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World Liver Day: क्या हाई प्रेशर या शुगर बढ़ने से भी लिवर को नुकसान होता है? डॉक्टर से जानिए जरूरी बातें

Sat, 19 Apr 2025 07:42 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पिछले एक दशक में लिवर की गंभीर बीमारियों के मामले कम उम्र के लोगों में भी बढ़ते जा रहे हैं। डॉक्टर कहते हैं, जिन लोगों को अक्सर हाई ब्लड प्रेशर या शुगर बढ़े रहने की समस्या रहती है, उनमें भी लिवर की बीमारियों का खतरा अधिक देखा जाता रहा है। 
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लिवर की बढ़ती बीमारियों के गंभीर मामले - फोटो : Freepik.com
लिवर हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। ये फैट को ब्रेक डाउन करने में मदद करता है, साथ ही रक्त से हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालकर शरीर को स्वस्थ रखने में भी लिवर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सोचिए अगर ये अंग ठीक से काम करना बंद कर दे तो कितनी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं?

आश्चर्यजनक रूप से पिछले एक दशक में लिवर की गंभीर बीमारियों के मामले कम उम्र के लोगों में भी बढ़ते जा रहे हैं। फैटी लिवर, लिवर सिरोसिस यहां तक कि 30 से कम आयु के लोग कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।

लिवर की बढ़ती बीमारियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इससे बचाव को लेकर लोगों को शिक्षित करने के उद्देश्य से हर साल 19 अप्रैल को विश्व लिवर दिवस मनाया जाता है।
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लिवर की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
लिवर की बढ़ती बीमारियों का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लिवर की बढ़ती बीमारियों के लिए कोई एक कारण नहीं हैं। हमारी दिनचर्या और आहार में गड़बड़ी ने समय के साथ इस अंग को गंभीर क्षति पहुंचाई है। इसके अलावा डॉक्टर कहते हैं, जिन लोगों को अक्सर हाई ब्लड प्रेशर या शुगर बढ़े रहने की समस्या रहती है, उनमें भी लिवर की बीमारियों का खतरा अधिक देखा जाता रहा है। 

ब्लड प्रेशर और हाई शुगर किस तरह से लिवर के लिए दिक्कतें बढ़ा रहे हैं? आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
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ब्लड प्रेशर के कारण लिवर को होने वाली समस्याएं - फोटो : अमर उजाला
हाई ब्लड प्रेशर का लिवर पर असर

अमर उजाला से बातचीत में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ भार्गव शेखर बताते हैं, लाइफस्टाइल और आहार की गड़बड़ी के अलावा हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) और ब्लड शुगर (डायबिटीज) दोनों लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। 

अध्ययनों में नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (एनएएफएलडी) और हाई ब्लड प्रेशर के बीच गहरा संबंध पाया गया है। शरीर में लगातार ब्लड प्रेशर बढ़े रहने के कारण लिवर में रक्त की सप्लाई प्रभावित हो जाती है। अगर ये समस्या लंबे समय तक बनी रहती है तो इससे लिवर की कोशिकाओं को क्षति पहुंचने लगती है।

अमेरिकन जर्नल ऑफ हाइपरटेंशन की साल 2016 में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर था, उनमें एनएएफएलडी होने की आशंका दो गुना अधिक पाई गई।

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डायबिटीज और लिवर की समस्या - फोटो : Freepik.com
शुगर बढ़ा रहना भी ठीक नहीं

हाई ब्लड प्रेशर की ही तरह से हाई शुगर की स्थिति भी लिवर की सेहत के लिए ठीक नहीं है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं मधुमेह के शिकार लोगों में भी नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर रोग का खतरा बढ़ जाता है। इस स्थिति में, आपके लिवर में सामान्य से अधिक मात्रा में फैट जमा हो जाती है। 

इसके अलावा टाइप-2 डायबिटीज की स्थिति में शरीर इंसुलिन के प्रति रेसिस्टेंट हो जाता है। इसका असर लिवर की मेटाबॉलिक प्रोसेसिंग पर भी होता है। इससे संबंधित डायबिटीज केयर जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार डायबिटीज के मरीजों में एनएएफएलडी का खतरा बिना डायबिटीज वाली की तुलना में अधिक था।
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लिवर की सेहत का कैसे रखें ध्यान - फोटो : Adobe stock
इस तरह की समस्याओं से कैसे बचा जाए?

डॉ भार्गव कहते हैं, लिवर को स्वस्थ रखना इतना भी कठिन नहीं है बस आपको कम उम्र से ही कुछ बातों पर गंभीरता से ध्यान देते रहना चाहिए। 
  • ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर की नियमित रूप से मॉनिटरिंग करते रहें। अगर इसका स्तर लगातार बढ़ा हुआ रहता है तो समय रहते डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें। 
  • इसके अलावा नियमित एक्सरसाइज भी जरूरी है इससे वजन नियंत्रित रहता है। फैटी लिवर जैसी समस्याओं को कम करने के लिए वजन कंट्रोल में रखना जरूरी है।  
  • लो फैट और लो कार्बोहाइड्रेट वाली चीजों का सेवन करें और शराब से बिल्कुल दूरी बनाकर रखें। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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