लाइफस्टाइल और खान-पान की गड़बड़ी ने वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं को काफी बढ़ा दिया है। लिवर की बीमारियों का बोझ भी अब काफी बढ़ गया है। लिवर रोगों को कुछ दशकों पहले तक बढ़ती उम्र के साथ जुड़ी समस्या के तौर पर जाना जाता था, हालांकि अब कम उम्र वाले यहां तक कि बच्चे भी इसका शिकार हो रहे हैं।
लिवर हमारे शरीर का जरूरी अंग है। ये ऊर्जा प्रदान करने, शरीर से गंदगी को बाहर निकालने और पाचन ठीक रखने में मदद करता है, हालांकि ये अंग अब खतरे में देखा जा रहा है। लिवर की बीमारियां लंबे समय तक बिना कोई बड़ा संकेत दिए बढ़ती रह सकती हैं, ये सबसे बड़ी चिंता है। जब तक लक्षण स्पष्ट दिखते हैं, तब तक कई मामलों में नुकसान काफी ज्यादा हो चुका होता है।
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि मेटाबॉलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज (एमएएफएलडी) के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, जो एक बड़ी वैश्विक स्वास्थ्य चिंता के रूप में उभर रही है। 'द लैंसेट गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड हेपेटोलॉजी' में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार साल 1990 में 50 करोड़ लोगों से बढ़कर 2023 में दुनिया भर में लगभग 130 करोड़ लोग इसका शिकार थे। यह आंकड़ा 1990 की तुलना में 143 प्रतिशत की चौंकाने वाली वृद्धि को दर्शाता है।