगों के लिए वायु प्रदूषण भी चिंता का विषय है। कई अध्ययनों से स्पष्ट हो चुका है कि प्रदूषित हवा में मौजूद पीएम 2.5 जैसे सूक्ष्मकण फेफड़ों को तो डैमेज करते ही हैं, साथ ही ये खून में मिलकर शरीर के दूसरे अंगों तक भी पहुंच सकते हैं। 
 
  • इसी तरह से लंबे समय तक शारीरिक रूप से निष्क्रिय रहना भी फेफड़ों की कार्यक्षमता को कम करने वाला हो सकता है। 
  • अच्छी बात यह है कि इनमें से कई जोखिमों को कम किया जा सकता है। समय रहते सावधानी आपके फेफड़ों को किसी जानलेवा बीमारी से बचाने में मददगार हो सकती है।
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फेफड़ों की सेहत का रखें ख्याल - फोटो : Adobe Stock
कम उम्र से ही सावधानी जरूरी

डॉ गौरव बताते हैं, फैक्ट्रियों में धूल, सिलिका, धुएं और केमिकल से होने वाली जलन भी लोगों में अस्थमा, सीओपीडी और न्यूमोकोनियोसिस का खतरा बढ़ाने वाली पाई गई है। अगर आप ऐसे जगहों पर काम करते हैं तो सुरक्षा के लिए मास्क जरूर लगाएं। जिस तरह से फेफड़ों की बीमारियों को बोझ बढ़ता जा रहा है, ऐसे में हम सभी को कम उम्र से ही अलर्ट हो जाने की जरूरत है।



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स्रोत:
All lung conditions


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
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